सागर में 5 दर्जन पुलिसकर्मियों का डिमोशन, ASI से हेड कॉन्स्टेबल और प्रधान आरक्षक बने आरक्षक

सागर: मध्य प्रदेश के सागर जिले से शासकीय सेवा और प्रशासनिक निर्णयों के इतिहास का एक बेहद ही हैरान करने वाला और अजब-गजब मामला सामने आया है। आमतौर पर सरकारी विभागों में कर्मचारी और अधिकारी अपनी पदोन्नति (प्रमोशन) का इंतजार करते हैं, लेकिन सागर में पुलिस प्रशासन ने एक ऐसा चौंकाने वाला कदम उठाया है जिसने सबको हैरत में डाल दिया है।

यहाँ कई पुलिसकर्मियों को पदोन्नत करने के बजाय उनका डिमोशन (पदावनति) कर दिया गया है। विभाग द्वारा जारी नए आदेश के तहत सहायक उपनिरीक्षक (ASI) के पद पर काम कर रहे अधिकारियों को वापस प्रधान आरक्षक (हेड कांस्टेबल) बना दिया गया है, जबकि कई वर्षों से प्रधान आरक्षक की जिम्मेदारी संभाल रहे पुलिसकर्मियों को पदावनत कर सीधे आरक्षक (सिपाही) के मूल पद पर भेज दिया गया है। सूची में अपना नाम डिमोशन श्रेणी में देखकर पुलिसकर्मियों के बीच गहरी चिंता, मायूसी और भारी आक्रोश का माहौल है। इस अपमानजनक फैसले से आहत होकर कुछ कर्मचारियों ने अपने उच्च अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) के लिए आवेदन तक सौंप दिए हैं।

प्रमोशन की बड़ी सूची में छिपा था डिमोशन का बड़ा झटका; 422 कर्मियों की लिस्ट से 60 जवानों के नाम गायब

सागर: इस पूरे विवाद और प्रशासनिक उथल-पुथल की शुरुआत रविवार, 12 जुलाई 2026 को जिला पुलिस अधीक्षक (एसपी) कार्यालय द्वारा जारी की गई एक विभागीय सूची के बाद हुई:

  • प्रमोशन का था इंतजार: पुलिस विभाग की स्थापना शाखा द्वारा कुल 422 पुलिसकर्मियों की एक बहुप्रतीक्षित पदोन्नति सूची जारी की गई थी। इस सूची के आते ही महकमे में खुशी की लहर दौड़नी चाहिए थी, लेकिन लिस्ट को गहराई से देखने पर भारी आक्रोश फैल गया।

  • 60 पुलिसकर्मियों को लगा झटका: इस पूरी सूची में से करीब 60 ऐसे पुलिसकर्मी निकले जिन्हें प्रमोशन मिलने के बजाय उनके वर्तमान कार्यकारी पद से नीचे ढकेल दिया गया। पिछले 5 सालों से पूरी निष्ठा के साथ प्रधान आरक्षक (कार्यवाहक) के रूप में थाना क्षेत्रों में कमान संभाल रहे इन पुलिसकर्मियों को एक झटके में दोबारा सिपाही (आरक्षक) बना दिया गया, जिससे उनका मनोबल पूरी तरह टूट गया है।

स्थापना शाखा में भारी हंगामा; पुलिसकर्मियों ने लगाया गंभीर पक्षपात और नियमों में हेरफेर का आरोप

सागर: डिमोशन की यह विवादित सूची सोशल मीडिया और थानों में वायरल होते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया और जिला मुख्यालय स्थित स्थापना शाखा में गहमा-गहमी का माहौल निर्मित हो गया:

  • भेदभाव के आरोप: सूची से प्रभावित और आहत दर्जनों पुलिसकर्मियों ने इस पूरी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। पीड़ित कर्मचारियों का आरोप है कि पदोन्नति की इस लिस्ट को तैयार करने में भारी अनियमितता बरती गई है और चहेते लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए नियमों में जानबूझकर हेरफेर और पक्षपात किया गया है।

  • इस्तीफे की पेशकश और नाराजगी: अपनी वर्षों की सेवा के बाद इस तरह के डिमोशन से अपमानित महसूस कर रहे कुछ प्रधान आरक्षकों ने विरोध स्वरूप अपने पदों से इस्तीफे का ऐलान कर दिया है। पुलिस मुख्यालय में इस अप्रत्याशित विरोध प्रदर्शन से आला अधिकारी भी असहज स्थिति में नजर आ रहे हैं।

5 साल तक प्रभारी का काम कराया और अब बना दिया सिपाही; कोर्ट की शरण में जाने की तैयारी में पीड़ित पुलिसकर्मी

सागर: इस प्रशासनिक फैसले के खिलाफ अब पीड़ित पुलिसकर्मी आर-पार की कानूनी लड़ाई लड़ने का मन बना रहे हैं:

  • जवानों का दर्द: आक्रोशित पुलिसकर्मियों का कहना है कि विभाग ने पिछले पांच वर्षों से उनसे उच्च पदों (प्रभारी हेड कांस्टेबल और प्रभारी एएसआई) का पूरा काम लिया। उन्होंने दिन-रात फील्ड में रहकर पूरी जिम्मेदारी निभाई, लेकिन जब वास्तविक पदोन्नति देने का समय आया, तो उन्हें डिमोट कर दिया गया, जो पूरी तरह से अन्यायपूर्ण और गैर-कानूनी है।

  • न्यायालय का खटखटाएंगे दरवाजा: कई प्रभावित पुलिसकर्मियों ने साफ कर दिया है कि यदि विभाग इस विसंगतिपूर्ण सूची को तुरंत वापस नहीं लेता है, तो वे न्याय के लिए सीधे उच्च न्यायालय (हाईकोर्ट) की शरण में जाएंगे।

  • 104 पुलिसकर्मी बने एएसआई: हालांकि, इस विवादित सूची का एक दूसरा पहलू यह भी है कि विभागीय मापदंडों के तहत 104 पुलिसकर्मियों को प्रधान आरक्षक से सहायक उपनिरीक्षक (ASI) के पद पर प्रमोट भी किया गया है।

प्रशासन का पक्ष: पांच साल की गोपनीय चरित्रावली और त्रिस्तरीय कड़ी जांच के बाद ही तैयार हुई है लिस्ट

सागर: इस पूरे मामले पर भारी विवाद बढ़ता देख पुलिस विभाग और स्थापना शाखा के वरिष्ठ अधिकारियों ने अपनी सफाई पेश की है:

  • सख्त प्रक्रिया का दिया हवाला: विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यह पदोन्नति सूची किसी जल्दबाजी में नहीं बनाई गई है। इसके लिए पुलिसकर्मियों के पिछले 5 वर्षों के कामकाज के ट्रैक रिकॉर्ड, उनकी वार्षिक गोपनीय चरित्रावली (ACR) की रेटिंग और उनके खिलाफ लंबित विभागीय जांचों का त्रिस्तरीय कड़ा मूल्यांकन किया गया है।

  • नियमों के तहत कार्रवाई: अधिकारियों के मुताबिक, जो कर्मचारी पात्रता के कड़े मापदंडों और रेटिंग में खरे नहीं उतरे, उन्हें नियमों के दायरे में रहते हुए ही उनके मूल कैडर पद पर वापस भेजा गया है। बहरहाल, प्रशासनिक दलीलों के बावजूद सागर पुलिस में उपजा यह आंतरिक असंतोष थमता नजर नहीं आ रहा है।

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