Monday, February 16, 2026

अगर इस ओर खुलते हैं आपके घर के दरवाजे, तो फौरन हो जाएं सावधान! वरना… घर से चली जाएगी खुशहाली

घर का मेन गेट सिर्फ एक रास्ता नहीं होता बल्कि यह खुशियों और समृद्धि के प्रवेश का माध्यम होता है. यही वह स्थान है, जिससे न केवल आप आते हैं बल्कि आपके साथ सकारात्मक ऊर्जा और शुभ फल भी घर में प्रवेश करते हैं. अक्सर लोग ये मान लेते हैं कि अगर घर का मुख्य द्वार वास्तु के अनुसार है, तो सब कुछ ठीक है. लेकिन सच्चाई यह है कि घर के अंदर मौजूद अन्य दरवाज़ों का भी उतना ही महत्व होता है. ज्योतिष एवं वास्तु शास्त्री रवि पाराशर बता रहे हैं दरवाज़ों के वास्तु के बारे में और उनका असर हमारे जीवन पर क्या पड़ता है.

दरवाज़ों की संख्या
वास्तु शास्त्र और ज्योतिष के अनुसार, दरवाज़ों की संख्या विषम में होनी चाहिए जैसे- 3, 5, 7, 9 या 11. विषम संख्या से ऊर्जा का प्रवाह संतुलित रहता है.

कौन सा दरवाज़ा बड़ा हो?
अक्सर घरों में एक मुख्य बड़ा गेट होता है, जिससे हम घर में प्रवेश करते हैं. ध्यान रखें कि यह मुख्य इंट्री डोर सबसे बड़ा और डबल डोर होना चाहिए. क्योंकि यही वो दरवाज़ा है, जिससे सकारात्मक ऊर्जा घर में प्रवेश करती है. अन्य दरवाज़े सिंगल हो सकते हैं, लेकिन इंट्री डोर का आकार और चौड़ाई सबसे ज़्यादा होनी चाहिए.

दरवाज़ा खुले किस दिशा में?
इस बात पर बहुत कम लोग ध्यान देते हैं. ध्यान रखें कि दरवाज़ा हमेशा अंदर की ओर खुलना चाहिए. ऐसा न हो कि कोई मेहमान आए और दरवाज़ा बाहर की ओर खुलने के कारण उसे दो कदम पीछे हटना पड़े. ऐसा होना वास्तु के हिसाब से अच्छा नहीं माना जाता. इससे घर में धन संबंधी परेशानियां बनी रहती है और घर के लोगों को तरक्की के लिए बहुत संघर्ष करना पड़ता है.

दरवाज़े की आवाज़ शुभ या अशुभ?
कई बार दरवाज़े खोलते समय कर्कश आवाजें आती हैं. ऐसी आवाजें ऊर्जा के प्रवाह में रुकावट डालती हैं. अगर ऐसा हो तो दरवाज़ों को ठीक कराएं ताकि आवाज़ बंद हो जाए. कभी-कभी दरवाज़ों पर पुराने ज़माने की लोहे की चेन जैसी चीज़ें लगी होती हैं जो अशुभ मानी जाती हैं.

दक्षिण और पश्चिम दिशा के द्वार
वास्तु के अनुसार, दक्षिण और पश्चिम दिशा में दरवाज़े की संख्या कम से कम होनी चाहिए. अगर घर में दो इंट्री डोर हैं एक उत्तर दिशा में और एक दक्षिण-पश्चिम में, तो ध्यान रखें कि उत्तर दिशा वाला द्वार बड़ा हो और दक्षिण-पश्चिम वाला छोटा. इससे उत्तर दिशा की शुभ ऊर्जा का प्रवेश ज्यादा होगा और नकारात्मक ऊर्जा की निकासी संतुलित रहेगी.

मंगल कलश
यह कलश शुक्र और चंद्रमा के प्रभावों को दर्शाता है. इसे मुख्य द्वार पर रखना बेहद शुभ माना जाता है. अगर आप घर के मुख्य द्वार पर मंगल कलश रखते हैं, तो ध्यान रखें कि कलश का मुख खुला और चौड़ा होना चाहिए. इसमें स्वच्छ जल भरें और संभव हो तो उसमें फूलों की पंखुड़ियां भी डालें. अगर आपके पास पारंपरिक कलश नहीं है तो आप किसी चौड़े मुंह वाले बर्तन में पानी भरकर भी द्वार पर रख सकते हैं. इससे नकारात्मक ऊर्जा घर में प्रवेश नहीं करती और सकारात्मकता का संचार होता है. ये छोटे से उपाय आपके घर को शांति, सौभाग्य और समृद्धि का केंद्र बना सकते हैं.

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