पसलियों में फ्रैक्चर और भारी रक्तस्राव, पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने बताई विक्रम सिंह की मौत की वजह

नई दिल्ली। दक्षिण-पूर्वी दिल्ली के किलोकरी इलाके में 54 वर्षीय मणिपुरी संगीतकार चोंगथाम विक्रम सिंह की पीट-पीटकर की गई हत्या के मामले में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। एम्स (AIIMS) दिल्ली की पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने साफ कर दिया है कि सिंह पर हमला किस कदर बर्बर और जानलेवा था। घर के बाहर स्थित एक ढाबे पर देर रात हो रहे शोरगुल और उपद्रव का विरोध करने पर दबंगों ने उन पर जानलेवा हमला कर दिया था। पुलिस ने इस सनसनीखेज वारदात में शामिल सात आरोपियों को गिरफ्तार कर एक नाबालिग को हिरासत में लिया है।

एम्स की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में खुली बर्बरता की पोल

पोस्टमार्टम जांच में मृतक के शरीर पर गंभीर अंदरूनी चोटों और फ्रैक्चर की पुष्टि हुई है। रिपोर्ट के अनुसार, सिंह की बाईं ओर की पहली से 11वीं पसली और दाईं ओर की छठी से नौवीं पसली टूटी हुई पाई गई। इन हड्डियों के टूटने की वजह से शरीर के भीतर भारी रक्तस्राव हुआ। इसके अतिरिक्त पूरे जिस्म पर गहरे घाव और खरोंच के कई निशान मिले हैं। मौत की वास्तविक परिस्थितियों और रासायनिक विश्लेषण के लिए डॉक्टरों ने विसरा सुरक्षित रख लिया है, जिसे टॉक्सिकोलॉजी लैब भेजा जाएगा।

इलाज के दौरान तोड़ा दम, लगातार रक्तस्राव बना मौत की वजह

वारदात के बाद गंभीर रूप से अचेत हो चुके सिंह को मंगलवार तड़के करीब 12:25 बजे परिजनों द्वारा होली फैमिली अस्पताल में भर्ती कराया गया था। चिकित्सकों के भरसक प्रयासों के बावजूद सुबह करीब 6:32 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। चिकित्सकीय रिपोर्ट में यह रेखांकित किया गया है कि पसलियों के टूटने के कारण अंगों के अंदर लगातार हो रहा रक्तस्राव ही उनकी जान जाने का प्रमुख कारण बना।

ढाबे के हंगामे का विरोध करने पर 'सबक सिखाने' की नीयत से किया हमला

घटनाक्रम के अनुसार, 7 सितंबर को सिंह ने अपने आवास के ठीक सामने संचालित ढाबे से आ रहे तेज शोर और उत्पात पर कड़ी आपत्ति जताई थी। इससे नाराज होकर आरोपियों ने उन पर प्राणघातक हमला बोल दिया। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए भारत कुमार, प्रमोद, रमजान खान, दीपांशु, मोहन विश्वकर्मा, विजय और मन्नू को सलाखों के पीछे भेज दिया है, जबकि एक विधि विवादित किशोर को बाल सुधार गृह भेजा गया है। आरोपियों में ढाबा कर्मी और डिलीवरी बॉय शामिल हैं, जिन्होंने पूछताछ में कबूला कि वे केवल सबक सिखाने गए थे, लेकिन मारपीट जानलेवा साबित हुई।

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