जन्माष्टमी से पहले घर में जरुर लेकर आएं ये 5 चीजें, तभी जन्मोत्सव की कर पाएंगे शुरुआत

भगवान कृष्ण के जन्मोत्सव को भक्ति, उपवास, भजन और मध्यरात्रि पूजा के साथ मनाया जाता है. इस बार देशभर में कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व 4 सितंबर दिन शुक्रवार को मनाया जाएगा. कई परिवार अपने घरों को भी सजाते हैं और विशेष भोग तैयार करते हैं. जन्माष्टमी से पहले घर में कुछ चीजों का लाना आवश्यक माना गया है, तभी जन्मोत्सव की तैयारी पूरी हो पाएगी. आइए जानते हैं कौन सी हैं ये 5 चीजें…

भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र में भगवान श्रीकृष्ण ने अवतार लिया था और इस बार यह शुभ तिथि 4 सितंबर दिन शुक्रवार को है. मान्यता है कि इस दिन भगवान कृष्ण की विधि-विधान से पूजा करने के साथ घर में कुछ शुभ वस्तुएं लाने से सकारात्मकता और सुख-समृद्धि का वास होता है. जन्माष्टमी की तैयारियां भी कई घरों में पहले से शुरू हो जाती हैं. अगर आप भी कान्हा के जन्मोत्सव की तैयारी कर रहे हैं, तो पूजा से पहले कुछ खास चीजें घर जरूर लेकर आएं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन वस्तुओं को शुभ माना जाता है और इन्हें कृष्ण भक्ति से भी जोड़ा जाता है. आइए जानते हैं वे 5 चीजें कौन-सी हैं, जिन्हें जन्माष्टमी से पहले घर लाना शुभ माना जाता है और इनके पीछे क्या धार्मिक मान्यता है.

मोर पंख – मोर पंख भगवान कृष्ण के सबसे प्रसिद्ध प्रतीकों में से एक है. कृष्णजी को अक्सर अपने मुकुट में मोर पंख पहने हुए दिखाया जाता है. इसलिए जन्माष्टमी से पहले घर में मोरपंख अवश्य लाना चाहिए. ऐसा करने से घर की नकारात्मकता दूर होती है और सकारात्मक वातावरण बना रहता है. जन्माष्टमी से पहले इसे घर पर ले आएं और जन्माष्टमी के दिन पूजा करते समय बाल गोपाल के पास रख दें. जिन लोगों पर राहु की महादशा चल रही है, उनको यह उपाय अवश्य करना चाहिए. कृष्णजी को मोरपंख अर्पित करने से राहु के अशुभ प्रभाव में कमी आती है.

कृष्णजी की बांसुरी – जन्माष्टमी से पहले कृष्णजी की बांसुरी अवश्य ले आएं. हम सभी को पता है कि कृष्णजी को बांसुरी कितनी प्रिय है. एक साधारण लकड़ी की बांसुरी खरीदें और उसे कृष्णजी या लड्डू गोपाल के सामने रख दें. मान्यता है कि जन्माष्टमी से पहले बांसुरी लाने से घर के सदस्यों में प्रेम भाव बना रहता है और बुरी नजर भी दूर होती है. कृष्णजी की बांसुरी प्रेम के आकर्षण का प्रतीक है, बल का नहीं. भक्ति प्रतीकात्मकता में, खाली बांसुरी तभी बजाई जा सकती है जब कृष्णजी उसमें से सांस लेते हैं.

तुलसी का पौधा – भगवान कृष्ण की पूजा में बिना तुलसी के अधूरी मानी जाती है. हालांकि ज्यादातर घरों में तुलसी का पौधा होता है लेकिन जिन घरों में तुलसी का पौधा नहीं है, वे जन्माष्टमी से पहले ले आएं. घर में तुलसी का पौधा होने से वास्तु, ग्रह समेत कई दोष दूर होते हैं और घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है. साथ ही तुलसी का पौधा होने से घर के सदस्यों में भक्तिभावना बढ़ती है और कई तरह की बीमारियों से राहत भी मिलती है.

गाय और बछड़े का प्रतीक – कृष्णजी का बचपन गोकुल, गायों और देहाती जीवन से घनिष्ठ रूप से जुड़ा हुआ है, उन्हें गोपाल और गोविंद भी कहा जाता है. इसलिए, जन्माष्टमी से पहले घर में एक छोटी गाय-बछड़े की मूर्ति जरूर ले आएं. मान्यता है कि घर में गाय-बछड़े की मूर्ति होने से हर परेशानी दूर होती है और तरक्की के मार्ग प्रशस्त होते हैं. पारंपरिक रूप से छोटी गाय-बछड़े की मूर्ति को पोषण, प्रेम, परिवार की सुरक्षा और जीवन को सहारा देने वाले मूल तत्वों के लिए कृतज्ञता से जोड़ा गया है. इसे अपने कृष्ण वेदी के पास या अपने घर के किसी भी साफ कोने में रखें.

लड्डू गोपाल की मूर्ति – ज्यादातर घरों में बाल गोपाल की पूजा की जाती है लेकिन अगर आपके घर पर बाल गोपाल नहीं है तो जन्माष्टमी से पहले घर ले आएं. हालांकि बाल गोपाल की पूजा में कई नियमों व परंपराओं का ध्यान रखा जाता है. अगर आप वे नियम पूरे कर पाने की स्थिति में हों, तभी बाल गोपाल को घर लाना चाहिए. बाल गोपाल को घर लाने के बाद उसकी प्राण प्रतिष्ठा भी की जाती है. बाल गोपाल के साथ उनके श्रृंगार और वस्त्र भी घर जरूर लेकर आएं और पूजा के दौरान नए वस्त्र व श्रृंगार करें.

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