Friday, April 4, 2025

कार्बन-फ्री बिहार का सपना, नीतीश कुमार ने जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए तैयार किया नया मास्टरप्लान

जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए बिहार सरकार तेजी से कदम उठा रही है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की विशेष पहल पर राज्य में हरित आवरण को बढ़ाने के लिए खासतौर से कार्य योजना तैयार करने के निर्देश दिए गए थे. इसे लेकर संबंधित विभाग ने खासतौर से योजना तैयार की है. मुख्यमंत्री की इस पहल को साकार करने के लिए व्यापक स्तर पर संबंधित विभागों ने व्यापक पहल शुरू कर दी है. ग्रामीण विकास विभाग के स्तर से जल-जीवन-हरियाली योजना संचालित की जा रही है, जिसके तहत जल संरक्षण और हरियाली बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है. इसके अलावा सरकार क्लाइमेट रेसिलिएंट एंड लो-कार्बन डेवलपमेंट पाथ-वे नामक रणनीति दस्तावेज तैयार कर रही है. इस दस्तावेज में वर्ष 2030 और 2050 तक किए जाने वाले कार्यों की रूपरेखा तैयार की गई है. ताकि विकास कार्यों से समझौता किए बगैर वर्ष 2070 तक बिहार कार्बन-फ्री बन सके.

राज्यस्तरीय एक्शन प्लान को मिली मंजूरी

बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी) ने वर्ष 2021 में एक समझौता (एमओयू) किया था. इसके तहत जलवायु परिवर्तन पर अध्ययन किया गया. तीन वर्षों की विभिन्न बैठकों के बाद इस एक्शन प्लान को अंतिम रूप दिया गया है, जिसे अब राज्य कैबिनेट की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा.

आर्द्रभूमि संरक्षण को लेकर बड़ा कदम

बिहार में कुल 4 हजार 316 आर्द्रभूमियां (वेटलैंड) हैं, जिनका संरक्षण एवं प्रबंधन आर्द्रभूमि (संरक्षण एवं प्रबंधन) नियम, 2017 के तहत किया जाता है. सरकार का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि राज्य की कितनी जल निकायों को आर्द्रभूमि के रूप में चिह्नित किया जा सकता है.

भू-सत्यापन (ग्राउंड ट्रू थिंग):

  • इसरो द्वारा तैयार किए गए नक्शों के आधार पर यह जांचा गया कि वहां वास्तव में आर्द्रभूमि है या नहीं. तीन महीनों में यह कार्य 100% पूरा कर लिया गया है.
  • सीमांकन : सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में इस कार्य को किया जा रहा है.
  • राज्य सरकार ने आर्द्रभूमियों के संरक्षण के लिए बिहार राज्य आर्द्रभूमि प्राधिकरण की स्थापना की है. वर्ष 2020 और 2024 में दो
  • आर्द्रभूमियों को रामसर साइट घोषित किया गया, जबकि तीन और कटिहार का गोगबिल, बक्सर का गोकुल जलाशय और पश्चिमी चंपारण की उदयपुर झील को प्रस्तावित किया गया है.

पर्यावरण संरक्षण के अन्य प्रयास

बिहार सरकार मनरेगा के तहत जल निकायों के निर्माण को प्रोत्साहित कर रही है. साथ ही कृषि विभाग पानी की खपत को कम करने के लिए मोटे अनाज, ड्रिप इरिगेशन और स्प्रिंकलर तकनीक को बढ़ावा दे रहा है. हालांकि, भूमिगत जल स्तर लगातार नीचे जा रहा है और कई जिलों में आर्सेनिक और अन्य प्रदूषण की समस्याएं बढ़ रही हैं. इसके समाधान के लिए सरकार कृषि वानिकी को बढ़ावा दे रही है. इसके तहत मुख्यमंत्री कृषि वानिकी योजना और मुख्यमंत्री निजी पौधशाला योजना चलाई जा रही है, जिससे अधिक से अधिक पौधे लगाए जा सकें.

Html code here! Replace this with any non empty raw html code and that's it.

Latest news

Related news