अभिनेता प्रकाश राज ने सोशल मीडिया के जरिए बड़ा दावा करते हुए मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण (एसआईआर) की कार्यप्रणाली पर कड़ा तंज कसा था। उन्होंने बताया था कि बंगलूरू निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची से उनका नाम हटा दिया गया है। अब एक बार फिर उन्होंने इस पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए इसे 'घोटाला' करार दिया है।
'प्रशासनिक अव्यवस्था को बताया ड्रामा'
कर्नाटक में जारी एसआईआर के प्रारुप पर अपनी बात रखते हुए प्रकाश राज ने कहा कि आम जनता को कम से कम छह महीने का समय दिया जाना चाहिए। केवल एक-दो दिन पहले नोटिस थमा दिए जाते हैं। दो दस्तावेजों की मांग करके केंद्र पर पहुंचने के बाद छह-सात अतिरिक्त कागजातों के नाम पर नागरिकों को परेशान किया जाता है।
उन्होंने प्रशासनिक लापरवाही का उदाहरण देते हुए कहा कि उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार की माताजी के मतदान केंद्र की अंतिम सूची में अंग्रेजी और कन्नड़ भाषा में दर्ज विवरण पूरी तरह अलग हैं। पति का नाम और घर का पता दोनों भाषाओं में अलग-अलग लिखा गया है। उन्होंने सवाल किया कि इस तरह की व्यवस्था से किसे लाभ पहुंचाया जा रहा है।
'10 जिलों का दौरा कर सिविल सोसाइटी करेगी सोशल ऑडिट'
प्रकाश राज ने कहा कि पहले यह आश्वासन दिया गया था कि हटाए गए मतदाताओं की सूची हर बूथ पर लगाई जाएगी और ग्राम पंचायत स्तर पर बैठकें होंगी। लेकिन असलियत में एक भी बैठक आयोजित नहीं की गई।
उन्होंने आरोप लगाया कि यह सारी कागजी कार्यवाही केवल अदालत में बचाव के लिए की जा रही है, जिससे स्पष्ट होता है कि यह एक बड़ी धांधली है। इसी के विरोध में नागरिक समाज के प्रतिनिधि के तौर पर कर्नाटक के 10 अलग-अलग जिलों का दौरा किया जाएगा। विभिन्न मतदान केंद्रों पर जाकर जमीनी स्तर पर सोशल ऑडिट किया जाएगा।

