Saturday, August 30, 2025

विधायक विनेश फोगाट को SHO से मिला चौंकाने वाला जवाब: “तू कौन बोलै है”

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जींद: कांग्रेस विधायक विनेश फोगाट मां बनने के बाद बुधवार को पहली बार सार्वजनिक मंच पर पहुंचीं और आते ही प्रदेश की कानून-व्यवस्था को लेकर बड़ा हमला बोला। उन्होंने जुलाना थाने के एसएचओ रविंद्र कुमार पर लापरवाही और असंवेदनशील व्यवहार का आरोप लगाते हुए कहा कि हरियाणा में अपराध चरम पर है और सरकार पूरी तरह विफल हो चुकी है। दविनेश फोगाट ने बताया कि उनके पास एक महिला की शिकायत आई थी, जिसके पति 14 अगस्त से लापता हैं। जब उन्होंने इस संबंध में जानकारी लेने के लिए जुलाना थाने में फोन किया तो एसएचओ रविंद्र कुमार ने बेहद असभ्य तरीके से जवाब दिया। विनेश ने कह कि थाना प्रभारी बोला- तू कौन बोलै है। दारू पी रहा था के यो? रोजाना लोग लापता हो रहे हैं। विधायक ने इस व्यवहार पर हैरानी जताते हुए कहा कि यह प्रदेश में फैले जंगलराज की तस्वीर है।

एसएचओ को सस्पेंड करने की मांग

कार्यकर्ताओं ने एसएचओ को निलंबित करवाने की मांग की। इस पर विनेश फोगाट ने कहा कि आजकल तो ये लोग मुख्यमंत्री की भी नहीं सुनते। उन्होंने कहा कि प्रदेश में अपराध का ग्राफ तेजी से बढ़ रहा है। जींद जैसे शांत इलाके में अब रोजाना गोलियां चल रही हैं और अपराध की घटनाएं हो रही हैं। उन्होंने कहा कि मैंने कभी नहीं सुना था कि जींद में अपराध होता है, लेकिन आज भाजपा राज में स्थिति भयावह हो चुकी है। सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए विनेश फोगाट ने कहा कि चंडीगढ़ में बैठे अधिकारी फोन तक नहीं उठाते। हरियाणा में सरकार मुख्यमंत्री की नहीं, बल्कि अधिकारियों की चल रही है।
  
विनेश ने लगाए ये आरोप

उन्होंने आगे कहा कि अधिकारी न हमारी सुनते हैं और न ही मुख्यमंत्री की। जुलाना में चेयरमैन रिश्वत लेते पकड़ा गया और भाजपा नेताओं में होड़ मची है कि कौन ज्यादा रिश्वत लेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्होंने खुद भी दो-तीन बार भ्रष्टाचार पकड़ा लेकिन उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। जनता से जागरूक होने की अपील करते हुए विधायक ने कहा कि अगर जनता जागरूक होगी तो ऐसे कई चोर पकड़े जाएंगे। उन्होंने इसके बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं की बैठक विश्राम गृह में ली और कहा कि प्रदेश का भाईचारा इस बात का सबूत है कि भिवानी में बेटी मनीषा को न्याय दिलाने के लिए जिले के लोग एकजुट होकर संघर्ष कर रहे हैं। विनेश फोगाट ने खुद के अनुभव साझा करते हुए कहा कि वे भी आंदोलन के दौरान भुगतभोगी रही हैं और जानती हैं कि किस तरह से सरकार आंदोलनों को दबाने का प्रयास करती है।

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