सुबह नींद खुलते ही कई लोग सबसे पहले अपनी हथेलियों को देखते हैं. यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है. बड़े-बुजुर्ग भी बच्चों को सुबह उठकर हथेली देखने की सलाह देते हैं. मान्यता है कि इससे दिन की शुरुआत शुभ होती है और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है. लोकल 18 से बातचीत में बल्लभगढ़ के महंत कामेश्वरानंद वेदांताचार्य बताते हैं कि सुबह उठते ही सबसे पहले अपने दोनों हाथों को आपस में मसलना चाहिए और फिर हथेलियों का दर्शन करना चाहिए. वास्तु शास्त्र में इसका विशेष महत्व बताया गया है. जब हम अपनी हथेलियों को देखते हैं तो उसमें मां लक्ष्मी, मां सरस्वती और भगवान के स्वरूप का स्मरण करते हैं. इससे दिन की शुरुआत अच्छे विचारों के साथ होती है. महंत कामेश्वरानंद वेदांताचार्य बताते हैं कि जब हम सुबह अपनी हथेलियों का दर्शन करते हैं तो यह भगवान गोविंद के दर्शन के समान है. इससे मन में सकारात्मकता आती है और पूरे दिन अच्छा महसूस होता है.
सुबह नींद खुलते ही कई लोग सबसे पहले अपनी हथेलियों को देखते हैं. यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है. बड़े-बुजुर्ग भी बच्चों को सुबह उठकर हथेली देखने की सलाह देते हैं. मान्यता है कि इससे दिन की शुरुआत शुभ होती है और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है. लोकल 18 से बातचीत में बल्लभगढ़ के महंत कामेश्वरानंद वेदांताचार्य बताते हैं कि सुबह उठते ही सबसे पहले अपने दोनों हाथों को आपस में मसलना चाहिए और फिर हथेलियों का दर्शन करना चाहिए. वास्तु शास्त्र में इसका विशेष महत्व बताया गया है. जब हम अपनी हथेलियों को देखते हैं तो उसमें मां लक्ष्मी, मां सरस्वती और भगवान के स्वरूप का स्मरण करते हैं. इससे दिन की शुरुआत अच्छे विचारों के साथ होती है. महंत कामेश्वरानंद वेदांताचार्य बताते हैं कि जब हम सुबह अपनी हथेलियों का दर्शन करते हैं तो यह भगवान गोविंद के दर्शन के समान है. इससे मन में सकारात्मकता आती है और पूरे दिन अच्छा महसूस होता है.
महंत कामेश्वरानंद वेदांताचार्य बताते हैं कि सुबह की शुरुआत अच्छे विचारों, भगवान के स्मरण और हथेली दर्शन से की जाए तो मन शांत रहता है और दिनभर सकारात्मक सोच बनी रहती है. यही कारण है कि आज भी कई परिवारों में सुबह उठकर हथेली देखने की परंपरा निभाई जाती है.

