भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की विकासवादी सोच को धरातल पर उतरने के लिए मंत्री राकेश सिंह की अध्यक्षता में लोक निर्माण विभाग का 14 सदस्यीय प्रतिनिधि मंडल 1 और 2 जून को महाराष्ट्र और गुजरात अध्ययन यात्रा पर गया। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने महाराष्ट्र की मेगा सड़क परियोजनाओं, उनके वित्तीय मॉडल, सड़क विकास की दीर्घकालीन रणनीति और भास्कराचार्य संस्थान के सहयोग से तैयार की गई डिजिटल गवर्नेंस तथा रियल-टाइम मॉनिटरिंग प्रणालियों विस्तार से चर्चा की।
मध्यप्रदेश में सड़क और पुल निर्माण को केवल निर्माण कार्य तक सीमित न रखकर उसे आर्थिक विकास, पर्यटन, सड़क सुरक्षा और आधुनिक तकनीक से जोड़ने की दिशा में लोक निर्माण विभाग ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। इसी उद्देश्य से यह अध्ययन यात्रा बहुत महत्वपूर्ण है बताई जा रही है।
प्रतिनिधिमंडल में प्रमुख सचिव लोक निर्माण विभाग सुखबीर सिंह, मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम के प्रबंध संचालक भारत यादव, भवन विकास निगम के प्रबंध संचालक सिबी चक्रवर्ती, विभाग के प्रमुख अभियंता के.पी.एस. राणा एवं एसआर बघेल तथा वरिष्ठ अधिकारी शामिल रहे।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव की सोच को धरातल पर उतारने का प्रयास
अध्ययन दौरे का उद्देश्य केवल अन्य राज्यों की परियोजनाओं को देखना नहीं था, बल्कि यह समझना भी था कि सड़कों को आर्थिक विकास, निवेश, पर्यटन, सड़क सुरक्षा और डिजिटल प्रबंधन से कैसे जोड़ा जाए।
लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश तेजी से विकसित हो रहा है। प्रदेश में बड़ी संख्या में सड़क, पुल और भवन निर्माण परियोजनाएं चल रही हैं। ऐसे समय में देश के अग्रणी राज्यों के अनुभवों का अध्ययन कर उन्हें मध्यप्रदेश की परिस्थितियों के अनुरूप लागू करना आवश्यक है।
पहला दिन : महाराष्ट्र में मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर मॉडल का अध्ययन एवं मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से सौजन्य भेंट
प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से सौजन्य भेंट की।
बैठक में अधोसंरचना विकास, बड़े प्रोजेक्ट्स के वित्तीय प्रबंधन, भूमि अधिग्रहण की चुनौतियों, परियोजनाओं को समय पर पूरा करने की रणनीति और राज्यों के बीच बेहतर संपर्क व्यवस्था जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई। मुख्यमंत्री फडणवीस ने बताया कि बड़ी परियोजनाओं की सफलता केवल धन उपलब्ध होने से नहीं होती, बल्कि उसके लिए स्पष्ट लक्ष्य, इनोवेटिव फाइनेंस मौडलिंग, तेज निर्णय प्रक्रिया और लगातार निगरानी आवश्यक होती है। बैठक में मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र को जोड़ने वाले राज्य राजमार्गों और प्रमुख मार्गों के संयुक्त विकास पर भी सहमति बनी। निर्णय लिया गया कि मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम (MPRDC) और महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम (MSRDC) मिलकर सीमावर्ती मार्गों के विकास की कार्ययोजना तैयार करेंगे। इससे दोनों राज्यों के बीच व्यापार, उद्योग, पर्यटन और परिवहन गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।
मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद MSRDC के उपाध्यक्ष एवं प्रबंध संचालक डॉ. अनिलकुमार गायकवाड़, संयुक्त प्रबंध संचालक राजेश पाटिल, लक्ष्मीनारायण मिश्रा तथा राजेश निघोट ने महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम के मुख्यालय में विस्तृत प्रस्तुतीकरण के माध्यम से मेगा इन्फ्रस्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स और फाइनैन्सिंग मॉडेल्स की जानकारी दी गई। अधिकारियों ने बताया कि महाराष्ट्र में लगभग 3.5 लाख किलोमीटर का सड़क नेटवर्क है, जिसका संचालन और रखरखाव लोक निर्माण विभाग तथा महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम मिलकर करते हैं।
महाराष्ट्र सरकार ने राज्य के महत्वपूर्ण मार्गों को प्राथमिकता के आधार पर चिन्हित कर उन्हें "कोर रोड नेटवर्क" घोषित किया है। इन्हें वर्ष 2047 तक चरणबद्ध तरीके से विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। MSRDC ने बताया कि कोर रोड नेटवर्क को दो प्रमुख श्रेणियों में विभाजित किया गया है
ग्रोथ कॉरिडोर
ये ऐसे मार्ग हैं जो उद्योग, व्यापार, कृषि और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देते हैं। इन मार्गों पर बेहतर सड़कें बनने से उद्योगों तक कच्चा माल जल्दी पहुंचता है, किसानों की उपज तेजी से बाजार तक पहुंचती है और नए निवेश आकर्षित होते हैं।
टूरिज्म कॉरिडोर
ये ऐसे मार्ग हैं जो प्रमुख पर्यटन स्थलों को जोड़ते हैं। अधिकारियों ने बताया कि अच्छी सड़कें केवल यात्रा को आसान नहीं बनातीं बल्कि पर्यटन, रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करती हैं। प्रतिनिधिमंडल ने इस मॉडल का विशेष अध्ययन किया क्योंकि मध्यप्रदेश में भी धार्मिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक पर्यटन स्थलों की बड़ी संख्या है।
समृद्धि महामार्ग का वित्तीय मॉडल बना आकर्षण का केंद्र
बैठक में महाराष्ट्र की प्रमुख परियोजनाओं और उनके वित्तीय मॉडल पर विस्तार से चर्चा हुई। विशेष रूप से समृद्धि महामार्ग के लिए अपनाई गई वित्तीय रणनीति ने मध्यप्रदेश के अधिकारियों का ध्यान आकर्षित किया। अधिकारियों ने बताया कि किस प्रकार एसेट सिक्योरिटाइजेशन, वैकल्पिक वित्त पोषण और दीर्घकालिक वित्तीय योजना के माध्यम से बड़े प्रोजेक्ट्स को बिना अतिरिक्त वित्तीय दबाव के पूरा किया गया।
प्रतिनिधिमंडल ने यह भी समझा कि भविष्य की परियोजनाओं के लिए केवल बजटीय प्रावधानों पर निर्भर रहने के बजाय नए वित्तीय विकल्पों का उपयोग कैसे किया जा सकता है।
अटल सेतु का अध्ययन
प्रतिनिधिमंडल अटल सेतु परियोजना के भ्रमण किया। समुद्र के ऊपर निर्मित यह पुल आधुनिक भारत की इंजीनियरिंग क्षमता का प्रतीक माना जाता है। अधिकारियों ने परियोजना की निर्माण तकनीक, गुणवत्ता नियंत्रण, रखरखाव व्यवस्था, निगरानी प्रणाली और वित्तीय मॉडल की जानकारी दी। प्रतिनिधिमंडल ने जाना कि इतनी बड़ी परियोजना में विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय किस प्रकार स्थापित किया गया और समय-सीमा का पालन कैसे सुनिश्चित किया गया।
मुंबई-पुणे मिसिंग लिंक : इंजीनियरिंग का अद्भुत उदाहरण
अटल सेतु के बाद प्रतिनिधिमंडल मुंबई-पुणे एक्सप्रेस-वे की मिसिंग लिंक परियोजना के अध्ययन के लिए पहुंचा। यह परियोजना देश की सबसे जटिल सड़क परियोजनाओं में से एक मानी जाती है। अधिकारियों ने बताया कि यहां निर्मित सुरंग विश्व की सबसे चौड़ी सुरंगों में शामिल है। इसके साथ भारत का सबसे ऊंचा केवल-स्टे (Cable Stayed) पुल भी इस परियोजना का भाग है। परियोजना की कुल लागत लगभग 6600 करोड़ रुपये है। सबसे रोचक तथ्य यह रहा कि इस परियोजना के वित्तपोषण के लिए महाराष्ट्र सरकार को अलग से वित्तीय बोझ नहीं उठाना पड़ा। इसका पूरा वित्तीय प्रबंधन मुंबई-पुणे एक्सप्रेस-वे से प्राप्त टोल राजस्व के आधार पर किया गया। लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने इसे एक अनुकरणीय मॉडल बताते हुए कहा कि भविष्य में मध्यप्रदेश की बड़ी परियोजनाओं के लिए भी ऐसे नवाचारी वित्तीय विकल्पों पर विचार किया जा सकता है। प्रतिनिधिमंडल ने बांद्रा-वर्ली सी लिंक का भी भ्रमण किया। यहां अधिकारियों ने परियोजना के संचालन, रखरखाव, परिसंपत्ति प्रबंधन और दीर्घकालिक संरचनात्मक सुरक्षा के बारे में जानकारी दी। प्रतिनिधिमंडल ने विशेष रूप से यह समझा कि निर्माण के बाद किसी परियोजना की गुणवत्ता और उपयोगिता को वर्षों तक बनाए रखने के लिए किस प्रकार की व्यवस्थाएं आवश्यक होती हैं।
