3 साल बाद आया दुर्लभ संयोग! पुरुषोत्तमी एकादशी का महत्व

मलमास की पहली एकादशी को शास्त्रों में अत्यंत पवित्र और दुर्लभ माना गया है. इसे पुरुषोत्तमी या पद्ममनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है. यह एकादशी हर वर्ष नहीं आती, बल्कि लगभग तीन वर्ष के अंतराल के बाद मलमास या अधिक मास में इसका संयोग बनता है. इसी कारण इसका धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व और भी बढ़ जाता है. मान्यता है कि इस व्रत को करने से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है.
क्या कहते है देवघर के ज्योतिषाचार्य 
देवघर के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित नंदकिशोर मुद्गल ने लोकल 18 के संवाददाता से बातचीत करते हुए बताया कि वर्ष 27 मई मको पुरुषोत्तमी एकादशी का व्रत रखा जाएगा. उन्होंने कहा कि यह एक ऐसा दुर्लभ अवसर होता है जब भक्तों को विशेष फल प्राप्त करने का अवसर मिलता है. शास्त्रों में इस एकादशी का वर्णन बहुत ही पुण्यदायी व्रत के रूप में किया गया है, जिसे करने से संतान सम्बंधित समस्या दूर होती है.जीवन के कष्ट दूर होते हैं और मनोकामनाओं की पूर्ति का मार्ग प्रशस्त होता है.
पूजा का शुभ मुहूर्त और शुभ संयोग 
पुरुषोत्मी एकादशी के दिन पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 04:00 बजे से लेकर सुबह 07:57 बजे तक रहने वाला है. इस पावन अवसर पर सर्वार्थ सिद्धि योग भी बन रहा है, जिससे इस दिन का महत्व और अधिक बढ़ जाता है. वहीं व्रत के पारण का शुभ समय 28 मई 2026 को सुबह 05बजकर 25 मिनट से लेकर 07बजकर 56 मिनट तक रहेगा.

इस दिन भगवान विष्णु के साथ करनी चाहिए भगवान शिव की पूजा 
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जो भी श्रद्धालु इस दिन पूर्ण श्रद्धा और नियमों के साथ व्रत रखते हैं, उन्हें भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है. कहा जाता है कि इस व्रत के प्रभाव से घर में सुख-शांति बनी रहती है और पारिवारिक कलह धीरे-धीरे समाप्त हो जाते हैं. यह एकादशी व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है और मानसिक शांति प्रदान करती है.इसके साथ ही इस दिन भगवान भोलेनाथ की पूजा का भी विशेष महत्व बताया गया है. शास्त्रों के अनुसार विष्णु और शिव दोनों की आराधना करने से जीवन के समस्त कष्ट दूर होते हैं और व्यक्ति के जीवन में स्थिरता आती है. विशेष रूप से मलमास की एकादशी पर की गई पूजा का फल कई गुना बढ़कर प्राप्त होता है. इसलिए भक्तजन इस दिन व्रत, पूजा और भजन-कीर्तन में समय व्यतीत करते हैं.

संतान सुख की प्राप्ति होती 
मान्यता यह भी है कि पुरुषोत्तमी एकादशी का व्रत रखने से संतान संबंधित समस्या समाप्त होती है. माता लक्ष्मी की कृपा भी प्राप्त होती है.इससे आर्थिक परेशानियाँ धीरे-धीरे समाप्त होने लगती हैं और घर में धन-धान्य की वृद्धि होती है. जो लोग लंबे समय से आर्थिक तंगी या कर्ज जैसी समस्याओं से जूझ रहे होते हैं, उनके लिए यह व्रत विशेष लाभकारी माना जाता है.कुल मिलाकर यह एकादशी न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि जीवन में शांति, समृद्धि और सकारात्मकता लाने वाली मानी जाती है.

Latest news

Related news