मुआवजा नहीं मिला तो कलेक्ट्रेट में डटे किसान, दाल-बाटी बनाकर जताया विरोध

झाबुआ: मध्य प्रदेश के झाबुआ कलेक्ट्रेट परिसर में बदनावर-टिमरवानी फोरलेन निर्माण के लिए अधिग्रहित की जा रही जमीनों के मुआवजे से असंतुष्ट किसानों का अनिश्चितकालीन धरना जारी है। गुरुवार से शुरू हुए इस विरोध प्रदर्शन में बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल हुई हैं। प्रदर्शनकारी किसानों ने कलेक्ट्रेट परिसर में खुले आसमान के नीचे सामूहिक रूप से भोजन बनाकर अपनी रात काटी।

कलेक्ट्रेट परिसर में बनाया खाना, साथ में किया नाश्ता

धरने पर बैठे किसानों ने अपनी सुविधा के लिए भोजन-पानी का इंतजाम खुद ही संभाला है। पहली रात किसानों ने परिसर में ही करीब 30 किलोग्राम आटे की बाटी, 7 किलोग्राम चावल और दाल तैयार कर एक साथ भोजन किया। वहीं अगले दिन सुबह 10 लीटर दूध की चाय और पोहे का नाश्ता बनाकर सभी ने सामूहिक रूप से ग्रहण किया।

बाजार दर से चार गुना अधिक मुआवजे की मांग

फोरलेन निर्माण प्रभावित किसान भूमि अधिग्रहण के नियमों के तहत बाजार मूल्य से चार गुना अधिक मुआवजे की मांग पर अड़े हैं। इस दौरान मेघनगर एसडीएम अरुंधति प्रधान और एनएचएआई (NHAI) परियोजना निदेशक देवेंद्र चापडेकर ने धरना स्थल पहुंचकर किसानों से बात की। अधिकारियों ने किसानों को आर्बिट्रेशन प्रक्रिया के जरिए अपना पक्ष रखने का सुझाव दिया।

कलेक्टर के लिखित आश्वासन पर अड़े प्रदर्शनकारी

किसान संघ के जिला मंत्री वरदीचंद पाटीदार के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने कलेक्टर डॉ. योगेश तुकाराम भरसट से वार्ता की। चर्चा के दौरान खेतों के संपर्क मार्ग, जल निकासी (ड्रेनेज) और सड़क की ऊंचाई जैसे तकनीकी विषयों पर सहमति बन गई, लेकिन मुख्य मुद्दा यानी मुआवजा दर पर बात नहीं बन सकी। किसानों का स्पष्ट कहना है कि जब तक प्रशासन की ओर से मुआवजे पर लिखित आश्वासन नहीं मिलता, तब तक आंदोलन खत्म नहीं होगा।

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