पटना : बिहार सरकार ने मंगलवार को कार्रवाई करते हुए गया के पूर्व एसएसपी आदित्य कुमार और पूर्णिया के वर्तमान एसपी दयाशंकर को सस्पेंड कर दिया. जिसमें गया के पूर्व एसएसपी आदित्य कुमार का मामला तूल पकड़ता जा रहा है. साइबर क्राइम में फंसे बिहार पुलिस के DGP एस के सिंघल की मुश्किल बढ़ सकती है. साइबर अपराधी के फर्जी फोन कॉल पर भ्रष्ट IPS की मदद करना भारी पड़ सकता है. अब सरकार को यह तय करना होगा कि DGP ने अब तक जो कार्रवाई की है वो कितनी सही है. साइबर क्राइम का यह हाई प्रोफाइल मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है.
पटना हाईकोर्ट के एक एडवोकेट ने इसे चीफ जस्टिस एवं न्यायपालिका की छवि धूमिल करने वाला बताकर सुप्रीम कोर्ट से CBI जांच की मांग की है. घटना के मुख्य आरोपी को रिमांड पर वही विभाग ले रहा है जो डीजीपी के अधीन है, ऐसे में निष्पक्ष जांच पर कई सवाल उठ रहे हैं.
एडवोकेट मणि भूषण प्रताप सेंगर ने डीजीपी एस के सिंघल पर सवाल उठाते हुए कहा है कि इस पद पर बैठे किसी व्यक्ति तक अपराधी कैसे पहुंच सकता है ? अगर किसी भ्रष्ट अफसर को मदद पहुंचाने का मामला था तो डीजीपी ने इस काम को एक फोन कॉल पर इतनी आसानी से क्यों कर दिया? गौरतलब है कि गया के पूर्व एसएसपी आदित्य कुमार के दोस्त अभिषेक अग्रवाल ने पटना हाईकोर्ट का चीफ जस्टिस बन कर बिहार के डीजीपी को निर्देश दिया था कि आईपीएस अमित कुमार के पक्ष में प्रशासनिक आदेश जारी करें.
सर्वोच्च न्यायालय को भेजे गए पिटीशन में एडवोकेट ने कहा है कि इस पूरी कहानी और तथ्य की सत्यता की जांच सीबीआई से कराई जाए. इस कांड में जो भी लोग दोषी हों, इसमें पुलिस अफसर और अन्य लोग हों उनपर कार्रवाई की जाए. एडवोकेट का कहना है कि ऐसे लोगों को दंडित करने के लिए यह याचिका है,क्योंकि इसमें पटना उच्च न्यायालय का नाम और मुख्य न्यायाधीश पटना उच्च न्यायालय का नाम उछाला जा रहा है. यह कहीं न कहीं मुख्य न्यायाधीश एवं न्यायपालिका की छवि को धूमिल कर रहा है.