भारतीय घरों में तुलसी का पौधा सिर्फ एक पौधा नहीं माना जाता, बल्कि इसे मां लक्ष्मी का रूप समझा जाता है. सुबह-शाम तुलसी के पास दिया जलाना, जल चढ़ाना और आरती करना कई लोगों की रोज की आदत होती है. माना जाता है कि तुलसी के सामने की गई प्रार्थना सीधे भगवान तक पहुंचती है और घर में सुख-शांति बनी रहती है. खासकर शाम की तुलसी आरती का अलग ही महत्व है. दिनभर की भागदौड़ और तनाव के बाद जब घर में दीपक की लौ जलती है और तुलसी माता की आरती गूंजती है, तो माहौल अपने आप शांत और पवित्र सा लगने लगता है. तुलसी आरती के बोल बहुत सरल होते हैं, जिन्हें कोई भी आसानी से याद कर सकता है. इन शब्दों में भक्ति, भरोसा और अपनापन झलकता है. ये आरती सिर्फ एक रस्म नहीं, बल्कि मन को सुकून देने और घर की ऊर्जा को अच्छा बनाए रखने का तरीका है. जो लोग रोज तुलसी आरती गाते हैं, वे कहते हैं कि इससे मन के डर कम होते हैं और घर में खुशी का माहौल रहता है.
तुलसी माता की प्रसिद्ध आरती
जय जय तुलसी माता आरती के बोल
जय जय तुलसी माता, मैय्या जय तुलसी माता।
सब जग की सुख दाता, सबकी वर माता।।
मैय्या जय तुलसी माता।। (1)
सब योगों से ऊपर, सब रोगों से ऊपर।
रज से रक्ष करके, सबकी भव त्राता।
मैय्या जय तुलसी माता।। (2)
बटु पुत्री है श्यामा, सूर बल्ली है ग्राम्या।
विष्णुप्रिय जो नर तुमको सेवे, सो नर तर जाता।
मैय्या जय तुलसी माता।। (3)
हरि के शीश विराजत, त्रिभुवन से हो वंदित।
पतित जनों की तारिणी, तुम हो विख्याता।
मैय्या जय तुलसी माता।। (4)
लेकर जन्म विजन में, आई दिव्य भवन में।
मानव लोक तुम्हीं से, सुख-संपति पाता।
मैय्या जय तुलसी माता।। (5)
हरि को तुम अति प्यारी, श्याम वर्ण सुकुमारी।
प्रेम अजब है उनका, तुमसे कैसा नाता।
हमारी विपद हरो तुम, कृपा करो माता।
मैय्या जय तुलसी माता।। (6)
जय जय तुलसी माता, मैय्या जय तुलसी माता।
सब जग की सुख दाता, सबकी वर माता।।
मैय्या जय तुलसी माता।। (7)
आरती का अंत शांति मंत्र से करें:
ॐ शांति शांति शांति॥
तुलसी आरती का मतलब क्या है
इस आरती में तुलसी माता की महिमा बताई गई है. उन्हें भगवान विष्णु की प्रिय कहा गया है. “हरि की पटरानी” कहने का मतलब है कि तुलसी माता को बहुत ऊंचा स्थान दिया गया है. आरती के बोल बताते हैं कि जिसने भी सच्चे मन से तुलसी की पूजा की, उसे मनचाहा सुख मिला. इन शब्दों में एक भरोसा छुपा है -अगर मन साफ हो और भक्ति सच्ची हो, तो जीवन की परेशानियां हल्की लगने लगती हैं. ये आरती हमें याद दिलाती है कि भगवान से जुड़ाव दिखावे से नहीं, भावना से होता है.
तुलसी आरती करने का सही समय
ज्यादातर लोग तुलसी आरती सुबह सूरज निकलने के बाद और शाम को सूरज ढलने के समय करते हैं. शाम की आरती ज्यादा खास मानी जाती है, क्योंकि उस समय घर में दीपक जलाकर तुलसी माता के पास घी या तेल का दिया रखा जाता है. इससे घर का माहौल शांत होता है और नकारात्मकता दूर रहने की मान्यता है. रविवार छोड़कर रोज तुलसी पर जल चढ़ाया जाता है. आरती के समय अगर पूरा परिवार साथ खड़ा हो जाए, तो घर में अपनापन और बढ़ जाता है.
तुलसी आरती से मिलने वाले फायदे
-मन को शांति मिलती है
-घर का माहौल हल्का और खुशहाल रहता है
-डर और बेचैनी कम महसूस होती है
-घर में बरकत बनी रहती है
-पूजा करने की आदत से मन एकाग्र होता है
कई लोग मानते हैं कि तुलसी माता की कृपा से रिश्तों में मिठास आती है और घर में झगड़े कम होते हैं.
आरती करते समय किन बातों का ध्यान रखें
तुलसी के पास साफ जगह होनी चाहिए. वहां जूते-चप्पल न ले जाएं. आरती से पहले हाथ-मुंह धो लें. तुलसी को छूने से पहले मन में सम्मान का भाव रखें. सूखे पत्ते खुद गिरें तो अलग बात है, हरे पत्ते बिना जरूरत न तोड़ें.
आरती के समय मन इधर-उधर न भटके, कोशिश करें कि पूरा ध्यान आरती के शब्दों पर रहे. इससे भक्ति का असर ज्यादा महसूस होता है.

