हैदराबाद। यहां एक ऐसा स्टार्टअप शुरु किया गया है जो कचरे के बदले राशन मुहैया कराता है। साथ ही पुरस्कार भी प्रदान करता है। इसके लिए एक ऐप तैयार किया गया है जिससे गाड़ी बुलाने का समय तय होता है और निर्धारित स्थान पर वाहन जाता है और कचरा ले जाता है। कचरे की गंभीर समस्या से निपटने के लिए वर्ष 2022 में अभिषेक अग्रवाल द्वारा स्थापित स्टार्टअप गुडीबैग एक बेहद प्रभावशाली और क्रांतिकारी समाधान लेकर आया है।
गुडीबैग की कार्यप्रणाली को बेहद पारदर्शी और यूजर-फ्रेंडली बनाया गया है। शहर के निवासियों को केवल अपने घर के सूखे कचरे, जैसे प्लास्टिक, कागज, धातु और पुराने कपड़ों को अलग-अलग करना होता है। इसके बाद उपभोक्ता मोबाइल ऐप के माध्यम से अपनी सुविधानुसार कचरा पिकअप का समय निर्धारित कर सकते हैं। इस सेवा की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें कचरे की कोई न्यूनतम मात्रा तय नहीं की गई है, जिससे छोटे परिवार या अकेले रहने वाले लोग भी आसानी से इस अभियान का हिस्सा बन सकते हैं। एकत्रित किए गए कचरे को लगभग 40 अलग-अलग श्रेणियों में वैज्ञानिक तरीके से छांटा जाता है। इसमें से प्लास्टिक वेस्ट को टाइल्स जैसे टिकाऊ निर्माण उत्पादों में बदला जाता है, जबकि अन्य सामग्रियों को रीसाइकल के लिए संबंधित उद्योगों को भेज दिया जाता है।
यह स्टार्टअप नागरिकों को उनके घर के सूखे कचरे के बदले न केवल डिजिटल रिवॉर्ड्स दे रहा है, बल्कि उन्हें रोजमर्रा के इस्तेमाल का किराने का सामान और आकर्षक पुरस्कार भी प्रदान कर रहा है। इस अभिनव पहल का मुख्य उद्देश्य वेस्ट मैनेजमेंट की प्रक्रिया को आम जनता के लिए व्यवहारिक, सरल और आर्थिक रूप से फायदेमंद बनाना है ताकि स्वच्छता एक जिम्मेदारी के साथ-साथ लाभ का सौदा भी बन सके।यह स्टार्टअप अपने अनोखे रिवॉर्ड मॉडल के कारण तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। उपयोगकर्ताओं द्वारा दिए गए कचरे के वजन के आधार पर उनके डिजिटल वॉलेट में पॉइंट्स क्रेडिट किए जाते हैं। इन पॉइंट्स को ऐप के माध्यम से दाल, चावल, तेल जैसे किराने के सामान और अन्य इको-फ्रेंडली उत्पादों के लिए भुनाया जा सकता है। कंपनी मात्र 72 घंटों के भीतर इन रिवॉर्ड्स की होम डिलीवरी सुनिश्चित करती है, जो वेस्ट टू वेल्थ के सपने को हकीकत में बदल रहा है। आंकड़ों के अनुसार, अब तक इस पहल से लगभग 30,000 सक्रिय उपयोगकर्ता जुड़ चुके हैं और 90,000 किलोग्राम से अधिक कचरे को सफलतापूर्वक रीसायकल किया जा चुका है। संस्थापक अभिषेक अग्रवाल का लक्ष्य इस सफल मॉडल को जल्द ही देश के अन्य प्रमुख शहरों में विस्तारित करना है, ताकि कचरा प्रबंधन की दिशा में एक बड़ा बदलाव लाया जा सके। ऐसी पहल साबित करती है कि सही प्रोत्साहन मिलने पर आम नागरिक भी पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभा सकते हैं।

