भोपाल: मध्य प्रदेश में आगामी विधानसभा और स्थानीय चुनावों की तैयारियों को देखते हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अपने सबसे महत्वपूर्ण विंग 'किसान मोर्चा' को चुनावी मोड में ला दिया है। संगठन को बूथ स्तर तक सक्रिय करने की रणनीति के तहत भाजपा ने पिछले 72 घंटों के भीतर दो बड़ी सूचियों के माध्यम से कुल 26 जिला अध्यक्षों की नियुक्ति कर दी है।
जमीनी कार्यकर्ताओं और अनुभवी चेहरों पर दांव
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और किसान मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष जयपाल सिंह चावड़ा ने इन नियुक्तियों में 'परफॉर्मेंस' और 'अनुभव' को प्राथमिकता दी है। हाल ही में निगम-मंडलों और प्राधिकरणों में हुई नियुक्तियों के बाद, अब संगठन के भीतर खाली पड़े पदों को भरकर पार्टी अपने कैडर को एकजुट करने का संदेश दे रही है।
27 अप्रैल: 10 जिलों की नई नियुक्तियां
सोमवार को जारी ताजा सूची में क्षेत्रीय और जातीय समीकरणों को साधते हुए 10 नए जिला अध्यक्षों का ऐलान किया गया:

24 अप्रैल: 16 जिलों में हुई थी पहली तैनाती
इससे पहले शुक्रवार को पार्टी ने 16 प्रमुख जिलों के लिए किसान मोर्चा की कमान सौंपी थी। इनमें प्रमुख नियुक्तियां इस प्रकार रहीं:
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नर्मदापुरम: सुरेश पटेल
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मुरैना व भिंड क्षेत्र: हेमंत धाकड़ (मुरैना), मुरालीलाल धाकड़ (गुना), धर्मवीर रघुवंशी (अशोकनगर)
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निमाड़ व मालवा: राजू नागदा (नीमच), राधेश्याम जाट (शाजापुर), राजेंद्र सिंह (खंडवा), राहुल जाधव (बुरहानपुर), राजेंद्र शितोले (बड़वानी)
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महाकौशल व विंध्य: शैलेंद्र रघुवंशी (छिंदवाड़ा), यशवंत लिल्लोरे (बालाघाट), घनश्याम कछवाहा (डिंडौरी), प्रवीण त्रिपाठी (रीवा), प्रदीप अवस्थी (पन्ना)
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अन्य: महेश्वर सिंह चंदेल (बैतूल), कमलेश राजपाल (रायसेन)
रणनीतिक महत्व: 'अन्नदाता' को साधने की कवायद
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मध्य प्रदेश जैसे कृषि प्रधान राज्य में 'किसान मोर्चा' की भूमिका सरकार की योजनाओं को अंतिम छोर तक पहुँचाने में बेहद अहम होती है। इन नियुक्तियों के माध्यम से भाजपा ने न केवल गुटबाजी को कम करने की कोशिश की है, बल्कि उन चेहरों को आगे बढ़ाया है जिनकी किसानों के बीच गहरी पैठ है।

