अहमदाबाद (Ahmedabad)
मोरबी ब्रिज हादसे पर राज्य सरकार द्वारा की गई कार्रवाई और पीड़ितों को दी गई मदद को लेकर गुजरात हाई कोर्ट ने सरकार को जम कर लताड़ लगाई है. हाईकोर्ट ने गुरुवार को इस मामले पर सुनवाई करते हुए सरकार को आदेश दिया कि राज्य सरकार सभी पुलों का सर्वे करें और ये सुनिश्चित करें कि राज्य के सभी पुल सही हालत में हों. कोर्ट ने सरकार ने सरकार को आदेश दिया है कि सरकार उन सभी पुलों की एक लिस्ट बना कर कोर्ट में जमा करें, जो सामान हालत (मोरबी जैसे ) के हैं. कोर्ट ने सरकार को ताकीद की है कि कोर्ट में जमा करने से पहले पुलों से संबंधित सभी कागजात प्रमाणित (certified ) होने चाहिये .
हाई कोर्ट ने पीड़ितों को दिये गये मुआवजे को लेकर भी गुजरात सरकार को जम कर फटकार लगाई. कोर्ट ने कहा कि ये देखा गया है कि हादसे के पीड़ितों को जो मुआवजा दिया गया है वो बेहद कम है. मुआवजा समय के हिसाब से मतलब यथार्थवादी और हालात को देखते हुए दिया जाना चाहिये. हाईकोर्ट ने सरकार को ये भी निर्देश दिया कि सरकार किस आधार पर (policy for compensation) मुआवजा तय करती है, इसकी एक एफिटडेबिट समेत विस्तृत रिपोर्ट कोर्ट में पेश करें.
30 अक्तूबर को हुए मोरबी पुल हादसे में 135 लोगों की मौत हो गई थी. इस पुल को लेकर स्थानीय प्रशासन की जबरदस्त लापरवाही नजर आई थी और हादसे का एक बड़ा कारण ये लापरवाही ही थी, जिसमें 135 मासूमों की जान ले ली थी. हादसे में बड़ी संख्या में लोग घायल भी हुआ थे. उस समय देश के प्रधानमंत्री मोदी और गुजरात के वर्तमान मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने हर संभव सहायता और उचित मुआवजे की बात कही थी लेकिन समय के साथ देखा गया कि लोगों के मुआवजा राशी बेहद कम मिली. आपको बता दें गुजरात हाईकोर्ट ने ये मामला स्वतः संज्ञान में लिया है.

