नई दिल्ली। देश के रक्षा क्षेत्र में पूर्ववर्ती 'ऑर्डनेंस फैक्ट्री बोर्ड' (ओएफबी) के अंतर्गत आने वाले आयुध कारखानों के करीब 62 हजार असैन्य (सिविलियन) कर्मचारियों के हक में एक बड़ा फैसला सामने आया है। भारत सरकार ने यह साफ कर दिया है कि जो कर्मचारी हाल ही में गठित सात नई रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों (डीपीएसयू) में स्थायी रूप से शामिल होने का विकल्प नहीं चुनेंगे, वे अपनी सेवानिवृत्ति (रिटायरमेंट) तक 'डीम्ड डेपुटेशन' (प्रस्तावित प्रतिनियुक्ति) पर बने रह सकते हैं। मंत्रियों के एक अधिकार प्राप्त समूह (एम्पावर्ड ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स) ने पिछले सप्ताह ही इस संवेदनशील प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी है।
लंबे समय से की जा रही थी मांग, रक्षा मंत्रालय ने जारी किया आदेश
अखिल भारतीय रक्षा कर्मचारी महासंघ (एआईडीईएफ) के महासचिव सी. श्रीकुमार के अनुसार, आयुध कारखानों के असैन्य कर्मी काफी समय से इस नीति का विरोध कर रहे थे। कर्मचारियों का रुख था कि वे नए सरकारी निगमों का हिस्सा नहीं बनना चाहते, इसके बावजूद उन्हें वहां प्रतिनियुक्ति पर काम करना पड़ रहा था। कर्मचारी संगठनों की मांग थी कि सरकार आधिकारिक अधिसूचना जारी कर उन्हें केंद्र सरकार के स्थायी कर्मचारी के रूप में काम करने की कानूनी मान्यता दे।
अब रक्षा मंत्रालय के रक्षा उत्पादन विभाग द्वारा 15 जून को जारी किए गए एक आधिकारिक ज्ञापन (ऑफिस मेमोरेंडम) से इस संशय पर विराम लग गया है। इस कदम से 1 अक्टूबर 2021 को 41 ऑर्डनेंस फैक्ट्रियों के निगमीकरण (कॉर्पोरेटाइजेशन) के बाद से 'डीम्ड डेपुटेशन' पर सेवाएं दे रहे हजारों परिवारों को बहुत बड़ी राहत मिली है।
अनिवार्य विलय की संभावना खत्म, मिलेगा कॉमन पैकेज
मंत्रालय के नए नीतिगत दिशा-निर्देशों के अनुसार, पुराने ओएफबी के सभी पात्र कर्मचारियों के समक्ष सातों नई कंपनियों द्वारा तैयार एक साझा समावेशन पैकेज (कॉमन एब्ज़ॉर्प्शन पैकेज) पेश किया जाएगा। हालांकि, यह पूरी तरह कर्मचारियों की इच्छा पर निर्भर करेगा कि वे इन नए निगमों में स्थायी तौर पर जाना चाहते हैं या नहीं। जो कर्मचारी इस पैकेज को स्वीकार नहीं करेंगे, वे बिना किसी दवाब के अपनी पूरी सेवा अवधि तक प्रतिनियुक्ति के नियमों के तहत काम करते रहेंगे। इससे किसी भी तरह के अनिवार्य कॉर्पोरेट विलय की आशंका अब पूरी तरह समाप्त हो गई है।
वेतन, भत्ते और सुविधाएं रहेंगी यथावत
मंत्रालय के आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि प्रतिनियुक्ति की व्यवस्था के तहत काम करने वाले कर्मियों पर केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए तय सभी नियम, कानून और प्रशासनिक आदेश प्रभावी रहेंगे। इसके अंतर्गत मिलने वाले वेतनमान, भत्ते, अवकाश, चिकित्सा लाभ, पदोन्नति (करियर प्रोग्रेशन) और सेवा से जुड़ी अन्य सभी शर्तें पूरी तरह सुरक्षित रहेंगी। इसे उन कर्मचारियों के लिए एक मजबूत सुरक्षा कवच माना जा रहा है जो निगमीकरण के बाद अपने भविष्य और अधिकारों को लेकर आशंकित थे।
डेप्युटेशन की अवधि में विस्तार और भविष्य की रूपरेखा
इस पूरी प्रक्रिया को सुचारू रूप से अमलीजामा पहनाने के लिए सरकार ने वर्तमान 'डीम्ड डेप्युटेशन' की समय-सीमा को 1 अक्टूबर 2026 से आगे बढ़ाते हुए 31 मार्च 2027 तक करने का निर्णय लिया है। कर्मचारी प्रतिनिधियों ने इस कदम का स्वागत करते हुए इसे कानूनी कार्यवाहियों के दौरान सरकार द्वारा दिए गए आश्वासनों की पूर्ति बताया है।
सी. श्रीकुमार ने इसे एक ऐतिहासिक सफलता बताते हुए कहा कि किसी भी कर्मचारी को उसकी मर्जी के बिना केंद्रीय कर्मचारी का दर्जा छोड़ने के लिए विवश नहीं किया जा सकता था। मद्रास हाई कोर्ट में दायर रिट याचिका और संगठन के लंबे संघर्ष ने इस रुख को सही साबित किया है। नई दिल्ली स्थित प्रशासनिक गलियारों में इस फैसले को कर्मचारियों के हितों की रक्षा और नई कंपनियों के सुचारू संचालन के बीच एक संतुलित कदम के रूप में देखा जा रहा है। अब कर्मचारी संगठनों ने मांग उठाई है कि दिवंगत कर्मियों के आश्रितों को अनुकंपा नियुक्ति देने की प्रक्रिया को भी जल्द शुरू किया जाए।

