नई दिल्ली। देश के सबसे बड़े केंद्रीय अर्धसैनिक बल 'केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल' (CRPF) में लंबे समय से पदोन्नति का इंतजार कर रहे जवानों और अधिकारियों के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। बल मुख्यालय ने सिपाही से लेकर इंस्पेक्टर रैंक तक के कार्मिकों के लिए बड़े पैमाने पर पदोन्नति के आधिकारिक आदेश जारी कर दिए हैं। हाल ही में बल के लगभग 263 ग्राउंड कमांडरों यानी 'सहायक कमांडेंट' को उनके सेवाकाल के 15वें वर्ष में पहली पदोन्नति देते हुए 'डिप्टी कमांडेंट' बनाया गया था। उच्च पदों पर हुई इस पदोन्नति के बाद निचले रैंकों में भी पदोन्नति का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया, जिससे बल के हजारों जवानों को सीधा लाभ मिला है।
मुख्यालय ने जारी किए सिपाही से इंस्पेक्टर रैंक तक के पदोन्नति आदेश
महानिदेशालय द्वारा जारी किए गए ताजा दिशा-निर्देशों के अनुसार, सर्वोच्च न्यायालय के 16 अप्रैल 2026 के आदेश (सिविल अपील संख्या 4585-4586/2025) के अनुपालन में सरकार ने सहायक कमांडेंट (सामान्य ड्यूटी) को डिप्टी कमांडेंट बनाने की अंतिम मंजूरी दी थी। इसके तुरंत बाद रिक्त हुए पदों को भरने के लिए निचले स्तर पर भी आदेश जारी कर दिए गए। नए आदेश के तहत 63 इंस्पेक्टरों को सहायक कमांडेंट के पद पर पदोन्नत किया गया है। इसके अलावा, 61 सब-इंस्पेक्टरों (SI) को इंस्पेक्टर, 59 असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टरों (ASI) को सब-सिंस्पेक्टर और 58 सिपाहियों को हवलदार (हेड कांस्टेबल) के पद पर पदोन्नति का तोहफा मिला है।
अदालती रोक के कारण तीन वर्षों तक लटका रहा प्रमोशन
पदोन्नति की यह प्रक्रिया वास्तव में तीन वर्ष पहले ही पूरी हो जानी थी, लेकिन एक कानूनी विवाद के चलते इसमें काफी लंबा विलंब हुआ। दरअसल, 71 डीएएसओ स्थानीय रूप से पदोन्नत सहायक कमांडेंट की ओर से अदालत में एक याचिका दायर की गई थी। इस मामले के चलते वर्ष 2023 में होने वाली विभागीय पदोन्नति कमेटी (DPC) की बैठक पर कोर्ट ने स्थगन आदेश (स्टे) लगा दिया था। 'कमलेश पांडे बनाम भारत सरकार' नामक इस कानूनी मामले को पूरी तरह सुलझने में तीन साल का लंबा वक्त लग गया, जिसके कारण सिपाही से लेकर अधिकारी वर्ग तक के सभी कर्मियों को रैंक वृद्धि के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा। इस देरी की वजह से बल के कई ऐसे कार्मिक भी रहे, जो पदोन्नति का लाभ पाए बिना ही सेवानिवृत्त हो गए, जिससे उन्हें रैंक और आर्थिक स्तर पर बड़ा नुकसान उठाना पड़ा।
सर्वोच्च न्यायालय से हरी झंडी मिलते ही प्रक्रिया में आई तेजी
विभागीय पदोन्नति कमेटी पर शीर्ष अदालत द्वारा लगाया गया स्थगन आदेश करीब तीन महीने पहले ही हटाया गया था। इसके तुरंत बाद बल मुख्यालय ने मुस्तैदी दिखाते हुए 17 अप्रैल को ही देश के सभी जोनों, ग्रुप सेंटरों और वाहिनियों (यूनिटों) को एक अति आवश्यक वायरलेस संदेश भेजा था। इस आदेश में उन सभी सहायक कमांडेंट की नवीनतम मेडिकल रिपोर्ट तुरंत भेजने के निर्देश दिए गए थे, जिन्हें डिप्टी कमांडेंट के पद पर प्रमोट किया जाना था। इस सूची में सीधे नियुक्त राजपत्रित अधिकारी, विभागीय प्रवेश पाने वाले अधिकारी और स्थानीय स्तर पर पदोन्नत अधीनस्थ अधिकारी शामिल थे, जिनका रास्ता साफ हो गया है।
महानिदेशक के प्रयासों से जवानों और अफसरों को मिला हक
इस पूरी कमान और पदोन्नति प्रक्रिया को सुचारू रूप से अमलीजामा पहनाने में बल के महानिदेशक (DG) जीपी सिंह की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही है। सैनिक सम्मेलनों और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जब भी जवानों और अधिकारियों ने पदोन्नति में हो रही देरी का मुद्दा उठाया, तो महानिदेशक ने उन्हें आश्वस्त किया था कि वे इस विषय पर बेहद गंभीरता से काम कर रहे हैं। गृह मंत्रालय के समक्ष मजबूती से पक्ष रखने और अदालत में प्रभावी पैरवी करने के बाद अंततः यह प्रयास सफल रहा। डीजी सिंह ने स्वयं बल मुख्यालय में दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र के अधिकारियों के कंधों पर डिप्टी कमांडेंट के नए रैंक के स्टार लगाकर उनके उज्जवल भविष्य की कामना की।

