चुनाव संचालन की जिम्मेदारी के बाद रिव्यू बैठक में नहीं बुलाए गए नरोत्तम मिश्रा, सियासी हलचल तेज

भोपाल: दतिया उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी को मिली हार के बाद पार्टी के भीतर सियासी हलचल तेज हो गई है। हार की समीक्षा के लिए मुख्यमंत्री निवास में बुलाई गई महत्वपूर्ण बैठक से पूर्व मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा को दूर रखा गया। विशेष बात यह है कि नरोत्तम मिश्रा को इस उपचुनाव के दौरान 32 सदस्यीय चुनाव संचालन समिति का प्रमुख बनाया गया था। उन्हें बैठक में न बुलाए जाने के बाद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा जोर पकड़ रही है कि क्या जांच समिति के औपचारिक निष्कर्ष से पहले ही हार की जिम्मेदारी तय कर दी गई है।

हार के बाद पूर्व मंत्री से दूरी, बैठक में नहीं मिला आमंत्रण

16 जुलाई को बीजेपी संगठन ने उपचुनाव प्रभारी भारत कुशवाहा और प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की सहमति से चुनाव संचालन समिति का गठन किया था, जिसकी कमान डॉ. नरोत्तम मिश्रा को सौंपी गई थी। हालांकि, नतीजों के बाद समीक्षा बैठकों की सूचना कथित तौर पर उन्हें नहीं दी गई। उनसे जुड़े सूत्रों का कहना है कि नरोत्तम मिश्रा को इस बैठक का आमंत्रण ही नहीं भेजा गया था, जिससे संकेत मिलता है कि पार्टी नेतृत्व हार के पीछे उनकी भूमिका को भी कटघरे में देख रहा है।

दोपहर में बनी जांच समिति, शाम को पूरी कार्यकारिणी भंग

दतिया की हार के कारणों का विश्लेषण करने के लिए प्रदेश महामंत्री गौरव रणदीवे और वरिष्ठ नेता अंबाराम कराड़ा की दो सदस्यीय समिति का गठन किया गया था। इस समिति को रिपोर्ट तैयार कर प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल को सौंपनी थी। दोपहर में गठित हुई इस समिति की अनुशंसा के आधार पर शाम ढलते-ढलते बड़ा एक्शन लिया गया और अनुशासनात्मक कार्रवाई के तहत दतिया जिले की पूरी भाजपा कार्यकारिणी को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया गया।

अनुशासनहीनता पर प्रदेश अध्यक्ष का कड़ा रुख

प्रदेश कार्यालय मंत्री द्वारा जारी पत्र के अनुसार, दतिया जिलाध्यक्ष से लेकर जिला पदाधिकारी, कार्यसमिति, मंडल, मोर्चा और सभी प्रकोष्ठों को एक झटके में बर्खास्त कर दिया गया है। इससे पहले प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट चेतावनी दी थी कि पार्टी में अनुशासन तोड़ने वाला नेता चाहे कितना भी बड़ा हो, उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी और अनुशासनहीनता किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं होगी।

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