नई दिल्ली: देश की राजनीति में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है, जहाँ केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार (25 जुलाई) को अपने पद से इस्तीफा देने का आधिकारिक ऐलान कर दिया है। नरेंद्र मोदी सरकार के पिछले 12 वर्षों के पूरे कार्यकाल के दौरान ऐसे बेहद दुर्लभ और कम मौके आए हैं, जब किसी केंद्रीय मंत्री को इस प्रकार भारी दबाव के चलते अपना पद छोड़ना पड़ा हो।
प्रधान के इस इस्तीफे के सामने आने के बाद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का एक पुराना बयान भी सोशल मीडिया पर काफी तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने कहा था कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) सरकार में मंत्रियों के इस्तीफे आसानी से नहीं होते। वहीं, कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने भी राजनाथ सिंह के इस पुराने बयान का जिक्र करते हुए कटाक्ष किया कि "दुनिया झुकती है, झुकाने वाला चाहिए।" आइए एक नजर डालते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अब तक के कार्यकाल में कब और किन-किन मंत्रियों ने अपने पद से इस्तीफे दिए और उनके पीछे क्या मुख्य कारण रहे।
मोदी सरकार के पहले कार्यकाल (2014-2019) के दौरान हुए प्रमुख इस्तीफे
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पहले कार्यकाल के दौरान, कुछ प्रमुख मंत्रियों ने नीतिगत विवादों के बजाय मुख्य रूप से राज्य के कामों, संगठनात्मक जिम्मेदारियों या कैबिनेट पुनर्गठन के चलते अपने पद छोड़े थे:
मनोहर पर्रिकर: गोवा के मुख्यमंत्री के रूप में राज्य की कमान संभालने के लिए उन्होंने 13 मार्च 2017 को केंद्रीय रक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दिया था।
एम. वेंकैया नायडू: देश के उपराष्ट्रपति पद के लिए एनडीए के उम्मीदवार के रूप में नामित होने के बाद 17 जुलाई 2017 को आवास और शहरी मामलों के मंत्री पद से इस्तीफा दिया था।
नजमा हेपतुल्ला: अगस्त 2016 में अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री पद से उन्होंने इस्तीफा दिया था। तब यह बात सामने आई थी कि यह निर्णय भारतीय जनता पार्टी के 75 वर्ष की आयु पार करने वाले नेताओं को लेकर बनाए गए आंतरिक नियम के तहत हुआ था।
सर्वानंद सोनोवाल: असम में भाजपा को ऐतिहासिक जीत दिलाकर सरकार बनवाने में सबसे अहम चेहरा रहे सोनोवाल ने 2016 में केंद्रीय कैबिनेट से त्यागपत्र दिया था, जिसके बाद पार्टी ने उन्हें असम का नया मुख्यमंत्री नियुक्त किया था।
सुरेश प्रभु: केंद्रीय रेल मंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान हुए दो बड़े रेलवे हादसों की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए उन्होंने इस्तीफा देने की पेशकश की थी। हालांकि, उनका इस्तीफा मंजूर नहीं हुआ, बल्कि मोदी सरकार ने अगले कैबिनेट फेरबदल के दौरान उन्हें रेल मंत्रालय से हटाकर वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंप दी थी।
एमजे अकबर: कुछ महिला पत्रकारों द्वारा गंभीर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए जाने के बाद, बढ़ते सार्वजनिक और नैतिक दबाव के बीच एमजे अकबर ने विदेश राज्य मंत्री के पद से 17 अक्टूबर 2018 को अपना इस्तीफा सौंप दिया था।
मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल (2019-2024) में हुए प्रमुख इस्तीफे
