जम्मू: राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने पहलगाम में हुए आतंकी हमले के मामले में सोमवार को एक बड़ी और निर्णायक कार्रवाई की है। एनआईए ने जम्मू की विशेष अदालत में एक पूरक (सप्लीमेंट्री) आरोप पत्र दाखिल करते हुए पाकिस्तान में बैठे लश्कर-ए-तैयबा के सरगना हाफिज सईद को मुख्य आरोपी बनाया है। जांच एजेंसी ने अदालत के सामने पुख्ता सबूत पेश करते हुए बताया है कि इस हमले के पीछे सीमा पार से रची गई एक बहुत बड़ी आतंकी साजिश थी, जिसका मकसद भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ना था।
हाफिज सईद और उसके आतंकी नेटवर्क पर कड़ा शिकंजा
एनआईए द्वारा कोर्ट में पेश की गई इस नई सप्लीमेंट्री चार्जशीट में हाफिज सईद की भूमिका को व्यक्तिगत स्तर पर और प्रतिबंधित संगठन लश्कर-ए-तैयबा व उसके मुखौटा संगठन 'द रेजिस्टेंस फ्रंट' (टीआरएफ) के मुखिया के रूप में रेखांकित किया गया है। केंद्रीय जांच एजेंसी ने पाकिस्तानी जमीन से आतंकी नेटवर्क संचालित करने वाले इस मास्टरमाइंड के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023 और गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (यूएपीए), 1967 की कई गंभीर धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया है। यह पूरक आरोप पत्र पहले से दाखिल 1,597 पन्नों की मूल चार्जशीट का ही हिस्सा है, जिसमें हाफिज सईद के खिलाफ कई वैज्ञानिक और तकनीकी साक्ष्य जोड़े गए हैं जो सीधे तौर पर पाकिस्तान की संलिप्तता को साबित करते हैं।
पहलगाम हमला और भारतीय सेना का 'ऑपरेशन सिंदूर'
इस पूरे मामले की शुरुआत 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए एक भीषण आतंकी हमले से हुई थी। इस कायराना हरकत का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए भारतीय सेना ने 7 मई को 'ऑपरेशन सिंदूर' लॉन्च किया था। इस बेहद गोपनीय और आक्रामक सैन्य ऑपरेशन के तहत भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में घुसकर आतंकियों के 9 ठिकानों को नेस्तनाबूद कर दिया, जिसमें कई बड़े आतंकवादी मारे गए थे। इस कड़े प्रहार के बाद दोनों पड़ोसी देशों के बीच तनाव दो दशकों के सबसे उच्चतम स्तर पर पहुंच गया था।
पाकिस्तानी हिमाकत का माकूल जवाब और युद्धविराम
ऑपरेशन सिंदूर से बौखलाए पाकिस्तान ने भारतीय शहरों को निशाना बनाने की नाकाम कोशिश भी की थी, लेकिन भारत की मजबूत और अभेद्य वायु रक्षा प्रणाली (एयर डिफेंस सिस्टम) ने पाकिस्तान के सभी मंसूबों पर पानी फेर दिया। इसके बाद भारतीय बलों ने जवाबी कार्रवाई करते हुए पाकिस्तान के 14 सैन्य ठिकानों को तबाह कर दिया। भारत के इस प्रचंड पराक्रम और भारी नुकसान से घबराकर पाकिस्तान ने तुरंत युद्धविराम (सीजफायर) की गुहार लगाई, जिसे बाद में दोनों देशों के बीच हुई द्विपक्षीय बातचीत के बाद सीमा पर लागू किया गया।

