इंदौर: भारत का सबसे स्वच्छ शहर इंदौर इन दिनों कचरे और गंदगी की समस्या से जूझ रहा है। शहर के कई मोहल्लों और गलियों में कचरे के ढेर लग गए हैं, जिससे उठने वाली भीषण बदबू के कारण स्थानीय रहवासियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सफाई कर्मचारियों की पांच दिवसीय हड़ताल का आज दूसरा दिन है, जिसका असर अब शहर की संपूर्ण सफाई व्यवस्था पर साफ तौर पर दिखाई देने लगा है।
नेहरू नगर इलाके में दिखा बदइंतजामी और कचरे का अंबार
इंदौर के नेहरू नगर इलाके में सड़कों और गलियों में जगह-जगह कचरा बिखरा हुआ नजर आ रहा है। कई प्रमुख स्थानों पर कचरे के बड़े-बड़े ढेर लग चुके हैं, जिससे फैल रही गंदगी और बदबू से स्थानीय लोग बेहद परेशान हैं। हड़ताल के अभी महज एक-दो दिन ही बीते हैं और स्थिति इतनी खराब हो चुकी है, ऐसे में यह बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि यदि यह सफाई व्यवस्था पांच दिनों तक प्रभावित रही, तो शहर का क्या हाल होगा।
हड़ताल पर हैं 70 प्रतिशत से अधिक सफाई कर्मी
नगर निगम में कुल लगभग 12,432 सफाई कर्मचारी कार्यरत हैं। कर्मचारी संगठन का यह दावा है कि इनमें से करीब 70 प्रतिशत कर्मचारी वर्तमान में हड़ताल पर हैं। नियमितीकरण (परमानेंट होने), 'समान काम के लिए समान वेतन' जैसी प्रमुख मांगों को लेकर कर्मचारी इस पांच दिन के 'काम बंद' आंदोलन पर बैठे हुए हैं। हड़ताल के पहले दिन भारी संख्या में सफाई कर्मचारी नगर निगम कार्यालय पहुँचे थे और वहाँ करीब दो घंटे तक जोरदार नारेबाजी कर अपना विरोध प्रदर्शन किया।
इस दौरान महिला कर्मचारियों ने निगम कार्यालय के गेट पर अपनी चूड़ियां फेंककर अनोखे और कड़े अंदाज में अपना विरोध जताया। कर्मचारियों ने निगम आयुक्त से सीधे बातचीत कर उनकी मांगों पर जल्द से जल्द कोई ठोस निर्णय लेने की मांग की है। इंदौर के ही एक अन्य इलाके में सड़क के किनारे लगे कचरे के ढेर के पास ही 'संजीवनी क्लीनिक' और एक स्कूल भी स्थित है, जिससे मरीजों और बच्चों को भी भारी असुविधा हो रही है।
वाल्मीकि सेना के आह्वान पर शुरू हुई है यह हड़ताल
यह पूरी हड़ताल 'वाल्मीकि सेना' के राष्ट्रीय अध्यक्ष इंजीनियर संतोष कल्याणे के आह्वान पर शुरू की गई है। आंदोलनरत कर्मचारियों का कहना है कि वे वर्षों से अपनी जान जोखिम में डालकर इस शहर को साफ-सुथरा रखने का काम करते आ रहे हैं, लेकिन उनकी जायज मांगों का समाधान आज तक नहीं किया गया है, जिसके चलते उन्हें यह कड़ा कदम उठाना पड़ा है।

