48 महीने का एरियर मिलेगा, हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को दिए निर्देश

जबलपुर: मध्य प्रदेश की आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के हक में माननीय उच्च न्यायालय ने एक बेहद संवेदनशील और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत के इस रुख से राज्य सरकार के उस फैसले को बड़ा झटका लगा है, जिसके तहत पूर्व में मानदेय के राज्य अंश में कटौती की गई थी। अब कोर्ट के दखल के बाद हजारों महिला कर्मचारियों को उनके सालों से अटके हक का भुगतान जल्द से जल्द सुनिश्चित करना होगा।

हाई कोर्ट की खंडपीठ ने बदला सिंगल बेंच का फैसला

न्यायमूर्ति आनंद पाठक और न्यायमूर्ति बीपी शर्मा की युगलपीठ ने इस संवेदनशील मामले की सुनवाई करते हुए एक महत्वपूर्ण कानूनी रुख साफ किया है। खंडपीठ ने पूर्व में आए सिंगल बेंच के उस आदेश में आंशिक संशोधन कर दिया है, जिसमें बकाया राशि पर ब्याज देने की बात कही गई थी। अदालत ने स्पष्ट तौर पर कहा है कि राज्य सरकार महिला कर्मियों को उनके हक की पूरी बकाया राशि तो देगी, लेकिन उस पर लगने वाले छह प्रतिशत ब्याज की शर्त को अब पूरी तरह से हटा दिया गया है।

मानदेय कटौती और विवाद की मुख्य वजह

इस पूरे विवाद की जड़ें साल 2018 के केंद्र सरकार के एक फैसले से जुड़ी हैं, जब केंद्र ने देश भर की आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के मानदेय में पंद्रह सौ रुपये की बढ़ोतरी का ऐलान किया था। इस बढ़ोतरी के तुरंत बाद मध्य प्रदेश सरकार ने साल 2019 में चालाकी दिखाते हुए अपने हिस्से का अंशदान घटा दिया। सरकार के इस कदम का सीधा असर महिला कर्मियों की जेब पर पड़ा और कार्यकर्ताओं का मानदेय दस हजार रुपये से कम हो गया, जबकि सहायिकाओं का मानदेय भी सात हजार रुपये से घटकर महज साढ़े पांच हजार रुपये पर सिमट कर रह गया था।

हजारों महिला कर्मचारियों को मिलेगा सीधे आर्थिक लाभ

अदालत के इस न्यायसंगत आदेश का सीधा फायदा सीधे तौर पर सूबे की छिियानवे हजार से भी अधिक आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को मिलने जा रहा है। उच्च न्यायालय ने सरकार की मनमानी पर लगाम लगाते हुए साफ निर्देश दिया है कि साल 2019 से लेकर साल 2023 तक के पूरे अड़तालीस महीनों का बकाया एरियर्स हर हाल में जारी किया जाए।

भुगतान के लिए सरकार को मिली चार महीने की समयसीमा

न्यायालय ने इस आदेश को अमलीजामा पहनाने के लिए समयसीमा भी तय कर दी है, जिसके तहत राज्य सरकार को एक सौ बीस दिनों के भीतर सभी पात्र कर्मचारियों के खातों में एरियर्स की राशि जमा करानी होगी। इसके साथ ही कोर्ट ने महिला कर्मचारियों के भविष्य और सामाजिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सरकार को ग्रेच्युटी एक्ट का नियमानुसार लाभ देने का भी सख्त आदेश जारी किया है, जिससे उनके बुढ़ापे को एक बड़ा संबल मिल सकेगा।

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