देवास: मध्य प्रदेश के देवास जिले में शासकीय कार्यों के प्रति गंभीर लापरवाही, अनुशासनहीनता और उच्चाधिकारियों के आदेशों की लगातार अवहेलना करने के मामले में जिला कलेक्टर ने एक बेहद कड़ा और अनुशासनात्मक कदम उठाया है। प्रशासन ने प्रशासनिक व्यवस्था को दुरुस्त करते हुए तीन लापरवाह पटवारियों की सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी हैं। नियमों के प्रावधानों के तहत इन तीनों को एक महीने का अग्रिम वेतन (एडवांस्ड सैलरी) देकर सेवा से बाहर कर दिया गया है।
किन-किन पटवारियों पर की गई है यह बड़ी कार्रवाई?
जिला प्रशासन द्वारा जारी आदेश के अनुसार, जिन तीन पटवारियों की सेवाएं समाप्त की गई हैं, उनका विवरण इस प्रकार है:
नितिन विश्वकर्मा: जो सोनकच्छ तहसील के घिचलाय हल्के में पदस्थ थे।
अजय नागर: जो देवास ग्रामीण तहसील में पदस्थ थे।
विशाल टईया: जो टोंकखुर्द तहसील में पदस्थ थे।
इन तीनों को एक महीने की एडवांस्ड सैलरी देकर सेवा से बाहर करने का यह सख्त आदेश देवास जिला कलेक्टर ऋतुराज सिंह द्वारा पारित किया गया है।
किस मुख्य वजह से की गई है यह कार्रवाई?
राज्य शासन द्वारा नागरिकों की सुविधा के लिए 'स्वामित्व योजना' शुरू की गई है, जिसके तहत पूरे मध्य प्रदेश राज्य में 50 लाख मुफ्त रजिस्ट्रियां किए जाने का बड़ा लक्ष्य तय किया गया है। इसी सर्वोच्च प्राथमिकता वाली योजना के निष्पादन और पंजीयन कार्य में इन पटवारियों के हल्के की प्रगति पूरी तरह से शून्य पाई गई। शासन के इतने महत्वपूर्ण और महत्वाकांक्षी अभियान में किसी भी प्रकार की प्रगति न होना प्रशासन के लिए गहरी चिंता का विषय था। इसके अतिरिक्त, पिछले छह महीनों में इन क्षेत्रों में राजस्व वसूली का कार्य भी बेहद असंतोषजनक पाया गया।
प्रोबेशन पर थे पटवारी और मुख्यालय से गायब रहने का था आरोप
विभागीय जांच और संबंधित अनुविभागीय अधिकारियों (SDM) द्वारा सौंपी गई रिपोर्टों में यह भी खुलासा हुआ कि ये सभी पटवारी वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशों की लगातार अवहेलना कर रहे थे। ये लोग अपने निर्धारित कार्यक्षेत्र (हल्के) में निवास नहीं कर रहे थे और न ही समय पर अपनी शासकीय उपस्थिति दर्ज करा रहे थे। इन तीनों पटवारियों का संपूर्ण आचरण और कार्यशैली पूरी तरह से सरकारी सेवा नियमों के विपरीत पाई गई, जिसके बाद प्रशासन को यह कड़ा कदम उठाना पड़ा।

