मदुरै: तमिलनाडु के मदुरै में चिथिरई उत्सव अपनी पूरी भव्यता पर है। इस उत्सव का सबसे मुख्य आकर्षण 'तिरुकल्याणम' (माता मीनाक्षी का विवाह समारोह) है। मदुरै के लोग माता मीनाक्षी को अपने घर की बेटी और कुलदेवी मानते हैं, इसलिए उनकी शादी में शामिल होना हर भक्त के लिए परम सौभाग्य की बात मानी जाती है।
1.5 लाख श्रद्धालुओं के लिए 'महाभोज' की तैयारी
हर साल मीनाक्षी तिरुकल्याणम के अवसर पर भव्य विवाह भोज का आयोजन किया जाता है। बढ़ती भीड़ को देखते हुए इस बार आयोजन स्थल में बदलाव किया गया है:
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स्थान: पहले यह भोज मंदिर परिसर में होता था, लेकिन अब इसे सेतुपति स्कूल के विशाल मैदान में आयोजित किया जा रहा है।
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श्रद्धालु: इस वर्ष करीब डेढ़ लाख (1.5 लाख) से अधिक लोगों के भोजन करने की उम्मीद है। पिछले साल यह संख्या लगभग 1.3 लाख थी।
भोज का मेन्यू और रसद (आंकड़ों में)
इस शाही दावत को तैयार करने के लिए मदुरै के व्यापारियों और भक्तों ने दिल खोलकर दान दिया है:
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सामग्री: प्रतिदिन 7,500 किलोग्राम चावल और लगभग 5 टन ताजी सब्जियों का उपयोग किया जा रहा है।
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सहयोग: मदुरै की मट्टुथावानी सब्जी मंडी और थेर मुट्टी क्षेत्र के दुकानदारों ने सब्जियां और किराने का सामान मुफ्त में उपलब्ध कराया है।
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रसोइये: 500 से अधिक अनुभवी रसोइये दिन-रात इस महाप्रसाद को तैयार करने में जुटे हैं।
परोसे जाने वाले व्यंजन:
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शादी की सुबह: इडली, सांभर, चटनी और वड़ा।
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दोपहर का मुख्य भोज: टमाटर चावल, नारियल चावल, सांभर, चटनी, पोरियल (सब्जी), वड़ा और मीठा पायसम।
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विशेष नाश्ता: पोंगल, केसरी और वड़ा।
17 वर्षों की परंपरा और सेवा भाव
पलामुदिरसोला मुरुगा भक्त सभा के सदस्य कार्तिकेयन के अनुसार, यह सामूहिक भोज पिछले 17 वर्षों से निरंतर आयोजित किया जा रहा है। मदुरै के निवासियों के लिए यह केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि माता मीनाक्षी के प्रति उनका प्रेम और सेवा भाव है।
मदुरै वैसे भी अपने अनोखे खान-पान के लिए दुनिया भर में मशहूर है, लेकिन चिथिरई उत्सव के दौरान यहाँ का अनुशासन और भक्तों की आस्था इस शहर की सुंदरता में चार चाँद लगा देती है। मान्यता है कि जो भी व्यक्ति इस दिव्य विवाह के भोज में शामिल होता है, उसे माता मीनाक्षी और भगवान सुंदरेश्वर का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है।

