राजस्थान के भरतपुर में कई ऐसे प्राचीन मंदिर हैं, जो अपनी विशेष धार्मिक मान्यताओं और अनूठी परंपराओं के लिए जाने जाते हैं. ऐसा ही एक मंदिर शहर के रणजीत नगर में स्थित है, जहां श्रद्धालुओं को एक ही स्थान पर तीन देवियों के दर्शन करने का सौभाग्य मिलता है. यहां मां महाकाली, मां महालक्ष्मी और मां महासरस्वती एक साथ विराजमान हैं. मंदिर में मां ज्वाला की अखंड ज्योति भी श्रद्धालुओं की आस्था का विशेष केंद्र बनी हुई है.
यही वजह है कि यहां दूर-दराज के क्षेत्रों से भक्त दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं. रणजीत नगर स्थित इस मंदिर की स्थापना वर्ष 1983 में हुई थी. तब से लेकर आज तक यह मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है. चार दशक से अधिक समय बीत जाने के बाद भी यहां भक्तों की श्रद्धा और विश्वास लगातार बना हुआ है. मंदिर में आने वाले श्रद्धालु तीनों देवियों के दर्शन कर परिवार की सुख-समृद्धि, खुशहाली और मंगलकामना के लिए प्रार्थना करते हैं.
शक्ति, धन और ज्ञान की देवी के रूप में होती है पूजा
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां महाकाली को शक्ति और साहस, मां महालक्ष्मी को धन-समृद्धि तथा मां महासरस्वती को ज्ञान और विद्या की देवी के रूप में पूजा जाता है. ऐसे में एक ही मंदिर में तीनों देवियों के विराजमान होने से इस स्थान का धार्मिक महत्व और भी बढ़ जाता है. मंदिर में प्रज्वलित मां ज्वाला की अखंड ज्योति भी श्रद्धालुओं के आकर्षण का प्रमुख केंद्र है.
अखंड ज्योति के दर्शन के लिए पहुंचते हैं भक्त
भक्त यहां पहुंचकर अखंड ज्योति के दर्शन करते हैं और माता रानी के समक्ष अपनी मनोकामनाएं रखते हैं. स्थानीय निवासियों के अनुसार, इस मंदिर में तीनों देवियों की एक साथ पूजा-अर्चना की जाती है. यही विशेषता इसे क्षेत्र के अन्य मंदिरों से अलग पहचान दिलाती है. भरतपुर के रणजीत नगर में स्थित यह मंदिर धार्मिक आस्था, भक्ति और विश्वास का प्रतीक है. यहां आने वाले श्रद्धालुओं के लिए तीनों देवियों के एक साथ दर्शन करना विशेष अनुभव होता है. मां ज्वाला की अखंड ज्योति और तीनों देवियों की उपस्थिति के कारण यह मंदिर स्थानीय लोगों के साथ-साथ दूर-दराज से आने वाले भक्तों के बीच भी अपनी अलग पहचान रखता है.

