धार्मिक दृष्टिकोण से समस्तीपुर जिला हमेशा से खास माना जाता रहा है. यहां कई मंदिर, मस्जिद और ऐतिहासिक धार्मिक स्थल मौजूद हैं. पर आज हम आपको एक ऐसे प्राचीन मंदिर के बारे में बता रहे हैं जिसकी कहानी बाकी सभी धार्मिक स्थलों से बिल्कुल अलग और रहस्यमयी है. यह मंदिर बूढ़ी गंडक नदी के तट पर स्थित मां काली का है. स्थानीय लोगों के अनुसार इसका इतिहास अंग्रेजों के शासनकाल से जुड़ा हुआ है. कहा जाता है कि जब भारत में अंग्रेजी हुकूमत चल रही थी, उसी दौरान यहां एक अघोरी बाबा पहुंचे थे. उन्होंने इस जगह को तपस्थली बनाया और फिर अचानक एक ही रात में मंदिर का निर्माण करा दिया. सुबह जब स्थानीय लोगों ने नदी किनारे मंदिर को देखा तो हर कोई हैरान रह गया. तभी से यह मंदिर क्षेत्र में आस्था और रहस्य दोनों का केंद्र बना हुआ है.
एक रात में निर्माण की कहानी आज भी बनी हुई है चर्चा का विषय
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस मंदिर का निर्माण सामान्य तरीके से नहीं हुआ था. मान्यता है कि अघोरी बाबा ने साधना के बल पर एक ही रात में मंदिर खड़ा कर दिया था. मंदिर बनने के बाद वह बाबा अचानक वहां से गायब हो गए. फिर कभी दिखाई नहीं दिए. यही कारण है कि इस मंदिर को लेकर लोगों के बीच आज भी कई तरह की चर्चाएं होती रहती हैं. बूढ़ी गंडक नदी के किनारे स्थित होने की वजह से यह मंदिर प्राकृतिक रूप से भी बेहद आकर्षक दिखाई देता है. हर दिन यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पूजा-अर्चना करने पहुंचते हैं. खास अवसरों पर आसपास के जिलों से भी लोग यहां दर्शन के लिए आते हैं.
श्रद्धालुओं का दावा, सच्चे मन से मांगी हर मुराद होती है पूरी
समस्तीपुर निवासी एसके झा बताते हैं कि यह मंदिर उनके जन्म से भी पहले का है. बचपन से ही वह सुनते आ रहे हैं कि यह अंग्रेजों के जमाने का मंदिर है. उन्होंने बताया कि अघोरी बाबा ने ही इसका निर्माण करवाया था. वह भी केवल एक रात में. उनका कहना है कि यहां जो भी श्रद्धालु सच्चे मन से पूजा करने आते हैं, उनकी मनोकामना जरूर पूरी होती है. यही वजह है कि वर्षों बाद भी इस मंदिर की लोकप्रियता लगातार बढ़ती जा रही है. यह स्थान आज भी लोगों की गहरी आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है.

