Saturday, February 24, 2024

‘डेमोक्रेटिक आज़ाद पार्टी’ के साथ गुलाम नबी आज़ाद ने की दूसरी पारी की शुरुआत

पूर्व कांग्रेस नेता गुलाम नबी आज़ाद ने अपनी अलग पार्टी का एलान कर दिया है. उनकी पार्टी का नाम है ‘डेमोक्रेटिक आज़ाद पार्टी’. इस मौके पर गुलाम नबीं आज़ाद ने कहा कि “डेमोक्रेसी डेमोक्रेटिक के लिए है कि पूरी स्वतंत्र होगी. जिसका मैंने उल्लेख किया कि अपनी सोच होगी. किसी भी पार्टी या नेता से प्रभावित नहीं होगी और आज़ाद रहेगी.
कैसी होगी गुलाम नबी आज़ाद की पार्टी
अपनी पार्टी के एलान के साथ ही गुलाम नबी आज़ाद ने भी साफ किया की उनकी पार्टी में जो शामिल होगा उसका मकसद पैसा बनाना नहीं बल्कि जनता की सेवा करना होगा. उन्होंने कहा कि वो उन्हीं लोगों को पार्टी में शामिल करेंगे जो दूसरों के लिए प्रेरणा बन सकें. आजाद ने कहा कि हमने महात्मा गांधी जी को नहीं देगा लेकिन उनके काम से हम आज भी प्रेरित होते हैं. मैं चाहता हूं मेरे साथी भी अपने काम से लोगों के लिए प्रेरणा बने.
उन्होंने एलान किया कि उनकी पार्टी में 50 फीसदी टिकटें महिलाओं और नौजवानों को दी जाएगी इसके लिए पार्टी उम्र भी तय करेगी. उन्होंने साफ कहा कि क्योंकि राज्य में चुनाव कभी भी हो सकते है इसलिए उनकी पार्टी अपनी गतिविधियां चालू रखेगी. साथ ही उन्होंने कहा कि पार्टी को रजिस्टर करना उनकी प्राथमिकता है.
गांधी परिवार से नाराज़ होकर छोड़ी थी कांग्रेस
गुलाम नबी आज़ाद लंबे समय से कांग्रेस आलाकमान से नाराज़ थे. उन्होंने इसका इज़हार जी-23 ग्रुप की चिट्ठी पर हस्ताक्षर कर भी किया था. कांग्रेस ने उन्हें जम्मू कश्मीर कैंपेन कमिटी का प्रमुख नियुक्त था लेकिन नियुक्ति के थोड़ी देर बाद ही गुलाम नबी ने ये पद ठुकरा दिया. बताया गया कि वो इस बात से नाराज थे कि उनके सुझावों को पार्टी ने पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया था. जिसके बाद पार्टी अध्यक्ष को लिखे खत में बेहद तल्ख़ भाषा का इस्तेमाल करते हुए राहुल गांधी पर आरोप भी लगाए थे और पार्टी की सदस्यता के साथ साथ सभी पदों से इस्तीफ़ा दे दिया था.
आज़ाद का अब तक का सफर
गुलाम नबी आज़ाद ने अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत कश्मीर में इंडियन यूथ कांग्रेस सेकी थी. कांग्रेस के साथ आज़ाद का सफर 50 वर्ष से ज्यादा का था. कांग्रेस में रहते हुए वह चार बार केंद्रीय मंत्री बने. उन्होंने चार प्रधानमंत्रियों के साथ काम किया. इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, नरसिम्हा राव और मनमोहन सिंह की सरकार में उन्हें अहम जिम्मेदारियां मिली इसके साथ ही वो कांग्रेस की ओर से कश्मीर के मुख्यमंत्री भी रहे. पिछले कुछ समय से वो राज्यसभा में कांग्रेस के नेता और नेता प्रतिपक्ष थे. आज़ाद चार बार चुनाव जीत लोकसभा पहुंचे थे. जिसमें से 2 बार वो महाराष्ट्र से चुनाव जीते थे. आपको बता दें गुलाम नबीं आजाद कश्मीर के डोडा ज़िले से आते हैं.

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