हरियाणा के सरकारी स्कूलों में बदली तस्वीर, ‘निपुण हरियाणा’ से बढ़ी सीखने की क्षमता

रोहतक: हरियाणा सहित पूरे देश में शिक्षा के स्तर को सुधारने के लिए भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय द्वारा वर्ष 2021 से राष्ट्रीय शिक्षा नीति यानी एनईपी 2020 के अंतर्गत एक विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत प्राथमिक स्तर के बच्चों को बुनियादी साक्षरता और संख्या ज्ञान यानी एफएलएन के जरिए आधुनिक और व्यावहारिक ढंग से पढ़ाई करवाई जा रही है, ताकि शुरुआती दौर से ही उनकी नींव मजबूत की जा सके।

वर्ष 2026-27 तक हर बच्चे को पारंगत बनाने का बड़ा लक्ष्य

इस महत्वाकांक्षी योजना का मुख्य उद्देश्य वर्ष 2026-27 तक देश के प्रत्येक बच्चे को कक्षा तीन की पढ़ाई पूरी होने तक बुनियादी साक्षरता और गणितीय कौशल में पूरी तरह कुशल बनाना है। प्रशासन और शिक्षा विभाग का मानना है कि यदि बच्चे प्रारंभिक कक्षाओं में ही पढ़ना, लिखना और गणित के शुरुआती अंकगणित को अच्छी तरह समझ लेंगे, तो उन्हें आगे की उच्च कक्षाओं में किसी भी प्रकार की शैक्षणिक कठिनाई का सामना नहीं करना पड़ेगा।

गणित और भाषा की बुनियादी समझ विकसित करने पर विशेष फोकस

योजना के क्रियान्वयन के दौरान शिक्षकों द्वारा बच्चों में पठन-पाठन की कला और तार्किक क्षमता को विकसित करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। खेल-खेल में और गतिविधियों के माध्यम से बच्चों को वर्णमाला, शब्द निर्माण और बुनियादी गणित के सवालों को हल करना सिखाया जा रहा है, जिससे विद्यार्थियों की रुचि पढ़ाई के प्रति और अधिक बढ़ रही है और वे बिना किसी मानसिक दबाव के सहजता से ज्ञान अर्जित कर रहे हैं।

भविष्य की शिक्षा प्रणाली को मजबूत करने की दिशा में ठोस कदम

शिक्षाविदों और विशेषज्ञों का मानना है कि एफएलएन कार्यक्रम भारतीय शिक्षा प्रणाली की रीढ़ को मजबूत करने का एक मील का पत्थर साबित होगा। शुरुआती कक्षाओं के पाठ्यक्रम को बच्चों की मानसिक क्षमता के अनुकूल बनाकर उन्हें भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार किया जा रहा है, जिससे आने वाले समय में ड्रॉपआउट दरों में कमी आएगी और समग्र साक्षरता दर में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिलेगा।

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