उज्जैन: धर्मनगरी और बाबा महाकाल की पावन धरा पर एक बार फिर विदेशी मेहमान भारतीय संस्कृति व सनातन परंपरा के रंग में रंगे दिखाई देंगे। पश्चिमी भौतिकवादी जीवनशैली से दूर सनातन धर्म, भारतीय परिवार व्यवस्था और योग के आध्यात्मिक मार्ग से प्रभावित होकर इटली, स्पेन और इंग्लैंड के तीन विदेशी जोड़े हिंदू वैदिक रीति-रिवाजों के अनुसार विवाह बंधन में बंधने जा रहे हैं। इन जोड़ों ने अपने जीवन के इस अहम पड़ाव के लिए स्वदेश के बजाय उज्जैन की पवित्र भूमि का चयन किया है।
वैदिक मंत्रोच्चार और आध्यात्मिक नामों के साथ लेंगे सात फेरे
समारोह 22 अगस्त को निनोरा स्थित आनंदमय वेलनेस रिट्रीट में शाम 6 से 8:30 बजे के बीच आयोजित किया जाएगा। डॉ. ओमानंद गुरुजी के सान्निध्य में ये जोड़े अग्नि को साक्षी मानकर परिणय सूत्र में बंधेंगे। ये सभी डॉ. ओमानंद के शिष्य हैं और योग तथा भक्ति मार्ग से जुड़कर भारतीय आध्यात्मिक नाम भी स्वीकार कर चुके हैं:
इटली के दंपति: ईवा (मां दर्पण आनंद) और मास्सिमिलियानो (बलराम आनंद)
इटली का दूसरा जोड़ा: जेसिका (मां सीता आनंद) और लुका (राम आनंद)
स्पेन और इंग्लैंड का संगम: स्पेन की इन्मा (मां शांति आनंद) और इंग्लैंड के मार्क (प्रकाशानंद)
कानूनी अनुबंध नहीं, आत्माओं का अटूट बंधन है विवाह
पश्चिमी संस्कृति में जहां विवाह को अक्सर एक कानूनी अनुबंध (लीगल कॉन्ट्रैक्ट) माना जाता है, वहीं डॉ. ओमानंद गुरुजी के अनुसार इन विदेशी साधकों ने भारतीय विवाह पद्धति की गूढ़ भावना को समझा है। यहां विवाह दो आत्माओं और दो परिवारों का जन्म-जन्मांतर का पवित्र रिश्ता होता है। भारतीय पारिवारिक मूल्यों और समर्पण की इसी गहराई से प्रभावित होकर वे इसे महज एक औपचारिकता न मानकर जीवन के महान संस्कार के रूप में अपना रहे हैं।
वैश्विक अध्यात्म का प्रमुख केंद्र बनती महाकाल नगरी
उज्जैन में विदेशी नागरिकों द्वारा सनातन परंपराओं को अंगीकार करने का रुझान लगातार बढ़ रहा है। इससे पूर्व दिसंबर 2024 में भी इटली, अमेरिका और पेरू के तीन जोड़ों ने निनोरा स्थित परमानंद योग आश्रम में वैदिक रीति-रिवाज से विवाह रचाया था। संक्षिप्त अवधि में ही छह विदेशी युगलों का उज्जैन आकर हिंदू विवाह संस्कार अपनाना इस बात का प्रमाण है कि विश्व भर में सनातन संस्कृति, योग और भारतीय पारिवारिक संरचना के प्रति आकर्षण तेजी से बढ़ रहा है।

