उज्जैन में सिंहस्थ 2028 की तैयारियों को मिली रफ्तार, 945 करोड़ के एलिवेटेड कॉरिडोर का भूमिपूजन

उज्जैन: महाकुंभ सिंहस्थ 2028 के ऐतिहासिक आयोजन को ध्यान में रखते हुए उज्जैन में विकास कार्यों और बुनियादी ढांचों के निर्माण की रफ्तार बेहद तेज हो गई है। इसी सिलसिले में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव बुधवार शाम अपने गृह नगर उज्जैन पहुँचे, जहाँ उन्होंने शहर की सुरक्षा व्यवस्था, आपदा प्रबंधन और यातायात के सुगम संचालन से जुड़ी तैयारियों का जमीनी स्तर पर जायजा लिया। इस दौरान उज्जैन वासियों को एक बड़ी और बहुप्रतीक्षित सौगात भी मिली है।

945 करोड़ की लागत से बनेगा 5.30 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड कॉरिडोर

उज्जैन पहुँचे मुख्यमंत्री मोहन यादव ने शहर की ट्रैफिक व्यवस्था को पूरी तरह से सुगम और आधुनिक बनाने के लिए एक बड़ी परियोजना का भूमिपूजन किया। शहर में लगभग 945.20 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से 5.30 किलोमीटर लंबे एलिवेटेड कॉरिडोर का निर्माण किया जाएगा।

इस महत्वपूर्ण परियोजना के तहत पहला हिस्सा इंदिरानगर चौराहे से नीलगंगा चौराहे तक और दूसरा हिस्सा निकास चौराहे से इंदौर गेट तक बनाया जाएगा। उज्जैन में पूरे साल देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में लगातार भारी वृद्धि देखने को मिलती है, और सिंहस्थ के दौरान यह संख्या कई गुना बढ़ जाएगी। ऐसे में यातायात के दबाव को कम करने और कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के लिए यह एलिवेटेड कॉरिडोर बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा।

बेहतर होगी धार्मिक स्थलों की कनेक्टिविटी

इस नए एलिवेटेड कॉरिडोर के निर्माण से पुराने शहर और प्रमुख धार्मिक स्थलों के बीच आवागमन बेहद आसान हो जाएगा। महाकालेश्वर मंदिर के साथ-साथ शहर के अन्य प्रसिद्ध पौराणिक और धार्मिक स्थलों जैसे मंगलनाथ मंदिर, काल भैरव और अन्य महत्वपूर्ण मंदिरों तक जाने वाले मुख्य मार्गों पर यातायात का दबाव कम होगा, जिससे श्रद्धालुओं को जाम की समस्या से मुक्ति मिलेगी।

आपदा प्रबंधन और होमगार्ड ट्रेनिंग का शुभारंभ

दौरे के दौरान मुख्यमंत्री कालिदास अकादमी भी पहुँचे, जहाँ उन्होंने एसडीआरएफ (SDRF) और होमगार्ड द्वारा लगाई गई आपदा प्रबंधन प्रदर्शनी का बारीकी से अवलोकन किया। इस दौरान उन्होंने सड़क हादसों, बड़ी आगजनी, भवन ढहने की घटनाओं या बाढ़ जैसी आपात स्थितियों से निपटने के लिए उपयोग किए जाने वाले आधुनिक रेस्क्यू उपकरणों की जानकारी ली। साथ ही, उन्होंने होमगार्ड की नई ट्रेनिंग की शुरुआत की और इतने बड़े आयोजनों में त्वरित प्रतिक्रिया (Quick Response) के महत्व पर जोर दिया।

सिंहस्थ 2028 को दुनिया के सबसे भव्य मेलों में पहचान दिलाने का लक्ष्य

मुख्यमंत्री ने सिंहस्थ 2028 के आयोजन को वैश्विक स्तर पर एक अनूठी पहचान दिलाने की बात दोहराई। उन्होंने निजी क्षेत्र और समाज के सभी वर्गों से अपील की है कि वे इस महाकुंभ की तैयारियों में बढ़-चढ़कर सहयोग करें। श्रद्धालुओं की विशाल संख्या को देखते हुए आने वाले समय में स्कूल, अस्पताल, धर्मशाला, होटल और होम-स्टे जैसी सुविधाओं के विस्तार की आवश्यकता है, जिसमें जनता अपनी क्षमतानुसार योगदान दे सकती है। सरकार का मुख्य उद्देश्य आने वाले श्रद्धालुओं को विश्वस्तरीय सुविधाएँ देना और उज्जैन को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप तैयार करना है।

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