छिंदवाड़ा जेल: अपनों की गोद में बच्चों की खुशी, आंसू भी छलके

छिंदवाड़ा: कोई अपनी पोती को गले लगा कर रो रहा था तो कोई बेटी को प्यार कर रहा था. अपने दादा और पापा से मिलने के बाद बच्चे भी काफी खुश नजर आ रहे थे. आंखों को सुकून देने वाला यह दृश्य छिंदवाड़ा जिला जेल में शनिवार को दिखाई दिया. यहां पर जेल प्रबंधन ने अनोखी पहल स्पर्श मुलाकात शुरू की है. इसका उद्देश्य है कि जेल में बंद माता-पिता से उनके बच्चे मिल सकें और उनका स्पर्श पा सकें.

बच्चे और पोते को गले लगाकर निकल पड़े आंसू

जिला जेल अधीक्षक प्रतीक जैन ने बताया कि "जेल में कैदियों से परिजनों की फिजिकल मुलाकात बंद है लेकिन टेलिफोनिक मुलाकात कांच के दरवाजे के सामने से होती है. कैदियों और उनके परिवार के बीच में आपसी संबंधों में दूरी ना आए, इस उद्देश्य से स्पर्श मुलाकात का आयोजन जेल प्रबंधन द्वारा किया गया है."

प्रतीक जैन ने कहा कि "इसके चलते 14 साल तक के उम्र के बच्चों ने जिला जेल के भीतर पहुंचकर अपने परिजनों से मुलाकात की. यह काफी भावुक करने वाला पल था. जिसमें कोई दादा अपने छोटे से पोते को गले लगा कर आंसू बहा रहा था तो कोई पिता अपने बच्चे को मिलकर खुश हो रहा था. बच्चे भी अपने परिजन को देखकर आनंदित थे."

200 बच्चों ने जेल में की अपनों से मुलाकात

स्पर्श मुलाकात के दौरान बंदियों को उनके बच्चों के सामने शपथ दिलाई गई. डिप्टी कलेक्टर राहुल पटेल और जेल अधीक्षक प्रतीक कुमार जैन ने अपराध से दूर रहने, जेल से रिहा होने के बाद समाज की मुख्यधारा से जुड़ने और एक अच्छे नागरिक बनने की शपथ दिलाई.

इस अवसर पर जेल प्रशासन द्वारा बच्चों को कागज और कलम भेंट कर उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं भी दी गईं. स्पर्श मुलाकात कार्यक्रम में लगभग 200 बच्चों ने अपने माता-पिता और परिजन से खुलकर मुलाकात की

बुजुर्ग माता-पिता भी कैदियों से करेंगे स्पर्श मुलाकात

जेल अधीक्षक प्रतीक कुमार जैन ने बताया कि "स्पर्श मुलाकात अपनों से जोड़ने का एक विशेष अभियान है. हर शनिवार यह अभियान शुरू किया गया है. अगले शनिवार कैदियों को 70 साल से ज्यादा उम्र वाले माता-पिता को भी मिलवाएगा ताकि बुजुर्ग माता-पिता भी अपने बच्चों और रिश्तेदारों से मिलकर स्पर्श मुलाकात कर सकें."

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