भोपाल|प्रदेश में सड़क निर्माण कार्यों को वन विभाग से समय पर स्वीकृति नहीं मिलने के कारण 48 परियोजनाएं लंबी अवधि तक अटकी रहीं. यह खुलासा नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की रिपोर्ट में हुआ है. रिपोर्ट में प्लानिंग और विभागीय समन्वय की कमी को देरी की मुख्य वजह बताया गया है|मई 2023 से जून 2024 के बीच 16 संभागों में की गई समीक्षा में पाया गया कि वन विभाग से अनुमति, भूमि विवाद, अतिक्रमण और यूटिलिटी शिफ्टिंग में देरी के कारण 48 सड़क परियोजनाओं को पूरा होने में 117 से लेकर 1838 दिनों तक का अतिरिक्त समय लगा. कई मामलों में बिना पूर्व स्वीकृति के ही काम शुरू कर दिए गए, जिससे बाद में प्रक्रियात्मक अड़चनें सामने आईं|
लागत भी बढ़ी, प्रभावशीलता भी घटी
रिपोर्ट में स्पष्ट कहा गया है कि देरी के कारण न केवल परियोजनाओं की लागत बढ़ी, बल्कि उनकी प्रभावशीलता भी प्रभावित हुई. मध्य प्रदेश निर्माण विभाग नियमावली और वन (संरक्षण) अधिनियम 1980 के तहत वन भूमि के डायवर्जन के लिए केंद्र सरकार से पूर्व अनुमति अनिवार्य है. इसके बावजूद आवश्यक मंजूरी सुनिश्चित किए बिना कार्य प्रारंभ करना गंभीर प्रशासनिक चूक मानी गई है|
शासन ने सुधारात्मक कदमों का दिया आश्वासन
भोपाल नगर निगम सम्मेलन (जून 2025) में शासन ने राजस्व और वन विभाग के बीच अधिकार क्षेत्र स्पष्ट नहीं होने की बात स्वीकार की और जांच के बाद सुधारात्मक कदम उठाने का आश्वासन दिया. रिपोर्ट में भविष्य में ऐसी स्थिति से बचने के लिए सख्त अनुपालन और बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर जोर दिया गया है|

