Friday, February 23, 2024

ज्ञानवापी परिसर में मज़ार पर चादर चढ़ाने की मांग की याचिका पहुंची कोर्ट

वाराणसी के सिविल जज सीनियर डिवीज़न की अदालत में एक याचिका दायर कर ज्ञानवापी परिसर में कथित तौर पर मौजूद मस्जिद के पीछे बने तीन मज़ारों पर उर्स करने और चादर चढ़ाने की इजाज़त माँगी गई है.

वाराणसी के रहने वाले मुख्तार अहमद अंसारी ने याचिका दायर कर ज्ञानवापी परिसर में तथाकथित मज़ारों पर उर्स करने और चादर की इजाजत देने की मांग की है.

ये याचिका 26 जुलाई 2022 को सिविल जज सीनियर डिवीज़न में डाली गई थी.याचिकाकर्ता मुख्तार अहमद अंसारी के अनुसार सन 1990 तक तथाकथित मज़ारों पर उर्स और चादर चढ़ाया जाता था.अंजुमन इंतजामियां मस्जिद कमेटी के लोगों ने ही उर्स करने और चादर चढ़ाने पर रोक लगा दी थी, क्योंकि, अंजुमन इंतजामियां मसाजिद कमेटी के लोग बाबा को नहीं मानते हैं. अंजुमन इंतजामियां मसाजिद कमेटी के लोग देवबंदी समाज के लोग हैं और हम लोग सुन्नी जमात से आते हैं. याचिका में कहा गया है कि 1993 में यहां बैरिकेटिंग कर दी गई थी.जब ज्ञानवापी मामला कोर्ट में आगे बढ़ा तब मैंने (याचिकाकर्ता मुख्तार अहमद अंसारी) ने इन लोगों से बात करने की कोशिश की तब इन लोग ने मुझे बात नहीं किया, इसीलिए मैंने और 5 लोगों ने नया सूट फ़ाइल कर दिया.

याचिकाकर्ता मुख्तार अहमद अंसारी ने बताया कि उनके द्वारा दाखिल की गई याचिकी की केस संख्या 913/2022 है,और इस मामले पर  सुनवाई के लिए 03 अक्टूबर 2022 की तारीख तय हुई है.

इस केस में  मुख्तार अहमद अंसारी VS उत्तर प्रदेश सरकार, अंजुमन इंतजामियां मसाजिद कमेटी को पार्टी बनाया गया है.

याचिकाकर्ता मुख्तार अहमद अंसारी के मुताबिक  मुस्लिम पक्ष (अंजुमन इंतजामियां मसाजिद कमेटी के लोग सिर्फ मस्जिद के लिए लड़ रहे हैं, मज़ार के लिए भी लड़ते तो हमें याचिका नहीं डालनी पढ़ती. याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि  वक्फ बोर्ड के लोग अंजुमन इंतजामियां मसाजिद कमेटी के प्रभाव में है.

याचिकाकर्ता मुख्तार अहमद अंसारी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट, हाई कमीशन द्वारा सर्वे करके जांच कराया जाये औऱ उसके बाद अगर ये साबित हो जाये कि वहां मंदिर हैं तो पूजा शुरू करने में एक मिनट की देरी नहीं होनी चाहिए.

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