प्रतापगढ़ में तनाव, किशोर की मौत के बाद परिजनों ने शव के साथ शुरू किया धरना

प्रतापगढ़| प्रतापगढ़ उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले के कंधई थाना क्षेत्र अंतर्गत आने वाले कोनी गांव में बीते 8 जुलाई को एक 14 वर्षीय किशोर की निर्मम हत्या के बाद से पूरे इलाके में तनाव और गहरा आक्रोश व्याप्त है। इस दिल दहला देने वाली वारदात ने पूरे गांव को हिलाकर रख दिया है। घटना के बाद पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा था। 9 जुलाई को जब पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद किशोर का पार्थिव शरीर वापस गांव लाया गया, तो स्वजन और आक्रोशित ग्रामीणों का धैर्य जवाब दे गया।

न्याय की मांग को लेकर पीड़ित परिवार, रिश्तेदारों और सैकड़ों ग्रामीणों ने शव को अंतिम संस्कार के लिए ले जाने के बजाय घर के ठीक सामने एक बड़ा टेंट लगा दिया। स्वजन ने शव को उसी टेंट में रखकर अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है। आज शुक्रवार (10 जुलाई) को भी यह धरना लगातार दूसरे दिन जारी है और गांव में भारी पुलिस बल की तैनाती के बावजूद स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। पीड़ित परिवार अपनी मांगों को लेकर अड़ा हुआ है और उनका साफ कहना है कि जब तक प्रतापगढ़ के जिलाधिकारी (डीएम) स्वयं मौके पर आकर उनकी समस्याओं को नहीं सुनते और ठोस कार्रवाई का आश्वासन नहीं देते, तब तक वे शव का अंतिम संस्कार किसी भी कीमत पर नहीं करेंगे।

जमीन के मामूली विवाद में पड़ोसियों ने ली 14 वर्षीय मासूम की जान

यह पूरी दर्दनाक घटना कोनी गांव की है। मिली जानकारी के अनुसार, गांव के निवासी पृथ्वीपाल पटेल का 14 वर्षीय पुत्र बुधवार (8 जुलाई) को अचानक इस क्रूरता का शिकार हो गया। बताया जा रहा है कि पीड़ित परिवार का उनके पड़ोसियों के साथ लंबे समय से जमीन का एक विवाद चल रहा था। इसी रंजिश और विवाद के चलते बुधवार को पड़ोस के कुछ दबंगों ने किशोर को अपना निशाना बनाया और उसकी बेरहमी से हत्या कर दी। इस घटना के बाद से ही कोनी गांव के लोगों में स्थानीय पुलिस प्रशासन के खिलाफ भी काफी गुस्सा है। ग्रामीणों का आरोप है कि यदि भूमि विवाद की शिकायत पर पुलिस ने समय रहते सख्त रुख अपनाया होता, तो आज एक मासूम बच्चे की जान नहीं जाती।

राजनीतिक दलों के नेताओं की कोशिशें नाकाम, स्वजन अपनी मांग पर अड़े

मामले की गंभीरता और बढ़ते जन आक्रोश को देखते हुए आज शुक्रवार सुबह से ही विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं और जनप्रतिनिधियों का कोनी गांव में तांता लगा रहा। पीड़ित परिवार को ढांढस बंधाने और अंतिम संस्कार के लिए मनाने के उद्देश्य से कांग्रेस के जिलाध्यक्ष डॉ. नीरज त्रिपाठी, सदर विधायक राजेंद्र मौर्य तथा पूर्व विधायक नागेंद्र उर्फ मुन्ना यादव भारी समर्थकों के साथ मौके पर पहुंचे।

इन सभी नेताओं ने पीड़ित पिता पृथ्वीपाल पटेल और अन्य स्वजनों से बंद कमरे और टेंट में काफी देर तक बातचीत की। नेताओं और प्रशासनिक अधिकारियों ने परिवार को समझाने-बुझाने का हर संभव प्रयास किया कि वे कानून पर भरोसा रखें और पहले शव का सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार कर दें। लेकिन स्थानीय नेताओं और अधिकारियों की यह कोशिश पूरी तरह नाकाम साबित हुई। किशोर के स्वजन और वहां मौजूद सैकड़ों ग्रामीण अपनी इस मांग पर पूरी तरह डटे हुए हैं कि जब तक जिले के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी यानी डीएम खुद यहां नहीं आते और अपराधियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई, पीड़ित परिवार को सुरक्षा और उचित मुआवजे की घोषणा नहीं करते, तब तक विरोध प्रदर्शन समाप्त नहीं होगा।

गांव में भारी पुलिस बल तैनात, न्याय के लिए सड़क पर उतरने की चेतावनी

धरने की संवेदनशीलता को देखते हुए कंधई थाने के साथ-साथ आसपास के कई अन्य थानों की पुलिस फोर्स और पीएसी (PAC) के जवानों को एहतियातन कोनी गांव में तैनात कर दिया गया है। उच्च पुलिस अधिकारी भी लगातार ग्रामीणों से संवाद स्थापित करने का प्रयास कर रहे हैं ताकि कानून-व्यवस्था की स्थिति नियंत्रण में रहे।

दूसरी तरफ, नागरिक समाज और ग्रामीणों ने एक स्वर में प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि उनकी जायज मांगों को जल्द पूरा नहीं किया गया और आरोपियों के घरों पर सख्त कानूनी कार्रवाई नहीं हुई, तो यह आंदोलन केवल गांव तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे प्रतापगढ़ जिले में न्याय के लिए उग्र प्रदर्शन और चक्का जाम किया जाएगा। फिलहाल, प्रशासन और ग्रामीणों के बीच गतिरोध बरकरार है और सबकी नजरें अब जिला मुख्यालय के अगले कदम पर टिकी हुई हैं।

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