पंचकूला। हरियाणा के पंचकूला स्थित सेक्टर-20 के गवर्नमेंट मॉडल प्राइमरी स्कूल में छह साल की मासूम बच्ची के साथ घटी दुखद वारदात के बाद राज्य के शिक्षा विभाग ने कड़ा रुख अपनाया है। बच्चों की सुरक्षा को लेकर विभाग पूरी तरह हरकत में आ गया है और पूरे प्रदेश के सभी विद्यालयों में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए सख्त गाइडलाइन्स लागू कर दी गई हैं। मौलिक शिक्षा निदेशक ने एक विशेष आदेश जारी करते हुए राज्य के समस्त जिला मौलिक शिक्षा अधिकारियों तथा खंड शिक्षा अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि चाहे सरकारी स्कूल हो या निजी, सुरक्षा के सभी तय मानकों का कड़ाई से पालन किया जाए। शिक्षा विभाग ने साफ कर दिया है कि विद्यार्थियों की सुरक्षा के प्रति बरती गई किसी भी प्रकार की ढिलाई को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और चूक पाए जाने पर सीधे तौर पर संबंधित विद्यालय प्रमुख को जिम्मेदार ठहराते हुए दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
बैगों की सघन जांच और मुख्य द्वार पर सख्त पहराबंदी
नई जारी की गई सुरक्षा गाइडलाइन्स के तहत प्रदेश के सभी स्कूलों में प्रतिदिन प्रथम पीरियड के दौरान कक्षा अध्यापकों द्वारा विद्यार्थियों के स्कूल बैगों की अनिवार्य रूप से जांच की जाएगी, ताकि कोई भी अवांछित या आपत्तिजनक वस्तु स्कूल परिसर के भीतर न पहुँच सके। इसके अतिरिक्त, प्रार्थना सभा व स्कूल शुरू होने के तुरंत बाद विद्यालय के मुख्य प्रवेश द्वार को अनिवार्य रूप से लॉक कर दिया जाएगा और वहाँ चौकीदार की उपस्थिति तय की जाएगी। यदि किसी कारणवश नियमित चौकीदार अनुपस्थित रहता है, तो उसकी जगह ग्रुप-डी के कर्मचारी की ड्यूटी गेट पर लगाना अनिवार्य कर दिया गया है।
परिसर में निरंतर गश्त और छुट्टी के समय विशेष निगरानी
विद्यालयों में खाली रहने वाले पीरियड्स के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से पीटीआई, डीपीई तथा अन्य शिक्षकों को पूरे स्कूल परिसर का लगातार दौरा कर गश्त लगाने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही, शिक्षण कार्य समाप्त होने और छुट्टी होने के पश्चात जब तक अंतिम विद्यार्थी कक्षा से बाहर सुरक्षित न चला जाए, तब तक शिक्षक कक्षा नहीं छोड़ेंगे। स्कूल के कपाट बंद करने से पूर्व हर एक कमरे और कोने का गहन निरीक्षण करना आवश्यक कर दिया गया है।
हाउस प्रणाली का दैनिक क्रियान्वयन
विद्यार्थियों में अनुशासन और सुरक्षा की भावना को दैनिक स्तर पर मजबूत करने के लिए प्रदेश भर के शैक्षणिक संस्थानों में हाउस प्रणाली को रोजाना अनिवार्य रूप से लागू करने का निर्णय लिया गया है। इस व्यवस्था के माध्यम से अध्यापकों और छात्र प्रतिनिधियों की दैनिक जिम्मेदारी तय की जाएगी, जिससे स्कूल परिसर के हर हिस्से पर पैनी नजर रखी जा सके और किसी भी अप्रिय घटना को समय रहते रोका जा सके।