भारतीय जनता पार्टी की सरकार के दूसरे कार्यकाल में कई बड़े राजनीतिक बदलाव देखने को मिले। इस दौरान चुनावी समीकरणों, नीतिगत फैसलों और प्रशासनिक फेरबदल के कारण कई वरिष्ठ मंत्रियों ने अपने पद छोड़े। इस क्रम में 7 जुलाई 2021 को मोदी सरकार के पहले बड़े कैबिनेट विस्तार से ठीक पहले 12 मंत्रियों ने एक साथ इस्तीफा दिया था, जिनमें प्रमुख नाम शामिल हैं:
डॉ. हर्षवर्धन: कोविड-19 महामारी की दूसरी लहर के दौरान स्वास्थ्य मंत्रालय की कार्यप्रणाली को लेकर काफी सवाल खड़े हुए थे। हालांकि, उनसे बीच में इस्तीफा नहीं लिया गया, बल्कि उन्हें नियमित कैबिनेट फेरबदल के दौरान हटाया गया।
रविशंकर प्रसाद: सोशल मीडिया कंपनियों के साथ नियमों और गाइडलाइंस को लेकर चल रहे विवादों के बीच उन्होंने कानून और आईटी मंत्री का पद छोड़ा था। यह भी कैबिनेट फेरबदल का ही हिस्सा था।
प्रकाश जावड़ेकर: रणनीतिक बदलावों के तहत उन्होंने पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन तथा सूचना एवं प्रसारण मंत्री का पद छोड़ा था।
रमेश पोखरियाल 'निशंक': इन्होंने मुख्य रूप से अपने खराब स्वास्थ्य और चिकित्सा कारणों का हवाला देकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दिया था।
संतोष गंगवार और बाबुल सुप्रियो: इन दोनों नेताओं को भी इस फेरबदल के दौरान कैबिनेट से बाहर किया गया था। संतोष गंगवार को श्रम एवं रोजगार मंत्रालय से जबकि बाबुल सुप्रियो को राज्य मंत्री पद से हटाया गया था।
हरसिमरत कौर बादल: केंद्र सरकार के कृषि कानूनों के कड़े विरोध में सितंबर 2020 में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री के पद से अकाली दल की इस वरिष्ठ नेता ने इस्तीफा दिया था। इसके साथ ही उनकी पार्टी ने एनडीए गठबंधन से भी नाता तोड़ लिया था।
अरविंद सावंत: महाराष्ट्र में भाजपा और शिवसेना का पुराना राजनीतिक गठबंधन टूटने के बाद नवंबर 2019 में उन्होंने भारी उद्योग मंत्री के पद से त्यागपत्र दे दिया था।
पशुपति कुमार पारस: एनडीए के सहयोगी दल लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) के भीतर हुई टूट और चिराग पासवान को तरजीह दिए जाने के राजनीतिक घटनाक्रम के बाद पशुपति पारस ने केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया था।
मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल में अब तक हुए इस्तीफे
9 जून 2024 को शपथ लेकर शुरू हुए मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल में अब तक कुल तीन मंत्रियों ने अपने पद से इस्तीफा दिया है:
रवनीत सिंह बिट्टू: इन्होंने रेल राज्य मंत्री और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग राज्य मंत्री के पद से 24 जुलाई 2026 को इस्तीफा दिया। इनका राज्यसभा का कार्यकाल हाल ही में पूरा हुआ था, और राजनीतिक रिपोर्ट्स के अनुसार भाजपा इन्हें आगामी वर्ष में होने वाले पंजाब विधानसभा चुनाव के लिए बड़ी संगठनात्मक जिम्मेदारी सौंपना चाहती है।
जॉर्ज कुरियन: इन्होंने मत्स्य पालन, पशुपालन, डेयरी राज्य मंत्री और अल्पसंख्यक कार्य राज्य मंत्री के पद को 23 जून 2026 को छोड़ा था, हालांकि इनके इस्तीफे के संबंध में कोई विशेष कारण सार्वजनिक नहीं किया गया था।
धर्मेंद्र प्रधान: इन्होंने शिक्षा मंत्री के पद से 25 जुलाई 2026 को इस्तीफा दिया। राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट (NEET) परीक्षा के पेपर लीक को लेकर लंबे समय से युवाओं और विभिन्न संगठनों का जोरदार आंदोलन चल रहा था, जिसमें प्रधान के इस्तीफे की मुख्य मांग रखी गई थी। आंदोलन शुरू होने के करीब 49 दिनों के बाद उन्हें अपना पद छोड़ना पड़ा। एमजे अकबर के बाद यह दूसरा ऐसा मौका है जब किसी केंद्रीय मंत्री को बाहरी और राजनीतिक दबाव के चलते इस प्रकार इस्तीफा देना पड़ा हो।

