मुरैना। मध्य प्रदेश के मुरैना जिले के शासकीय प्राथमिक विद्यालय जेवर खेड़ा की वर्तमान स्थिति ने जिले की शिक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक दावों की पोल खोलकर रख दी है। विद्यालय भवन के चारों तरफ भारी जलभराव होने के कारण पूरा स्कूल परिसर किसी टापू की भांति नजर आने लगा है। ऐसी खतरनाक परिस्थितियों में नन्हे-मुन्ने स्कूली छात्र और शिक्षक अपनी जान हथेली पर रखकर रोजाना स्कूल पहुंचने को विवश हैं, जिससे अभिभावकों में भी गहरी चिंता का माहौल बना हुआ है।
सुरक्षित खेल मैदान और पेयजल का अभाव, जहरीले जीवों के खतरे के साये में पढ़ाई
स्कूल परिसर में लगातार पानी भरे रहने के कारण बच्चों के खेलने के लिए कोई सुरक्षित मैदान नहीं बचा है और न ही उनके लिए पीने के पानी की कोई समुचित व्यवस्था उपलब्ध है। इस जलभराव और नमी के कारण परिसर में जहरीले सांप और अन्य खतरनाक जीव-जंतुओं के निकलने का सिलसिला जारी है, जिससे कभी भी कोई बड़ा और अनहोनी हादसा होने की आशंका बनी हुई है। डर और दहशत के इस माहौल में मासूम बच्चे शिक्षा ग्रहण करने को मजबूर हैं, जबकि शिक्षक भी तमाम कठिनाइयों के बीच शिक्षण कार्य जारी रखे हुए हैं।
डीईओ भगवान सिंह इंडोलिया ने किया निरीक्षण, जल्द समाधान का दिया आश्वासन
विद्यालय की इस दयनीय और चिंताजनक स्थिति की लगातार मिल रही शिकायतों के बाद जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) भगवान सिंह इंडोलिया ने खुद मौके पर पहुंचकर स्कूल का औचक निरीक्षण किया। विद्यालय की बदहाली को अपनी आंखों से देखकर उन्होंने गहरी चिंता व्यक्त की और मौके पर मौजूद लोगों को भरोसा दिलाया कि इस गंभीर मामले से जुड़े सभी संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को तुरंत अवगत कराया जाएगा तथा इस समस्या का जल्द से जल्द स्थायी समाधान निकाला जाएगा।
शौचालयों तक पहुंचना हुआ मुश्किल, महिला शिक्षकों और छात्राओं को उठानी पड़ रही है भारी परेशानी
निरीक्षण के दौरान वहां तैनात महिला शिक्षकों ने जिला शिक्षा अधिकारी के समक्ष अपनी गंभीर समस्याएं खुलकर रखीं। उन्होंने बताया कि विद्यालय के शौचालय चारों तरफ से गंदे पानी से घिरे होने के कारण पूरी तरह से उपयोग के अयोग्य हो चुके हैं, जिसके चलते मजबूरन महिला शिक्षकों और छात्राओं को खुले में जाने की भारी विवशता झेलनी पड़ रही है। इसके अलावा, परिसर में फैली भीषण दुर्गंध के कारण कक्षाओं में बैठना दूभर हो गया है और संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा भी कई गुना बढ़ गया है।

