मालदा (पश्चिम बंगाल): जंगलों, पहाड़ों, नदियों और रेगिस्तानों को चीरती हुई भारतीय रेल देश के कोने-कोने को जोड़ती है। उत्तर में बारामूला, दक्षिण में कन्याकुमारी और पश्चिम में गुजरात का ओखा रेलवे स्टेशन भारतीय रेल के आखिरी छोर माने जाते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत के पूर्वी छोर पर एक ऐसा ऐतिहासिक रेलवे स्टेशन भी है, जिसके आगे भारतीय रेल की सीमाएं खत्म हो जाती हैं? इस स्टेशन का नाम है सिंहाबाद रेलवे स्टेशन। इस स्टेशन की कहानी जितनी दिलचस्प है, इसका भूगोल उतना ही अनोखा है।
सिंहाबाद: भारत की पूर्वी सीमा का अंतिम पड़ाव
पश्चिम बंगाल के मालदा जिले के हबीबपुर ब्लॉक में स्थित सिंहाबाद रेलवे स्टेशन भारतीय रेलवे नेटवर्क का सबसे पूर्वी सीमांत (Border) स्टेशन है। इस स्टेशन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसके ठीक आगे से पड़ोसी देश बांग्लादेश की सीमा शुरू हो जाती है। यह भौगोलिक रूप से भारत का वह अंतिम बिंदु है, जहां भारतीय पटरियां सीधे बांग्लादेश के रेलवे नेटवर्क से जुड़ती हैं।
अजूबा: प्लेटफॉर्म हैं, पटरियां हैं, पर मुसाफिर एक भी नहीं!
इस स्टेशन की सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि यहां आज के समय में कोई भी पैसेंजर (यात्री) ट्रेन नहीं रुकती। देश के विभाजन के बाद यहां से धीरे-धीरे यात्री सेवाओं को बंद कर दिया गया। आज इस स्टेशन के टिकट काउंटर हमेशा बंद रहते हैं और यहां के प्लेटफॉर्म्स पर पूरी तरह सन्नाटा पसरा रहता है। यहां केवल स्टेशन के संचालन और सुरक्षा के लिए कुछ चुनिंदा रेलवे कर्मचारी ही तैनात रहते हैं।
आज भी मौजूद है ब्रिटिश काल का सिस्टम
सिंहाबाद रेलवे स्टेशन सिर्फ भौगोलिक रूप से ही नहीं, बल्कि ऐतिहासिक रूप से भी एक धरोहर है। आज जब भारतीय रेलवे पूरी तरह डिजिटल और आधुनिक हो चुकी है, इस स्टेशन पर ब्रिटिश शासन काल के समय के सिग्नल गियर, हाथ से चलने वाले पुराने बैरियर और उपकरण आज भी देखे जा सकते हैं। समय जैसे इस स्टेशन पर आकर थम सा गया है।
अंतरराष्ट्रीय व्यापार की लाइफलाइन: भले ही यहां आम यात्रियों का आना-जाना बंद हो चुका हो, लेकिन भारत के लिए इस स्टेशन का महत्व कम नहीं हुआ है। साल 1978 में भारत और बांग्लादेश के बीच हुए एक द्विपक्षीय समझौते के बाद, इस रूट को मालगाड़ियों के लिए खोल दिया गया था। आज भारत से बांग्लादेश को भेजे जाने वाले स्टोन चिप्स और अन्य व्यापारिक सामान इसी रेल कॉरिडोर के जरिए सीमा पार जाते हैं।
जियोपॉलिटिक्स (भू-राजनीति) के लिए बेहद अहम
सिंहाबाद के ठीक आगे बांग्लादेश का 'रोहनपुर' रेलवे स्टेशन आता है। भले ही यह स्टेशन भारतीय रेलवे के लिए आर्थिक रूप से सीधे तौर पर कोई कमाई नहीं करता, लेकिन भारत और बांग्लादेश के बीच मजबूत रिश्तों, कनेक्टिविटी और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिहाज से यह भारत की भू-राजनीति (Jiopolitics) का एक बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा है।

