इंदौर। इंदौर के द्वारकापुरी क्षेत्र में एमबीए छात्रा की हत्या ने शहरवासियों को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि बच्चों को दी जाने वाली आजादी कई बार घातक साबित होती है। युवक पीयूष ने अपनी उस दोस्त को मौत के घाट उतार दिया जिससे वह शादी करना चाहता था, लेकिन वह छात्रा के दूसरे दोस्तों से चैट करने से नाराज था। वह उस पर एकाधिकार चाहता था। वह उसे जितना चाहता था, उससे कहीं ज्यादा उस पर शक करता था। उसकी नशे की आदत ने आग में घी का काम किया और उसने उस युवती को ही मार दिया जिसे वह चाहता था। एमबीए छात्रा की हत्या करने वाला आरोपी बोला- समय आने पर बताऊंगा क्यों की हत्या एमबीए छात्रा की हत्या से पहले आरोपी ने खाई थी पाॅवर बढ़ाने की गोलियां।
पहले से कर रखी थी हत्या की प्लानिंग
आरोपी ने जिस तरह छात्रा की हत्या की और घर से भागा, उससे पता चलता है कि उसने पहले से हत्या की प्लानिंग कर रखी थी। हाथ-पैर बांधने के लिए उसने कमरे में रस्सी रखी थी। हत्या के बाद वह तत्काल नहीं भागा, बल्कि दो से तीन घंटे तक कमरे में ही शव के साथ बैठा रहा। उसने शव के साथ दुष्कर्म किया, उसके वीडियो बनाकर कॉलेज के ग्रुप पर डाल दिए और अपने चेहरे पर इमोजी लगा दी ताकि पहचान न हो सके। उसने छात्रा को कॉल कर कमरे पर बुलाया था और कहा था कि शाम को पार्टी करने चलेंगे। हत्या के बाद उसने एक पत्र भी लिखा और छात्रा के नाम का उल्लेख करते हुए कहा कि उसकी हत्या मैंने की है, मुझे फांसी की सजा दी जाए।
पकड़े जाने के डर से एक जगह नहीं रुका
हत्या के बाद वह फरार होकर मुंबई चला गया। दो दिन तो वह इत्मीनान से रहा, लेकिन जब उसने मोबाइल पर छात्रा का शव मिलने की खबर देखी तो वह सतर्क हो गया। वह किसी होटल में नहीं रुका क्योंकि उसे पकड़े जाने का डर था। वह ट्रेनों में सौ-पचास किलोमीटर की यात्राएं करता रहा। उसने नई सिम खरीदकर मोबाइल की व्यवस्था की और परिजनों के संपर्क में था। जब पुलिस ने उसके पिता को हिरासत में लिया तो उसने मुंबई के पुलिस स्टेशन में आत्मसमर्पण कर दिया।