दूसरा दिन : गुजरात में डिजिटल गवर्नेंस और तकनीकी नवाचारों का अध्ययन
प्रतिनिधि मंडल ने मंगलवार को गुजरात के गांधीनगर स्थित भास्कराचार्य राष्ट्रीय अंतरिक्ष अनुप्रयोग एवं भू-सूचना संस्थान (BISAG) पहुंचा। बैठक से पहले प्रतिनिधिमंडल ने गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल से सौजन्य भेंट की और मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में लोक निर्माण विभाग द्वारा इंफ्रास्ट्रक्चर नवाचार और सुशासन की दिशा में किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी। इस दौरान विशेष रूप से दिसंबर-2024 में गुजरात अध्ययन यात्रा से प्राप्त अनुभवों के आधार पर पिछले डेढ़ वर्ष में विभाग द्वारा किए गए नवाचारों से मुख्यमंत्री को अवगत कराया। मंत्री राकेश सिंह ने इस भेंट के दौरान गुजरात सरकार द्वारा प्रदान किए गए सहयोग, अनुभवों के आदान-प्रदान के लिए मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया।
भास्कराचार्य संस्थान (BISAG) के साथ हुई विस्तृत समीक्षा बैठक
मंत्री राकेश सिंह ने BISAG के महानिदेशक टी.पी. सिंह और उनकी टीम के साथ मध्य प्रदेश लोक निर्माण विभाग के साथ चल रहे विभिन्न तकनीकी प्रोजेक्ट्स पर विस्तार से चर्चा की। बैठक में लोक कल्याण सूचकांक की गणना के लिए विकसित मोबाइल एप्लीकेशन, ऑनलाइन पोर्टल, जीआईएस आधारित निर्णय प्रणाली और डेटा इंटीग्रेशन प्लेटफॉर्म की जानकारी दी गई।
अब निर्माण कार्यों से संबंधित किसी भी घटना की सूचना सीधे पहुंचेगी मंत्री कार्यालय तक
बैठक का सबसे महत्वपूर्ण विषय था Incident Reporting System (IRS)। लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने कहा कि कई बार सड़क दुर्घटना, सड़क धंसने, पुल क्षति या अन्य घटनाओं की जानकारी समय पर उच्च अधिकारियों तक नहीं पहुंचती। कई मामलों में विभाग को घटना की जानकारी समाचार पत्रों या मीडिया रिपोर्टों से मिलती है। उन्होंने सुझाव दिया कि ऐसा डिजिटल सिस्टम बनाया जाए जिसमें संबंधित इंजीनियर मौके से ही घटना की फोटो, स्थान और तकनीकी विवरण अपलोड कर सके। इससे विभाग तुरंत राहत, मरम्मत और आवश्यक कार्रवाई कर सकेगा।
टी.पी. सिंह ने प्रस्ताव दिया कि इस उद्देश्य के लिए एक विशेष मोबाइल एप्लीकेशन तैयार किया जा सकता है। इस ऐप में घटना का फोटो अपलोड होगा और लोकेशन स्वतः दर्ज हो जाएगी। सबंधित इंजीनियर तकनीकी विवरण इस मोबाइल ऐप पर अपलोड कर सकेंगे। साथ ही संबंधित कार्यालयों द्वारा सुधारात्मक कार्रवाई की स्थिति दर्ज की जा सकेगी। इस जानकारी के आधार पर वरिष्ठ अधिकारी घटना की रियल टाइम मॉनिटरिंग कर सकेंगे और मंत्री कार्यालय को तुरंत अपडेट प्राप्त होते रहेंगे। टी.पी. सिंह ने कहा कि मानसून को देखते हुए इस ऐप का महत्व और बढ़ जाता है। संस्थान ने आश्वासन दिया कि 20 जून तक इसका ट्रायल संस्करण तैयार कर दिया जाएगा और 1 जुलाई 2026 से इसे पूरे प्रदेश में लागू किया जा सकेगा। मंत्री सिंह ने इस प्रस्ताव का स्वागत करते हुए विभागीय अधिकारियों को पूर्ण सहयोग देने के निर्देश दिए।
एकीकृत डैशबोर्ड से होगी सभी परियोजनाओं की निगरानी
