उज्जैन के Kal Bhairav Temple में अब शुल्क देकर कर सकेंगे VIP दर्शन

उज्जैन। धार्मिक नगरी उज्जैन में स्थित विश्व प्रसिद्ध बाबा काल भैरव मंदिर में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए आज से एक बड़ा बदलाव किया गया है। मंदिर प्रशासन ने यहां आने वाले भक्तों के लिए विशेष वीआईपी (प्रोटोकॉल) दर्शन व्यवस्था की शुरुआत कर दी है, जिससे अब लोगों को घंटों लंबी कतारों में खड़े रहने की परेशानी से बड़ी राहत मिलेगी। इस नई व्यवस्था के अंतर्गत श्रद्धालु सीधे गर्भगृह में प्रवेश कर सकेंगे और हमेशा की तरह बाबा काल भैरव को मदिरा का भोग भी लगा सकेंगे। इसके लिए भक्तों को अपने साथ लाई हुई मदिरा वहां मौजूद पुजारियों को सौंपनी होगी, जिसके बाद उसे बाबा को अर्पित किया जाएगा।

त्योहारों पर एक लाख पार पहुंच जाता है आंकड़ा

आमतौर पर महाकाल लोक और बाबा महाकाल के दर्शन करने आने वाले देश-विदेश के श्रद्धालु काल भैरव मंदिर भी जरूर पहुंचते हैं। यही वजह है कि यहां सामान्य दिनों में भी हर रोज लगभग 50 से 60 हजार भक्तों का तांता लगा रहता है। विशेष पर्वों, त्योहारों और छुट्टियों के दिनों में तो यह संख्या दोगुनी होकर एक लाख के पार पहुंच जाती है। इतनी भारी भीड़ के कारण आम श्रद्धालुओं को दर्शन के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता था, जिसे देखते हुए प्रशासन ने इस विशेष प्रोटोकॉल दर्शन को हरी झंडी दी है।

महाकाल मंदिर से ₹300 महंगा होगा टिकट

इस वीआईपी दर्शन का लाभ उठाने के लिए श्रद्धालुओं को ₹500 की आधिकारिक रसीद कटवानी होगी। दिलचस्प बात यह है कि उज्जैन के ही मुख्य महाकाल मंदिर में जहां वीआईपी दर्शन का शुल्क ₹200 निर्धारित है, वहीं काल भैरव मंदिर में यह राशि उससे ₹300 अधिक रखी गई है। इस रसीद को लेते ही श्रद्धालुओं को एक अलग और विशेष मार्ग से सीधे गर्भगृह तक ले जाया जाएगा, जिससे उनका समय बचेगा और वे बिना किसी रुकावट के बाबा के दर्शन कर सकेंगे।

बिचौलियों पर लगाम और मंदिर की आय में बढ़ोतरी

मंदिर की प्रशासक संध्या मार्कण्डेय ने इस नई पहल पर जानकारी देते हुए कहा कि फिलहाल इस व्यवस्था को सीमित संख्या और ट्रायल के तौर पर शुरू किया गया है, जिसकी आने वाले समय में समीक्षा की जाएगी और फीडबैक के आधार पर इसे आगे और बेहतर बनाया जाएगा। वहीं स्थानीय एसडीएम एल.एन. गर्ग का कहना है कि इस पारदर्शी व्यवस्था के लागू होने से उन बिचौलियों और तत्वों पर पूरी तरह रोक लगेगी जो सीधे दर्शन कराने के नाम पर श्रद्धालुओं से अवैध वसूली करते थे। अब यह राशि सीधे मंदिर प्रबंधन के खाते में जाएगी, जो भविष्य में मंदिर के विकास और आय का एक मुख्य जरिया बनेगी।

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