उज्जैन: इंदौर के भागीरथपुरा में बीते दिनों गंदा पानी पीने के कारण कई लोगों की मौत हो गई थी. कई लोगों का अब भी इलाज जारी है. घटना को गंभीरता से लेते हुए शासन ने कार्रवाई की, सुधार कार्य के लिए प्रयास किए और प्रदेश भर में जन सुनवाई शुरू की. इसके बावजूद मध्य प्रदेश के कई शहरों में नल में गंदा पानी आने की शिकायत रुकने का नाम नहीं ले रही है.
गंदे पानी को लेकर विरोध
ताजा मामला उज्जैन के वार्ड क्रमांक 21 से सामने आया है. यहां पीने के पानी में कीड़े तैरते हुए नजर आ रहे हैं. पीने के पानी में गंदगी और कीड़े मिलने से क्षेत्र में हड़कंप मचा हुआ है. इसके खिलाफ रहवासियों ने आपत्ति जताई और विरोध किया है. पानी में कीड़े तैरते हुए एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर सर्कुलेट हो रहा है.
अधिकारियों पर लगे लापरवाही के आरोप
उज्जैन के वार्ड नंबर 21 में आने वाले कार्तिक चौक, खटीकवाड़ा, सिंहपुरी के पार्षद अर्पित दुबे ने बताया कि "लंबे समय से वार्ड में गंदा पानी आ रहा है. नलों की लाइन कटी होने के कारण सीवरेज का पानी नलों में मिल रहा है. नगर निगम में कई शिकायतें पेंडिंग है. इसका कोई ठोस निराकरण कभी नहीं हो पाया है."
वहीं एक स्थानीय निवासी मोहम्मद शरीफ ने बताया कि "नलों के पानी में कीड़े आ रहे है, हैंडपंप में पानी गंदा आ रहा है. पार्षद समस्या को संबंधित अधिकारियों के सामने रखते हैं लेकिन मामले की सुनवाई नहीं हो रही है. इस क्षेत्र में करीब एक साल से पानी की स्थिति बिगड़ी हुई है."
पेयजल में कीड़े मिलने से दहशत
सोशल मीडिया पर सर्कुलेट वीडियो में स्पष्ट रूप से कीड़े तैरते हुए दिखाई दे रहे हैं. यह वीडियो वार्ड नंबर 21 निवासी राजेश जोशी ने रिकॉर्ड कर सोशल मीडिया पर शेयर किया है. राजेश जोशी ने बताया कि "एक सरकारी नल में पानी भरने पर पानी में कीड़े दिखाई दिए. जिसकी शिकायत पार्षद को की थी. पार्षद द्वारा सूचना मिलने पर अधिकारी भी मौके पर पहुंचे थे, लेकिन अधिकारी निराकरण का आश्वासन देकर लौट गए."
गंदे पानी को लेकर प्रशासन अलर्ट
इंदौर की घटना के बाद उज्जैन नगर निगम द्वारा लोगों को अलर्ट करने का एक वीडियो सामने आया था. ई-रिक्शा पर स्पीकर बांधकर नगर निगम द्वारा अनाउंस किया जा रहा था कि कई क्षेत्रों में पानी पीने योग्य नहीं है. इसलिए नलों से आने वाले पानी का उपयोग नहीं करें.
पीएचई ग्रामीण क्षेत्र के ईई केदार खत्री ने बताया कि "जिले में कुल 609 ग्राम पंचायत है और 1096 गांव है. जहां लोग अलग-अलग माध्यम से पानी का उपयोग करते है. नल, कुएं, बावड़ी, बोरिंग, तालाब सभी के पानी की सैंपलिंग ले रहे हैं. जल्द ही काम पूरा कर जिला पंचायत सीईओ श्रेयांश कुमट के माध्यम से शासन को रिपोर्ट सबमिट करेंगे. कई क्षेत्रों में सैंपलिंग पूरी हो गई है और कई क्षेत्र में सैंपलिंग का काम चल है."

