बागेश्वर बाबा का बड़ा बयान, 500 किमी की रथयात्रा के दौरान एकजुटता पर दिया जोर

पन्ना। मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले स्थित बागेश्वर धाम से शुरू हुई पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की बहुप्रचारित ‘सनातन हिंदू एकता रथयात्रा’ अब पन्ना जिले के अमानगंज क्षेत्र में प्रवेश करने जा रही है। इस पांच सौ किलोमीटर लंबी ऐतिहासिक यात्रा में देश भर से हजारों श्रद्धालु और कई बड़े साधु-संत शामिल हो रहे हैं। यात्रा के स्वागत के लिए अमानगंज नगर को भव्य रूप से फूलों से सजाया गया है, जहां पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री को जेसीबी के माध्यम से एक विशाल 20 फीट लंबी फूलमाला पहनाने की विशेष तैयारी की गई है।

संतों का सानिध्य और राष्ट्रवाद का संदेश

इस यात्रा में अयोध्या हनुमानगढ़ी के संत राजूदास महाराज, मलूकपीठ के गंगादास जी, हरिद्वार के मोनी महाराज और चित्रकूट के राधेश्याम महाराज जैसे कई प्रख्यात संत अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं। यात्रा के दौरान अपने संबोधन में धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि देश में जातिवाद नहीं, बल्कि राष्ट्रवाद की सबसे अधिक आवश्यकता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह यात्रा किसी एक वर्ग के लिए नहीं, बल्कि समस्त सनातनियों को एकजुट करने के उद्देश्य से निकाली जा रही है ताकि राष्ट्र और धर्म को और अधिक मजबूत किया जा सके।

पन्ना में रात्रि विश्राम और सात वचनों की शपथ

अपनी यात्रा के पहले चरण में पन्ना पहुंचने पर रात्रि विश्राम के दौरान पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने हजारों की संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं को सनातन धर्म, हिंदू एकता और आपसी सामाजिक समरसता से जुड़े सात विशेष वचनों की शपथ दिलाई। इसके बाद यात्रा अपने तयशुदा मार्ग पर अगले पड़ाव के लिए रवाना हुई। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, यात्रा के दूसरे दिन दोपहर का विश्राम पवई में और रात्रि विश्राम हटा में संपन्न होगा।

वीआईपी कल्चर से मुक्त आयोजन

इस संपूर्ण आयोजन की एक खास बात यह है कि इसमें पूरी तरह से ‘वीआईपी कल्चर’ को समाप्त कर दिया गया है। बाबा बागेश्वर ने स्पष्ट संदेश दिया है कि कथा पंडाल और यात्रा के दौरान भक्त और भगवान के बीच कोई पास या विशेष व्यवस्था नहीं होगी, ताकि हर आम श्रद्धालु और भक्त सीधे तौर पर इस आध्यात्मिक अनुष्ठान से जुड़ सके। पांच जिलों—सागर, पन्ना, टीकमगढ़, दमोह और छतरपुर—से गुजरने वाली इस पांच दिवसीय रथ यात्रा के दौरान विभिन्न स्थानों पर हनुमान चालीसा पाठ, महाआरती और हवन जैसे धार्मिक आयोजनों का सिलसिला जारी है।

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