मऊगंज कलेक्टर की पहल बनी मिसाल, गोरेलाल की वर्षों पुरानी समस्या का तुरंत हुआ निपटारा

मऊगंज| कई बार सरकारी दस्तावेजों में दर्ज एक छोटी-सी चूक किसी व्यक्ति के जीवन के कई बहुमूल्य वर्ष संघर्ष में बिता देती है। पहचान पत्र में हुई एक मामूली सी गलती भी इंसान को सरकारी कल्याणकारी योजनाओं से लेकर रोजमर्रा के कार्यों तक भारी मुश्किलों में डाल देती है। हालांकि, जब प्रशासन संवेदनशील हो, अधिकारी आम जनता की समस्याओं को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता समझें और व्यवस्था जवाबदेह बने, तब वर्षों का कठिन संघर्ष भी पलभर में समाप्त हो जाता है। मध्य प्रदेश के मऊगंज जिले में हाल ही में एक ऐसा ही बेहद प्रेरणादायक मामला सामने आया है, जिसने नागरिक-केंद्रित प्रशासन और संवेदनशीलता की एक बेहतरीन मिसाल पेश की है।

पाँच साल से गलतियों का शिकार था बुजुर्ग

मऊगंज जिले के ग्राम बिछरहटा के रहने वाले गोरेलाल सेन (पिता: पारसनाथ सेन) पिछले करीब पाँच लंबे वर्षों से अपने [Aadhaar Redacted] में दर्ज जेंडर (लिंग) संबंधी एक गंभीर त्रुटि से बेहद परेशान थे। पुरुष होने के बावजूद उनके [Aadhaar Redacted] में महिला दर्ज हो गया था। यही एक छोटी सी तकनीकी गलती उनके लिए जी का जंजाल बन गई और उन्हें हर सरकारी कार्यालय व योजना के लाभ के लिए भारी परेशानी उठानी पड़ी। उन्होंने कई बार आवेदन दिए, तमाम दस्तावेज जमा किए और अनगिनत बार सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटे, लेकिन हर बार उन्हें कोरे आश्वासनों के अलावा कुछ हाथ नहीं लगा।

जब उम्मीद की आखिरी किरण लेकर कलेक्टर के पास पहुंचे गोरेलाल

लगातार पाँच वर्षों तक निराशा और धक्के खाने के बाद हताश हो चुके गोरेलाल सेन अपनी इस गंभीर समस्या का समाधान पाने की आखिरी उम्मीद लेकर मऊगंज के जिलाधिकारी संजय कुमार जैन के पास पहुंचे। उन्होंने अपनी पूरी पीड़ा विस्तार से कलेक्टर को बताई कि कैसे एक मामूली सी गलती उनकी पहचान और सभी सरकारी कार्यों में सबसे बड़ी बाधा बन गई है।

कलेक्टर संजय कुमार जैन ने उनकी इस समस्या को पूरी गंभीरता, गहराई और संवेदनशीलता के साथ सुना। उन्होंने बिना एक पल गंवाए ई-गवर्नेंस प्रबंधक धीरज प्रताप सिंह को तुरंत अपने कक्ष में तलब किया और सख्त निर्देश दिए कि इस पीड़ित नागरिक की समस्या का प्राथमिकता के आधार पर तत्काल निराकरण किया जाए।

मात्र 10 मिनट में खत्म हुआ पाँच साल का लंबा संघर्ष

कलेक्टर के कड़े और स्पष्ट निर्देश मिलते ही ई-गवर्नेंस की पूरी तकनीकी टीम युद्धस्तर पर सक्रिय हो गई। जरूरी दस्तावेजों का त्वरित सत्यापन किया गया और पूरी प्रक्रिया को शीर्ष प्राथमिकता देते हुए मात्र 10 मिनट के भीतर गोरेलाल सेन के [Aadhaar Redacted] में मौजूद जेंडर की गलती को सफलतापूर्वक सुधार दिया गया।

जिस समस्या के समाधान के लिए गोरेलाल सेन पिछले पाँच वर्षों से लगातार दफ्तर-दफ्तर भटक रहे थे, वह चंद मिनटों में हल हो गई। इस त्वरित राहत को देखकर गोरेलाल भावुक हो उठे और उनकी आँखों से खुशी के आंसू छलक पड़े।

'आज मुझे मेरी असली पहचान वापस मिल गई' — गोरेलाल सेन

अपनी खुशी को जाहिर करते हुए भावुक गोरेलाल सेन ने कहा, “मैं पिछले पाँच वर्षों से इस गलती को ठीक करवाने के लिए दर-दर भटक रहा था। हर जगह गया, तमाम प्रयास किए, लेकिन कहीं से कोई सफलता नहीं मिली। आज मऊगंज कलेक्टर साहब से मिलने के कुछ ही मिनटों के भीतर मेरी समस्या का हमेशा के लिए समाधान हो गया। मैं कलेक्टर महोदय और पूरे जिला प्रशासन का दिल से आभार व्यक्त करता हूँ।”

'जनता की समस्याओं का त्वरित समाधान हमारी पहली प्राथमिकता' — कलेक्टर

इस मामले पर अपनी बात रखते हुए जिला कलेक्टर संजय कुमार जैन ने कहा कि जिला प्रशासन का मुख्य उद्देश्य केवल दफ्तर चलाना भर नहीं है, बल्कि क्षेत्र के प्रत्येक नागरिक की समस्याओं का समयबद्ध, पूरी तरह पारदर्शी और प्रभावी समाधान सुनिश्चित करना है। उन्होंने जिले के सभी अधिकारियों को यह स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि हर नागरिक की शिकायत को पूरी संवेदनशीलता के साथ सुना जाए और बिना किसी अनावश्यक विलंब के उसका त्वरित निराकरण किया जाए।

सुशासन की जीवंत मिसाल बना मऊगंज का प्रशासन

गोरेलाल सेन की यह कहानी केवल एक दस्तावेज में हुई गलती को सुधारने भर की नहीं है, बल्कि यह इस बात का प्रमाण है कि जब कोई प्रशासन मजबूत इच्छाशक्ति और मानवीय संवेदना के साथ काम करता है, तब जनता के वर्षों के कष्ट भी कुछ ही पलों में दूर हो जाते हैं। मऊगंज जिला प्रशासन ने इस घटना के जरिए यह संदेश दिया है कि आम जनता की समस्या महज एक कागजी फाइल नहीं, बल्कि किसी इंसान की जिंदगी होती है, और जब शासन उसे अपनी जिम्मेदारी मानता है, तभी जमीनी स्तर पर सच्चे सुशासन के दर्शन होते हैं।

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