Sunday, February 22, 2026

आवारा कुत्तों पर सुप्रीम कोर्ट में जमकर हुई बहस, तीन सदस्यीय पीठ का फैसला सुरक्षित

Street Dog Supreme Court नई दिल्ली : दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में आवारा कुत्तों को पकड़ कर आश्रय गृहों में भेजने संबंधी शीर्ष अदालत के 11 अगस्त के आदेश पर रोक की मांग वाली याचिकाओं पर गुरुवार को यहां फिर जमकर बहस हुई और संबंधित पक्षों की दलीलें सुनने के बाद तीन सदस्यीय पीठ ने अपना फैसला सुरक्षित रखा लिया. मुख्य न्यायाधीश बी आर गवई ने दो सदस्य पीठ के 11 अगस्त के आदेश के मद्देनजर स्वत: संज्ञान इस मामले में बुधवार को न्यायमूर्ति विक्रम नाथ की अध्यक्षता वाली तीन न्यायाधीशों की एक नयी पीठ गठित की थी.

Street Dog Supreme Court : 3 जजों की पीठ में पहुंचा आवारा कुत्तों का मामला  

न्यायमूर्ति नाथ, न्यायमूर्ति संदीप मेहता और न्यायमूर्ति एन वी अंजारिया की पीठ ने सड़कों पर रहने वाले आवारा कुत्तो को शेल्टर्स में पहुंचाने का मामले की सुनवाई की. पीठ ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के  दो सदस्यीय वाली पीठ के आदेश की वैधता पर सवाल उठाने वाले सभी हस्तक्षेपकर्ताओं से हलफनामा दाखिल करने के लिए कहा.  तीन सदस्यीय पीठ ने  इस मामले में टिप्पणी करते हुए कहा कि एक तरफ मानवीय पीड़ा है और दूसरी तरफ पशु प्रेमी हैं.

सुप्रीम कोर्ट ने प्रसाशन की निष्क्रियता को किया रेखांकित

सुप्रीम कोर्ट की नई पीठ ने  गुरुवार यानी आज सुनवाई के दौरान दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) की ओर से पेश हुए वकील से कहा कि यह सब उनकी (नगर निगम) की निष्क्रियता के कारण हो रहा है. एमसीडी की तरफ से पेश हुए एडवोकेट पाठक दवे ने कहा कि हम यहां कोर्ट के हर आदेश को मानने के लिए आये हैं. उसका पालन करने के लिए ही यहां मौजूद हैं. इस पर कोर्ट  ने कहा कि यहां आपके कहने के लिए कुछ नहीं है. ये समस्या नगर निगम की निष्क्रियता के कारण ही हो रही है.

कोई भी जानवरों से नफरत नहीं करता – तुषार मेहता 

इस मामले में सरकार के वकील सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने शीर्ष आदालत से कहा कि  हम इस समस्या का समाधान चाहते हैं,न कि विवाद . यहामं कोई भी जानवरों से नफरत नहीं करता . हम भी इस समस्या का हल चाहते हैं.

इसपर तीन जजों की बेंच के जस्टिस नाथ ने कहा कि स्थानीय अधिकारी वो नहीं कर रहे हैं, जो उन्हें करना चाहिए. उन्हें  जिम्मेदारी लेनी चाहिए,हस्तक्षेप दर्ज कराने आए हर व्यक्ति को जिम्मेदारी लेनी चाहिए.

अभिषेक मनु सिंहवी ने भी किया विरोध 

कोर्ट में सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंहवी ने भी 11 अगस्त के फैसले का विरोध किया. उन्होने कहा कि कुत्तों के काटने की घटनाएं तो होती हैं, लेकिन दिल्ली में इस साल  रेबीज से एक भी मौत नहीं हुई है.  कुत्तों का काटना बेशक बुरा है, आप इस तरह का आदेश देकर स्थिति को भयावह नहीं कर सकते.

वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने भी सुप्रीम कोर्ट के 11 अगस्त के फैसले का विरोध करते हुए कहा कि फैसले पर रोक लगना चाहिये.

गुरुवार को वरिष्ठ वकीलों और समाजिक कार्यकर्ताओं की दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट के तीन जजों की बेंच ने फिलहल इस मामले पर फैसला सुरक्षित रख लिया है.  

Latest news

Related news