गैस कनेक्शन के लिए लंबा इंतजार, भोपाल में 6 हजार से ज्यादा उपभोक्ता परेशान

भोपाल। राजधानी में पिछले पांच महीनों से नए एलपीजी गैस कनेक्शन की प्रक्रिया ठप पड़ी है, जिससे हजारों उपभोक्ताओं को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। फरवरी माह से कनेक्शन जारी न होने के कारण शहर की 46 गैस एजेंसियों पर आने वाले आवेदनों का अंबार लग गया है। हर महीने करीब दो हजार नए कनेक्शन प्रभावित हो रहे हैं, जिसके चलते अब तक छह हजार से अधिक लोग कनेक्शन के लिए बाट जोह रहे हैं। इस संकट के कारण जरूरतमंद परिवारों को मजबूरी में कालाबाजारी का सहारा लेकर दोगुने दामों पर सिलेंडर खरीदने पड़ रहे हैं।

उपभोक्ताओं की बढ़ती मुश्किलें

पिछले वर्षों तक शहर में बड़ी संख्या में नए गैस कनेक्शन आसानी से मिल जाते थे, जिससे किराएदारों, नए घर में शिफ्ट होने वाले लोगों और अलग हुए परिवारों को काफी सुविधा होती थी। अब ऑनलाइन पोर्टल बंद होने से इन सभी वर्गों की परेशानियां बढ़ गई हैं। कोलार और भेल जैसे इलाकों के कई निवासियों का कहना है कि वे महीनों से एजेंसियों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन उन्हें केवल सिस्टम में तकनीकी खामी या सुविधा बंद होने का हवाला देकर लौटा दिया जाता है। जिन क्षेत्रों में अभी तक पीएनजी की सुविधा नहीं पहुंची है, वहां के लोग सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं।

सिलेंडर की कालाबाजारी और विभागीय कार्रवाई

नए कनेक्शन न मिलने की आड़ में घरेलू गैस सिलेंडरों की कालाबाजारी ने भी पैर पसार लिए हैं। कुछ स्थानों पर सिलेंडर 2000 से 2500 रुपये तक में बेचे जाने की जानकारी सामने आई है। खाद्य एवं आपूर्ति विभाग ने इस स्थिति पर संज्ञान लेते हुए पिछले तीन महीनों के भीतर सघन कार्रवाई की है और 1100 से अधिक सिलेंडर जब्त किए हैं। जिला आपूर्ति अधिकारी के अनुसार, अनियमित वितरण और कालाबाजारी करने वालों के खिलाफ सख्ती बरती जा रही है, ताकि जरूरतमंदों को परेशानी न हो।

कंपनियों के निर्णय पर टिकी उम्मीदें

वर्तमान में भोपाल में तीनों प्रमुख गैस कंपनियों के करीब 5 लाख से अधिक उपभोक्ता हैं और शहर में प्रतिदिन 12 से 15 हजार सिलेंडरों की आपूर्ति की जा रही है। जिला प्रशासन का कहना है कि एलपीजी कनेक्शन की प्रक्रिया दोबारा कब शुरू होगी, इसका अंतिम निर्णय संबंधित गैस कंपनियां ही लेंगी। जब तक कंपनियों की ओर से सिस्टम को पुनः सुचारू नहीं किया जाता, तब तक उपभोक्ताओं को अनिश्चितता के दौर से गुजरना पड़ेगा। प्रशासन फिलहाल आपूर्ति को सुव्यवस्थित बनाए रखने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।

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