धोनी की ऐतिहासिक पारी के 21 साल पूरे, जयपुर में श्रीलंका के खिलाफ जड़े थे 10 छक्के

भारतीय क्रिकेट इतिहास के स्वर्णिम अध्यायों में 31 अक्टूबर का दिन महेंद्र सिंह धोनी के प्रशंसकों के लिए अत्यंत विशेष और ऐतिहासिक महत्व रखता है। आज से ठीक इक्कीस वर्ष पूर्व इसी ऐतिहासिक दिनांक को अपने विशिष्ट लंबे बालों के लिए पहचाने जाने वाले चौबीस वर्षीय युवा बल्लेबाज महेंद्र सिंह धोनी ने दुनिया को अपनी अद्वितीय आक्रामक बल्लेबाजी क्षमता का विहंगम परिचय दिया था। गुलाबी शहर जयपुर के सवाई मानसिंह स्टेडियम में श्रीलंका के विरुद्ध खेले गए एकदिवसीय श्रृंखला के तीसरे मुकाबले में धोनी ने अविश्वसनीय बल्लेबाजी करते हुए नाबाद 183 रनों की ऐतिहासिक पारी खेली थी, जिसने भारतीय क्रिकेट जगत में उनके मुकाम को पूरी तरह से बदलकर रख दिया था।

सचिन तेंदुलकर के शुरुआती झटके और धोनी को मिला महत्वपूर्ण प्रमोशन

उस रोमांचक मुकाबले में श्रीलंकाई टीम ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का निर्णय लिया था और निर्धारित पचास ओवरों में चार विकेट के नुकसान पर 298 रनों का मजबूत स्कोर खड़ा किया था। श्रीलंका की ओर से विकेटकीपर बल्लेबाज कुमार संगकारा ने 147 गेंदों में नाबाद 138 रनों की शानदार पारी खेली थी, जबकि महेला जयवर्धने ने भी 71 रनों का योगदान दिया था। भारत के सामने 299 रनों का एक चुनौतीपूर्ण लक्ष्य था, जिसे उस दौर के वनडे क्रिकेट में बेहद कठिन माना जाता था। भारतीय पारी की शुरुआत बेहद खराब रही और महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर पारी के पहले ही ओवर में चामिंडा वास की गेंद पर मात्र दो रन बनाकर पवेलियन लौट गए। इसके बाद तत्कालीन कप्तान राहुल द्रविड़ और कोच ग्रेग चैपल ने एक साहसिक निर्णय लेते हुए बल्लेबाजी क्रम में बड़ा फेरबदल किया और युवा धोनी को वन-डाउन यानी तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी के लिए मैदान पर भेज दिया।

मुरलीधरन समेत गेंदबाजों की धुनाई और तूफानी शतकीय पारी

तीसरे क्रम पर क्रीज पर उतरे महेंद्र सिंह धोनी ने पहली ही गेंद से श्रीलंकाई गेंदबाजों पर चौतरफा आक्रमण शुरू कर दिया और विपक्षी खेमे को संभालने का कोई अवसर नहीं दिया। उस दौर के दिग्गज स्पिनर मुथैया मुरलीधरन की फिरकी भी धोनी के आक्रामक तेवरों के सामने पूरी तरह बेअसर साबित हुई। युवा बल्लेबाज ने धुआंधार बल्लेबाजी करते हुए मात्र 85 गेंदों में अपना शानदार शतक पूरा कर लिया। इस मैराथन और विस्फोटक पारी में उन्होंने कुल 15 चौके और 10 गगनचुंबी छक्के जड़े। पारी के उत्तरार्ध में उन्हें पैरों की मांसपेशियों में गंभीर ऐंठन (क्रेम्प्स) की समस्या से भी जूझना पड़ा, परंतु इसके बावजूद उन्होंने अपने खेलने के आक्रामक अंदाज में कोई कमी नहीं आने दी और अंत तक नाबाद रहते हुए टीम को विजयश्री दिलाई।

रिकॉर्डों की झड़ी और विश्व क्रिकेट को मिला महान कप्तान

इस रिकॉर्ड-तोड़ पारी के दौरान महेंद्र सिंह धोनी ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कई बड़े कीर्तिमान अपने नाम किए। उन्होंने वनडे क्रिकेट में किसी भी विकेटकीपर बल्लेबाज द्वारा सर्वोच्च व्यक्तिगत स्कोर (183 नाबाद) बनाने के मामले में ऑस्ट्रेलिया के दिग्गज एडम गिलक्रिस्ट के 172 रनों के पुराने रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया था, जो आज भी कायम है। इसके अलावा, एकदिवसीय पारी में किसी भारतीय बल्लेबाज द्वारा सबसे अधिक दस छक्के लगाने का रिकॉर्ड भी उनके नाम दर्ज हुआ था। जयपुर की इस जादुई पारी ने ही धोनी को अंतरराष्ट्रीय पटल पर स्थापित किया, जिसके बाद इस युवा ने भारतीय क्रिकेट टीम के सबसे सफल और यशस्वी कप्तान के रूप में अपनी अमिट छाप छोड़ी और देश को टी20 विश्व कप, वनडे विश्व कप तथा चैंपियंस ट्रॉफी जैसे प्रतिष्ठित खिताब दिलाए।

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