नई दिल्ली। संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) के 100 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में राजधानी में एक भव्य दो दिवसीय शताब्दी समारोह का आयोजन किया जा रहा है। इस ऐतिहासिक आयोजन में देश की प्रशासनिक व्यवस्था और सिविल सेवाओं के भविष्य को लेकर गहन मंथन किया जा रहा है।
भारत मंडपम में ‘शताब्दी समारोह-मंथन’ का आगाज
इस दो दिवसीय कार्यक्रम के पहले दिन यानी 30 सितंबर को प्रगति मैदान स्थित भारत मंडपम में ‘शताब्दी समारोह-मंथन’ का आयोजन किया गया। इस सत्र में विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिष्ठित वक्ताओं ने अपने बहुमूल्य विचार साझा किए। इसके बाद यूपीएससी और अन्य राज्य लोक सेवा आयोगों की कार्यप्रणाली, उनकी भूमिका और लोक सेवा से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर कई पैनल चर्चाएं हुईं, जिनमें आयोग के कामकाज को और बेहतर बनाने पर विचार-विमर्श किया गया।
विशिष्ट अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति
इस गरिमामयी कार्यक्रम में यूपीएससी के शीर्ष अधिकारियों के साथ-साथ देश के विभिन्न राज्यों के लोक सेवा आयोगों के अध्यक्ष और सदस्य भी शामिल हुए। इनके अलावा, केंद्र सरकार के कई वरिष्ठ अधिकारी, शिक्षाविद और देश के अन्य विशिष्ट लोग भी इस ऐतिहासिक आयोजन का हिस्सा बने। इस पूरे आयोजन का मुख्य उद्देश्य आयोग की 100 साल की गौरवशाली यात्रा के विभिन्न पहलुओं को देश के सामने रखना है।
1 अक्तूबर का मुख्य कार्यक्रम क्यों है खास
शताब्दी समारोह का दूसरा और मुख्य दिन 1 अक्तूबर को आयोजित किया जा रहा है, जो यूपीएससी के 100 वर्षों के सफर और भारतीय प्रशासनिक व्यवस्था में उसकी अहम भूमिका को रेखांकित करता है। आपको बता दें कि यूपीएससी की स्थापना वर्ष 1926 में हुई थी और भारतीय संविधान लागू होने के बाद इसे 'संघ लोक सेवा आयोग' का वर्तमान नाम मिला। यह आयोग केंद्र सरकार की विभिन्न सिविल सेवाओं के लिए परीक्षाएं आयोजित कर देश को कुशल प्रशासनिक अधिकारी देता रहा है।

