Saturday, February 24, 2024

जनसंख्या विस्फोट पर RSS प्रमुख ने देश के चेताया-जनसंख्या विस्फोट नहीं रुका तो बन सकते है दूसरे इस्ट तिमोर और कोसोवा जैसे देश

विजयादशमी के मौके पर नागपुर में हर साल RSS मुख्यलय में हर साल शस्त्र पूजन की परंपरा है.ये हर साल दशहरे पर होने वाला खास आयोजन है. इस मौके पर हर साल रैली का आयोजन होता है और आरएसएस प्रमुख रैली को संबोधित करते हैं. आज आरएसएस प्रमुख का संबोधिन कई मायने में बेहद खास है.आज के भाषण में आरएसएस प्रमुख ने वो बाते कहीं जो सहीं ना कहीं समाज में लगातार चर्चा का विषय़ बनी हुई हैं और जिसका असर आनेवाले चुनावों पर पड़ने की संभावना भी कहीं न कहीं है.

जनसंख्या नियंत्रण पर समग्र नीति बने औऱ कड़ाई से लागु हो

आरएसएस प्रमुख ने अपने पूरे भाषण में सबसे ज्यादा जोर जनसंख्या विस्फोट से होने वाली परेशानियों पर कही दिया. उन्होंने कहा कि  जनसंख्या अधिक होने का मतलब है बोझ ज्यादा होना .जनसंख्या का ठीक से उपयोग हो तो वो साधन बनता है.हमको विचार करना होगा कि 50 वर्षों के बाद हम कितने लोगों को खिला सकते हैं और उनका बोझ उठा सकते हैं.जनसंख्या नियंत्रण पर एक समग्र नीति बनाने की जरुरत है, और इसे सब पर समान रुप से लागु किये जाने की जरुरत हैं. जनसंख्या विस्फोट को लेकर नीति बनाने पर लगातार आरएसएस का जोर है लेकिन केंद्र सरकार की तरफ से कोई ठोस कदम नहीं उठाये जा रहे हैं.

महिलाओं की सहभागिता पर जोर

RSS प्रमुख ने कहा कि शक्ति और शांति है समाज में शुभ का आधार है.महिलाओं को निर्णय लेने की प्रक्रिया में बढ़ावा दिये जाने की जरुरत है. हेडगेवार के समय में भी कई महिलाएं संघ के कार्यक्रम में आती रही हैं.समाज को संगठित करने के लिए दोनों की जरुरत है. स्त्री और पुरुष में श्रेष्ठ कौन है, ये सोच बेकार है.

RSS प्रमुख ने मातृ शक्ति के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि जो काम पुरुष कर सकते हैं वो महिलाएं भी कर सकती हैं लेकिन जो काम महिलाएं कर सकती है हैं वो पुरुष नहीं कर सकते हैं. महिलाओं के जोड़े बिना समाज में संगठन नहीं हो सकता है.जब तक महिलाओं से नहीं जोड़ा जायेगा संगठन की कोशिश पूरी नहीं होगी.

अंतराष्ट्रीय स्तर पर भारत का सम्मान बढ़ा

मोहन भागवत ने देश से लेकर अंतराष्ट्रीय पटल पर बदल रहे हालात पर भी बात की. उन्होंने कहा कि दुनिया भारत की बात सुन रही है. जिस तरह से भारत ने श्रीलंका संकट में श्रीलंका की मदद की, रुस-यूक्रेन युद्ध में अपना हित रखते हुए विश्वपटल पर अपनी बात रखी, उससे भारत का विश्व में सम्मान बढ़ा है. कोरोना संकट के बाद देश की अर्थ व्यवस्था पटरी पर लौट रही है.राष्ट्र सुरक्षा के मामले में भारत स्वाबलंबी हो रहा है.खेल के क्षेत्र में खिलाड़ी बढ़चढ़ कर प्रदर्शन कर रहे हैं.

मुस्लिम समुदाय को सीख

आरएसएस प्रमुख ने पैगंबर मोहम्मद विवाद में देश भर में हुई निर्मम हत्याओं का जिक्र करते हुए कहा कि कि गलत के खिलाफ अवाज उठायी जानी चाहिये.कई मुस्लिम बुद्धिजीवियों ने इसके खिलाफ खुल कर बोला ये अच्छी बात है. आरएसएस प्रमुख ने कहा कि अगर समाज मे कुछ गलत होता है तो हिंदु समाज उसके खिलाफ आवाज उठाता है. सभी समाज के लोगों को ऐसा करना चाहिये.

समाज को जीतने की नहीं जोड़ने की जरुरत है

भागवत ने कहा कि हमने भगवान से अजेय शक्ति मांगी है ताकि हम दुनिया जीत  सकें .वो शक्ति नहीं मांगी है जिससे हम दुनिया को जोड़ सकें. दुनिया दुष्ट है वो जीतना चाहती है. उनकी बुरी दृष्टि से हमें अपने मूल्यों, आचरण को बचाना है और इसे सारी दुनिया को देना है .हम किसी को डराने वाले नहीं हैं. ‘ना भय काहु को देत हैं ना डरे आप. ‘ऐसा हिंदु खड़ा करने का प्रण है औऱ वही काम हम करते हैं.

संघ का डर दिखा रही है समाज तोड़ने वाली ताकतें

आरएसएस प्रमुख ने कहा कि हम विश्व मे हर जगह शांति और भाईचारे का संदेश देते हैं, लेकिन कुछ तत्व हैं जो ये हौव्वा फैलाते हैं कि ये हिंदु संगठन है,इनकी वजह से हमें देश के बाहर जाना होगा.हम इसका नराकरण पिछले कई वर्षो से करते रहे हैं, ये कोई नई बात नहीं है.ये प्रत्यक्ष रुप से तब शुरु हुआ जब गुरुजी(संध के संस्थापक गोलवरकर) से जिलानी मिले तब से ये क्रम धीरे धीरे बढ़ ही रहा है.तब से लगतार ये क्रम बढ रहा है.संवाद का क्रम चलता रहे यही आरएसएस की इच्छा है.

अलगाववाद की भावना से बाहर आना होगा

हम सब अलग अलग दिखते हैं इसलिए हम भारत के लोग नहीं हैं, ये गलत भावना है.इस भावना के दुष्परिणाम हमने देखे हैं. भाई टूटे…धरती छूटी.. मिटे धर्म संस्थान. हमको फिर से उस रास्ते पर नहीं जाना है . हमें देश को जोड़ना है.चाहे पंथ अलग अलग हो , आचार विचार अलग हों लेकिन हम सब एक संस्कृति से जुड़े हैं, औऱ एक देश के लोग हैं . हम समाज और राष्ट्रीयता के नाते एक हैं, और एक रहने में ही सबका कल्याण है.

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