भोपाल। पूर्व में इंजीनियरिंग तथा पीएचडी जैसी उच्च शैक्षणिक योग्यताएं प्राप्त करने के उपरांत युवा कॉर्पोरेट जगत, शोध संस्थानों अथवा प्रशासनिक सेवाओं में अपने उज्ज्वल भविष्य की संभावनाएं तलाशते थे, परंतु रोजगार के बदलते परिवेश में प्राथमिकताओं में बड़ा बदलाव आया है। अब उच्च शिक्षा प्राप्त युवा भी पुलिस आरक्षक बनने की होड़ में सम्मिलित हो रहे हैं। मध्य प्रदेश पुलिस आरक्षक भर्ती के नवीनतम आंकड़े इस उभरती हुई तस्वीर को बयाँ कर रहे हैं, जहाँ 7,500 पदों के सापेक्ष 7.54 लाख आवेदन प्राप्त हुए हैं। इनमें लगभग 10 हजार इंजीनियर और 28 पीएचडी डिग्रीधारक अभ्यर्थी शामिल हैं।
उच्च योग्यता के बावजूद सरकारी नौकरी प्राथमिकता
आरक्षक पद हेतु तयशुदा न्यूनतम शैक्षणिक पात्रता की तुलना में आवेदनकर्ताओं की शैक्षणिक पृष्ठभूमि कहीं अधिक उच्च स्तर की है। इस भर्ती प्रक्रिया में 9,933 बीई (बैचलर ऑफ इंजीनियरिंग) डिग्रीधारकों ने आवेदन प्रेषित किया है, जबकि 28 अभ्यर्थी पीएचडी स्तर तक की शिक्षा प्राप्त हैं। यह आँकड़ा स्पष्ट उजागर करता है कि रोजगार प्राप्ति की दौड़ में युवा पद के स्तर के बजाय नौकरी की स्थायित्वता (जॉब सिक्योरिटी) को प्राथमिकता प्रदान कर रहे हैं। निजी क्षेत्र में अनिश्चितता, अत्यधिक प्रतिस्पर्धा और भविष्य की सुरक्षा जैसे कारणों से शासकीय सेवा के प्रति आकर्षण यथावत बना हुआ है।
एक पद के लिए 100 अभ्यर्थियों के मध्य कड़ी प्रतिस्पर्धा
आधिकारिक आँकड़ों के विश्लेषण के अनुसार, 7,500 रिक्तियों के लिए कुल 7.54 लाख अभ्यर्थियों ने फॉर्म भरे हैं। इस आधार पर प्रत्येक एक पद के लिए औसतन 100 दावेदारों के बीच कड़ा मुकाबला होगा। आगामी लिखित परीक्षा एवं शारीरिक दक्षता परीक्षण के चरणों में अभ्यर्थियों को अत्यंत तीखी स्पर्धा का सामना करना पड़ेगा।
विगत वर्ष की तुलना में 2.25 लाख कम आए आवेदन
इस वर्ष प्राप्त कुल आवेदनों की संख्या पिछले वर्ष की तुलना में कम दर्ज की गई है। वर्ष 2025 की आरक्षक भर्ती में लगभग 9.76 लाख आवेदन प्राप्त हुए थे, जो इस बार घटकर 7.54 लाख पर आ गए हैं। यद्यपि लगभग 2.25 लाख आवेदनों की कमी आई है, तथापि कुल पदों के अनुपात में अभ्यर्थियों की उपस्थिति अत्यधिक बनी हुई है।
रोजगार परिदृश्य का वास्तविक सूचक
पुलिस आरक्षक भर्ती केवल रिक्तियों की पूर्ति का जरिया मात्र नहीं है, अपितु यह राज्य में युवाओं के शासकीय सेवाओं की ओर झुकाव का व्यावहारिक सूचक भी है। उच्च तकनीकी एवं शोध डिग्रियां रखने वाले अभ्यर्थियों का आरक्षक पद हेतु मैदान में उतरना दर्शाता है कि वर्तमान में युवा आजीविका के अवसरों को प्राथमिकता दे रहे हैं।

