हरियाणा SIR में बड़ी उपलब्धि, 80% डिजिटलाइजेशन पूरा; फतेहाबाद ने मारी बाजी

कुरुक्षेत्र। हरियाणा में चुनाव आयोग की ओर से चलाए जा रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) कार्य के अंतर्गत एन्यूमरेशन फॉर्मों के डिजिटाइजेशन की प्रक्रिया अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच गई है। इस बेहद महत्वपूर्ण चुनावी अभियान को पूरा करने का मंगलवार को आखिरी दिन है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान में पूरे प्रदेश के भीतर कुल दो करोड़ छह लाख ५५ हजार ९२९ पंजीकृत मतदाता मौजूद हैं। हरियाणा चुनाव आयोग ने तत्परता दिखाते हुए अब तक इनमें से ८०.८७ प्रतिशत यानी कुल एक करोड़ ६७ लाख तीन हजार ९४४ मतदाताओं के डेटा का डिजिटाइजेशन सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है, जबकि शेष १९.१३ प्रतिशत का कार्य अभी भी प्रक्रियाधीन है।

फतेहाबाद जिला अव्वल और साइबर सिटी गुरुग्राम प्रदर्शन में सबसे फिसड्डी

मतदाताओं के डेटा को डिजिटल रूप देने के इस महाअभियान में प्रदेश के अलग-अलग जिलों से बेहद मिश्रित परिणाम देखने को मिले हैं। इस पूरी प्रक्रिया में फतेहाबाद जिला पूरे प्रदेश में शीर्ष स्थान पर काबिज हुआ है, जहां की प्रशासनिक टीम ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए ९२.५४ प्रतिशत डिजिटाइजेशन का कार्य समय से पहले ही निपटा लिया है। इसके ठीक विपरीत, प्रदेश की आर्थिक राजधानी और सबसे हाईटेक माना जाने वाला गुरुग्राम जिला इस सूची में सबसे निचले पायदान पर पहुंच गया है, जहां कार्य की गति बेहद धीमी दर्ज की गई।

केवल दो ही जिले छू पाए नब्बे प्रतिशत कार्य का महत्वपूर्ण जादुई आंकड़ा

निर्वाचन विभाग से प्राप्त ताजा रिपोर्ट के अनुसार, पूरे हरियाणा राज्य में केवल दो ही ऐसे जिले सामने आए हैं जहां का प्रशासनिक अमला ९० प्रतिशत से अधिक डिजिटाइजेशन के लक्ष्य को हासिल करने में कामयाब हो सका है। बाकी के तमाम जिलों में काम की रफ्तार उम्मीद के मुताबिक नहीं रही और वे इस आंकड़े से काफी पीछे रह गए। अंतिम दिन होने के कारण चुनाव आयोग के अधिकारियों ने उन क्षेत्रों में अतिरिक्त कर्मचारियों को तैनात किया है जहां का बैकलॉग बहुत ज्यादा है, ताकि समय सीमा के भीतर इस बड़े डेटाबेस को अपडेट किया जा सके।

अंतिम दिन बची हुई फाइलों को डिजिटल करने के लिए युद्ध स्तर पर काम शुरू

अंतिम तिथि की गंभीरता को देखते हुए राज्य चुनाव आयोग ने सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों को कड़े निर्देश जारी किए हैं। बचे हुए करीब १९ फीसदी एन्यूमरेशन फॉर्मों को कंप्यूटर सिस्टम में फीड करने के लिए ब्लॉक और तहसील स्तर पर तकनीकी टीमों को युद्ध स्तर पर काम में लगा दिया गया है। अधिकारियों का मुख्य फोकस इस बात पर है कि डेटा एंट्री में किसी भी प्रकार की मानवीय भूल या तकनीकी खामी न रहे, क्योंकि इसी डिजिटल डेटा के आधार पर आगामी चुनावों की मुख्य वोटर लिस्ट को पूरी तरह से पारदर्शी और त्रुटिहीन बनाया जाएगा।

त्रुटिहीन मतदाता सूची तैयार करने और फर्जीवाड़े को रोकने में मिलेगी मदद

चुनाव आयोग के वरिष्ठ विशेषज्ञों का मानना है कि इस विशेष गहन पुनरीक्षण कार्य और बड़े पैमाने पर किए जा रहे डिजिटाइजेशन से चुनावी प्रक्रिया में बहुत बड़ा सुधार आएगा। सभी फॉर्मों के डिजिटल हो जाने से मतदाता सूची में नाम दोहराए जाने, मृत व्यक्तियों के नाम शामिल रहने या फर्जी वोटरों जैसी तमाम गड़बड़ियों पर पूरी तरह से लगाम कसी जा सकेगी। इसके साथ ही, भविष्य में आम जनता के लिए अपनी वोटर आईडी में किसी भी प्रकार का ऑनलाइन संशोधन कराना या नया नाम जुड़वाना बेहद आसान और सुरक्षित हो जाएगा।

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