BISAG ने विभाग के लिए एक Integrated Dashboard विकसित करने का भी प्रस्ताव दिया। इस डैशबोर्ड में राज्य की सभी निर्माण परियोजनाओं की प्रगति एक ही प्लेटफॉर्म पर दिखाई देगी। यदि इसे प्रोजेक्ट मैनेजमेंट सिस्टम से जोड़ दिया जाए तो किसी भी परियोजना की वास्तविक स्थिति, प्रगति, देरी के कारण और आवश्यक कार्रवाई की जानकारी तुरंत उपलब्ध हो सकेगी। इस पर मंत्री सिंह सम्पूर्ण विभाग के लिए एकीकृत प्रोजेक्ट मेनेजमेंट सिस्टम तैयार करने के लिए भास्कराचार्य संस्थान से अनुरोध किया जिसे टीपी सिंह ने सहर्ष स्वीकार किया।
पीएम गति शक्ति से जुड़ेगा सॉइल सर्वेक्षण का डेटा
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि लोक निर्माण विभाग मे विभिन्न सर्वेक्षणों से प्राप्त सॉइल इन्वेस्टगैशन का अधिकाधिक डेटा पीएम गति शक्ति पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा। इसके लिए भास्कराचार्य संस्थान एक विशेष माजूल तैयार करेगा, जिस पर विभागीय इंजीनियर सॉइल सर्वे का डट अपलोड करेंगे। इसके अतिरिक्त भूमिगत जल स्तर, जल स्रोतों, उपयोगिताओं और अन्य भू-स्थानिक जानकारियों का डट भी पीएम गतिशक्ति पोर्टल से उपलब्ध कराया जाएगा जिसका उपयोग सड़क एवं पुल परियोजनाओं की DPR बनाने और सड़क किनारे रिचार्ज बोर के लिए स्थान निर्धारण में किया जाएगा। इससे सड़क किनारे रिचार्ज बोर, जल संरक्षण कार्य और भविष्य की परियोजनाओं की योजना अधिक वैज्ञानिक तरीके से बनाई जा सकेगी।
सड़क सुरक्षा के लिए BISAG ने प्रस्तुत किया नवाचार
टीपी सिंह जी ने बताया कि एक ऐसा मॉड्यूल विकसित किया जा सकता है जो सड़कों की ज्योमेट्री और जंक्शनों का मूल्यांकन भारतीय सड़क कांग्रेस (IRC) के मानकों के आधार पर स्वतः कर सके। इससे प्रदेश की सभी सड़कों पर उन स्थानों की पहचान की जा सकती है जहां सड़क डिजाइन में सुधार की आवश्यकता है। इससे सड़क दुर्घटनाओं को कम करने में बड़ी मदद मिल सकती है।
सड़क एवं पुल निर्माण अवधि का वैज्ञानिक निर्धारण
बैठक मे लोक निर्माण विभाग और BISAG द्वारा तैयार समय सीमा निर्धारण मॉड्यूल भी विस्तार से चर्चा हुई। इस मॉड्यूल से परियोजना की डीपीआर, तकनीक, निर्माण सामग्री और स्थानीय जटिलताओं के आधार पर निर्माण अवधि का वैज्ञानिक आकलन किया जा सकेगा। इससे परियोजनाओं के लिए अधिक यथार्थवादी समय-सीमा निर्धारित करना संभव होगा। यह भी निर्णय लिया गया कि लोक कल्याण सरोवरों और अमृत सरोवरों का निर्माण अब केवल लक्ष्य आधारित नहीं होगा। सड़क निर्माण के दौरान जितनी मिट्टी निकलेगी, उसके उपयोग के आधार पर इन सरोवरों की संख्या निर्धारित की जाएगी। इससे मिट्टी का बेहतर उपयोग होगा और जल संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।
लोक निर्माण मंत्री सिंह ने अध्ययन दौरे के समापन पर कहा कि यह यात्रा केवल परियोजनाओं को देखने की नहीं बल्कि नई सोच सीखने की यात्रा रही है। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र ने यह सिखाया कि बड़े सपनों को मजबूत वित्तीय मॉडल और बेहतर प्रबंधन से कैसे पूरा किया जाता है, जबकि गुजरात ने दिखाया कि तकनीक का उपयोग कर शासन को अधिक प्रभावी और जवाबदेह कैसे बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि इन दोनों राज्यों से मिले अनुभवों को मध्यप्रदेश में लागू किया जाएगा जिससे सड़कें केवल आवागमन का साधन न होकर आर्थिक विकास, पर्यटन, रोजगार और जनकल्याण की मजबूत आधारशिला बन सकें। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले समय में मध्यप्रदेश का लोक निर्माण विभाग तकनीक, गुणवत्ता, पारदर्शिता और समयबद्ध कार्य संस्कृति के क्षेत्र में देश के अग्रणी विभागों में शामिल होगा।

